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Sunday, 10 March 2013

जिसने सिर काटा उसे सिर पर बैठाया !

कुछ व्यक्तिगत कारणों से मेरा और मेरे मन का आपस में संपर्क ही कटा रहा, लिहाजा ना मैं ब्लाग लिख पाया और ना ही आपके ब्लागों तक पहुंच पाया। बहरहाल अब आगे बढ़ते हैं, व्यक्तिगत बातें सार्वजनिक मंच पर करके मैं आप सबको विषय से भटकाना नहीं चाहता, लेकिन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री राजा परवेज अशरफ की निजी यात्रा में भारत के सरकारी रवैये को देखकर मुझसे रहा नहीं गया और दो शब्द लिखने चला आया, क्योंकि इससे सिर्फ मैं ही नहीं पूरा देश हैरान है। मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि आखिर सिर काटने वालों को सिर पर बैठाने की जरूरत सरकार को क्यों महसूस हुई ? अब देखिए है ना अजीब हालात हैं,   पाकिस्तानी प्रधानमंत्री की यात्रा तो निजी बताई गई, लेकिन उन्होंने यहां रोटी-मुर्गा सरकारी तोड़ी। अच्छा ये भी नहीं कि वो सिर्फ अपने परिवार के साथ आए हों, बल्कि पूरे लाव-लश्कर मसलन उनकी टीम में कुल 48 लोग शामिल थे। बात आगे करूं इसके पहले विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद को जितना भी कोसा जाए, मेरे खयाल से कम होगा। वैसे सेनाध्यक्ष विक्रम सिंह ने पाक प्रधानमंत्री के देश में रहने के दौरान ही चुनौती पूर्ण बातें कर देश का मान जरूर बढाया।

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री राजा परवेज अशरफ का हफ्ते भर बाद यानि 16 मार्च को कार्यकाल खत्म हो रहा है। उन्होंने सोचा चलो चलते चलाते सरकारी विमान से अजमेर में गरीब नवाज के दरबार में मत्था टेक आएं। प्रोग्राम तो था कि बस अपने परिवार के साथ आएंगे, लेकिन जब चलने लगे तो पता चला कि दोपहर का भोजन भारत सरकार की ओर से है, फिर क्या था एक के बाद एक कुल 48 लोग सरकारी विमान में सवार हो गए। खैर पाकिस्तान को पता चलना चाहिए कि जब हम उनके आतंकवादी कसाब को कई साल तक चिकन और बिरयानी खिला सकते हैं, फिर प्रधानमंत्री राजा परवेज और उनके सिपाहसलारों को एक टाइम क्यों नहीं खिला सकते। वैसे हमारा दिल बड़ा है, हम तो ऐसा करते रहते हैं, क्योंकि हम " अतिथि देवो भव: " को मानने वाले हैं। हमारे नामचीन शायर वसीम बरेलवी भी कहते हैं कि ...

अल्लाह मेरे घर की बरकत ना चली जाए,
दो रोज से घर में कोई मेहमान नहीं है। 

लेकिन ये मेहमाननवाजी भारत सरकार को मंहगी पड़ गई। सीमा पर तैनात हमारे जवान का सिर काट ले जाने वाले पाकिस्तान को लेकर देश मे भड़का गुस्सा ठंडा नहीं पड़ा था कि हैदराबाद में सीरियल ब्लास्ट ने आग में घी डालने का काम किया। इसके बाद जब हमारे नेता पाकिस्तानी नेताओं के लिए रेड कारपेट बिछाते हैं तो देशवासियों की नाराजगी जायज ही है। यहां तक की दरगाह के दीवान जेनुअल आबेदीन ने पाकिस्तान प्रधानमंत्री को अपने हाथों से पारंपरिक सत्कार नवाजने से साफ इनकार कर दिया। उनका कहना था कि सीमा पर तैनात जवानों के सिर काट ले जाने वाले देश के प्रमुख का वो सत्कार नहीं कर सकते। अजमेर दरगाह प्रमुख ने साफ ऐलान किया कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री राजा परवेज़ अशरफ़ का स्वागत नहीं किया जा सकता, हालाकि दरगाह में खादिमो की संस्था के मुताबिक दरगाह में कोई भी श्रदालु आ सकता है। लेकिन मेरा व्यक्तिगत तौर पर मानना है कि देश में कौमी एकता की इससे बड़ी मिसाल भला क्या हो सकती है?

सवाल उठा विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद की भूमिका को लेकर। कहा गया कि जब प्रोटोकाल  के तहत अगर किसी देश का प्रधानमंत्री या राष्ट्राध्यक्ष निजी दौरे पर आते है तो नौकरशाह यानि केंद्र सरकार में विदेश मंत्रालय या फिर किसी भी महकमें का सचिव स्तर का अधिकारी उनकी आगवानी कर सकता है। मेरा सवाल है कि अगर प्रोटोकाल में साफ साफ दर्ज है कि किसी अफसर को भी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की आगवानी के लिए भेजा जा सकता था तो फिर दिल्ली में पूरा कामकाज छोड़कर विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद को जयपुर क्यों भेजा गया ? जानकारी तो यहां तक है कि सलमान खुर्शीद की तैयारी तो पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को एयरपोर्ट पर जाकर रिसीव करने की थी, लेकिन जब उन्होंने देखा कि देश की मीडिया और आम जनता में इसकी तीखी प्रतिक्रिया हो रही है तो बेचारे एयरपोर्ट जाने की हिम्मत नहीं  जुटा पाए और होटल में ही उनकी प्रतीक्षा करते रहे। अच्छा एक बात आप सबसे भी जानना चाहता हूं, आपको कैसा लगता है जब दुश्मन देश के नेता के साथ अपने देश का नेता पांच सितारा होटल में रोटी तोड़ने के बाद जनता के बीच में उसके साथ हाथ मिलाते हुए फोटो खिंचवाता है। मैं बताऊं, कसम से ऐसी गाली निकलती है, रहने दीजिए, मैं यहां लिख नहीं सकता।

खैर सलमान खुर्शीद के बारे में क्या कहूं, जब वो विकलांगों के नाम पर पैसा हड़प सकते हैं, तो फिर उनसे किसी तरह की उम्मीद करना बेमानी ही होगी। लेकिन सलमान साहब एक सवाल पूछना चाहता हूं.. जब आपके सामने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री खाने की टेबिल पर बैठे  थे तो आपका पूरा ध्यान खाने पर ही लगा होगा। चिकेन, मटन, फिश, तरह तरह की सब्जियां, पांच तरह की दालें आदि आदि। सच बताइयेगा  कि एक बार भी आपके मन में शहीद सैनिक की विधवा की तस्वीर दिखाई दी। एक मिनट भी आपको लगा कि जिसके साथ आप लजीज खाना चटखारे लेते हुए खा रहे हैं, वो उस देश का प्रधानमंत्री है जो हमारे सैनिक का सिर काट ले गया। मुझे तो पक्का यकीन है कि आपके मन में ये बात बिल्कुल नहीं आई होगी। चलिए सैनिक की बात तो हो सकती है कि आपकी नजर में पुरानी हो गई हो, क्योंकि नेताओं की मेमोरी बहुत कमजोर होती है, लेकिन हैदराबाद में सीरियल ब्लास्ट तो आपको याद ही होना चाहिए। छोड़िए सलमान साहब नेता तो आप हैं हीं, कोशिश कीजिए कि आदमी भी बन जाएं, मैं विश्वास के साथ कह सकता हूं कि जिस दिन आप आदमी बन गए ना उस दिन अच्छे नेता आप खुद बन जाएंगे।


बुरी - बुरी बातें बहुत हो गईं, कुछ अच्छी बातें भी कर लें। पहले तो मैं सेनाध्यक्ष विक्रम सिंह को सैल्यूट करना चाहता हूं। मुझे याद है कि जब पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी पाकिस्तान से बेहतर संबंध बनाने की मंशा के साथ बस में सवार होकर वहां गए तो प्रोटोकाल के तहत उनकी  आगवानी में प्रधानमंत्री के साथ तीनों सेना प्रमुखों को भी वहां होना चाहिए था। पर तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ तो वहां थे, पर सेना प्रमुख नहीं आए। अगर उस अपमान का जवाब पाकिस्तान को किसी ने दिया है तो मै कह सकता हूं कि आज सेनाध्यक्ष विक्रम सिंह ने दिया है। पहली बार हुआ होगा जब पडोसी देश (दुश्मन देश) का प्रधानमंत्री देश में था और हमारे सेना प्रमुख ने कहा कि " हमारे सैनिकों ने भी चूडियां नहीं पहन रखीं है, हम हर तरह से जवाब देने में सक्षम हैं और देंगें" । हालांकि सेना प्रमुख ने खुलकर तो विरोध नहीं किया, पर उनकी बात से साफ हो गया कि विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद के लंच देने से वो भी खुश नहीं थे। उन्हें लगा कि अगर आज सख्त विरोध दर्ज नहीं किया गया तो ये नेता देश की ऐसी तैसी करने से नहीं चूकने वाले। सेना प्रमुख ने साफ कर दिया कि सलमान खुर्शीद का उनके साथ भोजन करना कूटनीतिक फैसला होगा, उनका नहीं। सेना प्रमुख ने सच कहूं सैनिकों के मन की बात कह दी।

वैसे पाकिस्तानी प्रधानमंत्री का जयपुर और अजमेर के आम नागरिकों ने भी जमकर विरोध किया। हालत ये हो गई कि बेचारे प्रधानमंत्री जिस रास्ते से दरगाह पहुंचे, वापसी में उन्हें रास्ता बदलना पडा। मुझे लगता है कि पहली बार ही ऐसा हुआ होगा कि दूसरे देश के प्रधानमंत्री को सुरक्षा कारणों से इधर उधर से लाना ले जाना पडा। खैर मुझे तो लगता है कि पाक प्रधानमंत्री का विरोध जायज था, उन्हें संदेश मिलना चाहिए कि देश जनता भी उनके देश की करतूतों से वाकिफ है और जरूरत पड़ने पर वो भी ना सिर्फ सड़क पर उतर सकती है, बल्कि किसी भी हद तक जा सकती है।



मित्रों !  मेरे दूसरे ब्लाग TV स्टेशन पर भी आपका स्वागत है। यहां आपको मिलेगा कुंडा की घटना का सच। मतलब मैने बताने की कोशिश की है कि उस घटना को लेकर दरअसल पर्दे के पीछे चल क्या रहा है। मेरा तो मानना है कि लोगों को सीओ से कत्तई हमदर्दी नहीं रह गई, राजनेता उस परिवार की आड़ में वोट बैंक दुरुस्त करने में लगे हैं, बेगम साहिबा ने नौकरी पाने वालों  की इतनी लंबी सूची थमा दी है.. अब सबकुछ यहीं नहीं। आइये दूसरे ब्लाग पर..

लिंक भी दे रहा हूं..  http://tvstationlive.blogspot.in/2013/03/blog-post_10.html?showComment=1362986326233#c7175009973830449847





Tuesday, 16 October 2012

मंत्री के काबिल नहीं रहे सलमान ...

 आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद कानून मंत्री सलमान खुर्शीद को अब पद पर बने रहने का अधिकार नहीं रह गया है। भाई आपको हो क्या गया है ? हर किसी को धमकी देते फिर रहे हैं, पत्रकार को कोर्ट में देख लेने की धमकी, अरविंद टीम को फर्रुखाबाद में देख लेने की धमकी। एक मंत्री अगर ऐसा कहे कि फर्ऱूखाबाद चले तो जाएंगे, लेकिन लौटने का भी इंतजाम कर लीजिए। ये क्या बात है ? क्या कहना चाहते हैं मंत्री जी, क्या आप ये कह रहे हैं कि जो आपके काले कारनामों की पोल खोलेगा उसकी आप सुपारी दे देंगे ? जो बात कहते हुए आपको देश ने सुना है, उसके बाद तो आप एक मिनट भी केंद्रीय मंत्रिमंडल में रहने के काबिल नहीं है। ऐसी धमकी देने वाले की जगह जेल होती है। बिना किसी लाग लपेट के आपको तत्काल देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए। वैसे भी जांच में जो प्राथमिक सूचनाएं उत्तर प्रदेश से मिल रही हैं, उससे आपका गोरखधंधा सामने आता जा रहा है।  
कानून मंत्री सलमान खुर्शीद साहब फिलहाल बुरे फंस गए। बेचारे अपने ही पैर में कुल्हाड़ी मार बैठे। खुर्शीद साहब आपको तो हम सब सुलझा हुआ नेता समझते हैं, पर आप भी वही निकले। ( जब तक मामला कोर्ट में है तब तक मैं आपको भ्रष्ट नहीं कह रहा।) पर एक बात बताऊं इस मामले में जितने कागजात मीडिया के पास हैं, उससे तो आप के खिलाफ स्टोरी बनती ही थी और आजतक ने अगर आपको कटघरे में खड़ा किया तो मैं समझता हूं कि कोई गल्ती नहीं की। वैसे सलमान जी एक बात बताइये, आप भी जानते हैं कि जिनके घर शीशे के होते हैं, वो दूसरों पर पत्थर नहीं फैंकते। आपको ये राय किसने दे दी कि घर पर मीडिया को बुलाकर तेज आवाज में बात कर उनकी आवाज दबाने की कोशिश करो। क्या जरूरत थी प्रेस कान्फ्रेंस में पत्रकारों पर भारी पडने का प्रयास करने की। देखिए ना जो खबर एक दो दिन चल कर हट जाती, वो आज तक चल रही है और उसमें आपकी कितनी फजीहत हो रही है।

वैसे सलमान साहब सब जानते हैं कि चाहे आपका ट्रस्ट हो या फिर किसी और का। कहीं ईमानदारी नहीं है, इसीलिए तो जब नेताओं ने कहा कि लोकपाल के दायरे में नेताओं को डालो तो एनजीओ को भी शामिल कर दो। तो बड़े बड़े लोगों की हवा निकल गई थी, खुद अरविंद केजरीवाल ने भी इसका विरोध किया। बाद में सफाई दी गई कि उन एनजीओ को इसमें शामिल किया जाए जो सामाजिक कार्यों के लिए सरकार से पैसे लेते हैं। देश में 40 फीसदी से ज्यादा ऐसे एनजीओ हैं, जिन्हें विदेशों से पैसा मिलता है। उन्हें लगा कि वो ऐसा बोल कर बच सकते हैं, क्योंकि इस पैसे का दुरुपयोग होता ही है। सरकारी पैसे लेने वाले जो एनजीओ हैं उसमें 90 फीसदी एनजीओ नेताओं और अफसरों की पत्नियों के नाम है। नेता और अफसर अपनी पत्नी को एनजीओ का कर्ताधर्ता बनाकर सरकारी पैसे की लूट करते हैं। ये बात किसी से छिपी नहीं है, इसलिए इस पर ज्यादा चर्चा करना ही बेकार है।

आइये सलमान खुर्शीद साहब से ही बात की जाए। दरअसल सलमान जी देश में चोर वही है जो पकड़ा जाए। गुस्सा मत हो जाइयेगा, पर ये सच्चाई है कि आप पकड़ गए। आपके ट्रस्ट का कच्चा चिट्ठा सार्वजनिक हो चुका है। इसलिए अब ये कहना कि सब कुछ अच्छा भला है तो इस बात को कोई नहीं मानने वाला। सच बताऊं मुझे लगा कि आप लंदन से दिल्ली आने पर जब देखेंगे कि पूरा माहौल आपके खिलाफ है, तो आप कुछ ऐसा निर्णय लेगे, जिससे आपकी किरकिरी होने से बच जाए। आदमी कितना भी बड़ा क्यों ना हो, लेकिन जब वो बेईमानी में फंस जाता है तो उसके लिए आंख मिलाकर बात करना संभव नहीं रहता है। ऐसे में मुझे नहीं पता कि आप किसकी सलाह पर मीडिया से दो दो हाथ करने को तैयार हो गए और प्रेस कान्फ्रेंस में आस्तीन चढ़ाने लगे। सलमान साहब सच में आपने एक अच्छा मौका गवां दिया। आप कह सकते थे कि ये सारा मामला दो तीन साल पुराना है, मैं मंत्री बनने के बाद ट्रस्ट के काम में ज्यादा वक्त नहीं दे पाया। मीडिया ने जो भी आरोप लगाए हैं, मैं चाहूंगा कि उसकी जांच सरकार भी करे और मैं भी करुंगा। दोषी लोग बख्शे नहीं जाएंगे। इससे सांप भी मर जाता और लाठी भी बची रहती। पर आपने उल्टा किया, हालत ये हो गई कि मीडिया ने आपकी जितनी किरकिरी नहीं की, उससे ज्यादा तो आपने अपने आचरण से करा ली।

अच्छा अभी भी आप हास्यास्पद काम कर रहे हैं। मानहानि का मुकदमा दिल्ली, मुंबई और लंदन में कर रहे हैं। अखबारों में पढ़ा कि आपने दो सौ करोड़ रुपये की मानहानि का दावा  ठोका है। मैं सोचता था कि आप जैसे नेताओं के मान सम्मान की कोई कीमत नहीं लगा सकता, देश दुनिया में आपका नाम है। लेकिन आपने खुद ही अपने सम्मान की कीमत लगा दी, इसीलिए सब कह रहे हैं कि आपकी कीमत लगाई जा सकती है। खैर मेरा मानना है कि आप सैकड़ों अदालत में मामला दायर करते, लेकिन कीमत टोकन मनी एक रुपया रखते तो आपका सम्मान बहुत ज्यादा बढ़ जाता। सलमान साहब आप वकील हैं, ज्यादा बेहतर कानून समझते हैं। आपको ऐसा नहीं लग रहा है कि आप कई कोर्ट में मामला दर्ज कर मीडिया हाउस पर अनैतिक दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। ये तो टीवी टुडे ग्रुप है, कोई हल्का फुल्का ग्रुप होता तो उसका संपादक अब तक आपके चरणों में आ गया होता। आपकी कार्रवाई में इसी अहम की बू आ रही है। अच्छा एक सवाल मेरा भी है, एक ओर आप खुद सरकार को पत्र लिख रहे हैं कि पूरे मामले की जांच करा ली जाए, दूसरी ओर मानहानि का मामला भी दायर कर रहे हैं। अगर जांच रिपोर्ट में ये बात साबित हो जाए कि आपकी संस्था में भ्रष्टाचार हुआ है, तो फिर किस बात की मानहानि। ऐसे में पहले तो जांच रिपोर्ट का इंतजार आप भी कर लेते, उसके बाद कोर्ट जाते। लेकिन साहब आप तो मंत्री है, जांच रिपोर्द में जो लिखा होगा, वो आपको पहले ही पता है, इसीलिए तो जांच की बात भी कर रहे हैं और मानहानि का मुकदमा भी। 

सलमान साहब एक शिकायत है आपसे। आप बहुत पुराने नेता हैं और उत्तर प्रदेश में काफी समय तक कांग्रेस के अध्यक्ष भी रह चुके हैं, मेरा मानना है कि आपको प्रेस कान्फ्रेंस में अपने व्यवहार पर चेक लगाना चाहिए था। आमतौर पर जब आदमी के पास किसी बात का जवाब नहीं होता है, या उसकी कोई चोरी पकड़ जाती है तो वो सामने वाले पर तेज आवाज में बोलकर हावी होने की कोशिश करता है। इसीलिए ना " चोरी और सीनाजोरी " की कहावत ज्यादा सुर्खियों में रहती है।  हो सके तो प्रेस कान्फ्रेंस की सीडी किसी मीडिया हाउस से मंगवा लें, और खुद देंखे कि उस दौरान आप कैसे लग रहे थे। वैसे भी जिस अंदाज में आप प्रेस कान्फ्रेंस में पत्रकार भाई को कोर्ट में देख लेने की चुनौती दे रहे थे, उससे यही मैसेज जा रहा था कि आप कानून मंत्री हैं और उसकी ताकत पत्रकार नहीं समझ रहे हैं।  
लक्ष्मण रेखा तो पत्रकार ने भी लांघी ...

मेरा मानना है कि हमें जर्नलिस्ट और एक्टिविस्ट में अंतर करना ही होगा। सलमान की प्रेस कान्फ्रेंस में जिस अंदाज में पत्रकार भाई नजर आए उसे भी सभ्य समाज में हम जायज नहीं ठहरा सकते। सलमान और उनकी पत्नी को अगर इस विषय पर कोई जवाब देना होता तो वो पहले ही दे देते। डेढ़ महीने से मीडिया हाउस इस स्टोरी पर काम कर रहे था। उनके पास कोई जवाब था ही नहीं। इसलिए वो फर्जीवाडा करते रहे। लेकिन प्रेस कान्फ्रेस में चैनल जानबूझ कर कहें या शरारतन हंगामे की स्थिति पैदा करने गया था, क्योंकि  जिस तरह से प्रेस कान्फ्रेस मे उस मीडिया हाउस के लगभग दर्जन भर पत्रकार और कैमरामैन थे, उससे ही ये लग गया कि कुछ होने वाला है। फिर एक कैमरा सलमान पर, दूसरा कैमरा पत्रकार पर लगा हुआ था। जब सलमान खुर्शीद बोल रहे थे, उस समय भी चैनल ने दो फ्रेम बनाया, मकसद साफ था, वो जनता को मैसेज दे रहे थे कि यहीं रहें हमारे पत्रकार जी कुछ करने वाले हैं। सलमान के व्यवहार की तो मैं निंदा कर चुका हूं, लेकिन पत्रकार के व्यवहार और अंदाज दोनों की जितनी निंदा की जाए वो कम है।


एक जरूरी सूचना :-

मित्रों आपको पता है कि मैं इलेक्ट्रानिक मीडिया से जुडा हूं। दिल्ली में रहने के दौरान सियासी गलियारे में जो कुछ होता है, वो तो मैं सबके सामने बेबाकी से रखता ही रहता हूं और उस पर आपका स्नेह भी मुझे मिलता है। अब लगता है कि आप में से बहुत सारे लोग टीवी न्यूज तो देखते हैं, लेकिन इसकी बारीकियां नहीं समझ पाते होगें। मैने तय किया है कि अब आपको मैं टीवी फ्रैंडली बनाऊं। मसलन टीवी के बारे में आपकी जानकारी दुरुस्त करुं, गुण दोष के आधार पर बताऊं कि क्या हो रहा है, जबकि होना क्या चाहिए। इसमें मैं आपको इंटरटेंनमेंट चैनल को लेकर भी  उठने वाले सवालों पर बेबाकी से अपनी राय रखूंगा। मेरी नजर प्रिंट मीडिया पर भी बनी रहेगी। इसके लिए मैने  एक नया ब्लाग बनाया है, जिसका नाम है TV स्टेशन ...। इसका URL है।   http://tvstationlive.blogspot.in । मुझे उम्मीद है कि मुझे इस नए ब्लाग पर भी आपका स्नेह यूं ही मिता रहेगा।    


Wednesday, 10 October 2012

नाना का नाम धो डाला खुर्शीद दंपत्ति ने ...

कांग्रेस का दिन ही खराब है। सोनिया गांधी के दामाद राबर्ट वाड्रा का मामला अभी ठंडा नहीं पडा है कि पार्टी के रसूखदार नेता कानून मंत्री सलमान खुर्शीद की चोरी पकड़ी गई। अब तक जितने भी तथ्य सामने आए हैं, उसे देखते हुए सलमान को उनकी पत्नी सहित जेल में होना चाहिए। लेकिन मुश्किल ये है कि देश में अपराधियों को सजा कहां मिल पाती है, फिर अपराधी अगर नेता है तब तो सजा बहुत मुश्किल है, वो नेता अगर मंत्री है तब तो सजा का सवाल ही नहीं उठता। वैसे सच ये भी है कि नेता अक्सर खुद को समाजसेवी बताते हैं और कहीं वें सांसद या विधायक चुन लिए गए फिर तो उनके समाजसेवा का कद और बढ़ जाता है, किसी वजह से उन्हें मंत्री का ओहदा मिल गया तब तो वो खुदा बन जाते हैं। जनहित के नाम पर नंगा नाच करने वाले ऐसे ही दंपत्ति सलमान खुर्शीद और उनकी पत्नी लुइश खुर्शीद को बेनकाब किया आज तक ने अपने खास कार्यक्रम आपरेशन दृटराष्ट में।

आइये आपको बताते हैं इस मंत्री की कारस्तानी। पहले तो मंत्री जी ने अपने नाना यानि देश के राष्ट्रपति रहे जाकिर हुसैन के नाम से एक एनजीओ का गठन किया। इस एनजीओ का नाम है जाकिर हुसैन मेमोरियल ट्रस्ट। इसका पता मंत्री जी का निवास यानि 4, गुलमोहर एवेन्यू, जामियानगर, नई दिल्ली दर्ज है। ये पता देश के कानून मंत्री सलमान खुर्शीद का है। खुर्शीद ने अपने नाना की याद में ये ट्रस्ट बनाया। अब इस ट्रस्ट पर आरोप है कि विकलांग कल्याण के नाम पर सरकारी ग्रांट हड़पने के लिए तमाम जालसाजी की गई है। आपको हैरानी होगी कि गोरखधंधे में लिप्त जाकिर हुसैन मेमोरियल ट्रस्ट के अध्यक्ष खुद सलमान खुर्शीद हैं और इसकी प्रोजेक्ट डायरेक्टर के रूप में उनकी पत्नी लुइस खुर्शीद है। 

दरअसल इस मामले का खुलासा हुआ उत्तर प्रदेश सरकार के एक गोपनीय पत्र के जरिए। ये पत्र यूपी सरकार ने भारत सरकार के सामाजिक न्याय अधिकारिता मंत्रालय को लिखा था। इस पत्र से ही जाकिर हुसैन मेमोरियल ट्रस्ट के गोरखधंधे का खुलासा हो गया। अच्छा इसमें दो चार हजार रुपये नहीं पूरे 71 लाख रूपये डकार गए ये नेता। आपको पता ही है कि सलमान खुर्शीद केंद्र में कद्दावर नेता हैं। इसीलिए भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने खुर्शीद के ट्रस्ट को 71 लाख 50 हजार रुपये का भुगतान किया। इस पैसे से चलने फिरने में असमर्थ विकलांगों को व्हील चेयर दी जानी थी। इसके अलावा कम सुनने वालों को हियरिंग एड दिया जाना था। इन सामानों के वितरण का तरीका तो ये था कि  पहले वहां के डीएम को बताया जाता, जिले के कल्याण अधिकारी अपनी सूची भेजते, शिविर लगाया जाता, चीफ मेडिकल ऑफिसर शिविर में मौजूद होते और जिसे वो कहते उसे जाकिर हुसैन मेमोरियल ट्रस्ट तिपहिया या हियरिंग एड देता।

वैसे ये कार्रवाई तो तब की जाती जब इन नेताओं का मन साफ होता। इनका मकसद तो विकलांग कल्याण के नाम पर मिले पैसों को हड़पना था, लिहाजा किसी को कोई जानकारी नहीं दी गई। फर्रुखाबाद जहां सलमान खुर्शीद का कार्यक्षेत्र है, वहां के जिला कल्याण अधिकारी ने दावा किया कि उन्हें जाकिर हुसैन ट्रस्ट के बारे में कोई जानकारी नहीं है। लेकिन सलमान खुर्शीद की पत्नी लुईस खुर्शीद का दावा है कि फर्ऱूखाबाद में शिविर भी लगा, वहां विकलांगों को उपकरण भी बंटा, अफसरों को इसकी जानकारी भी दी गई। लेकिन यहां के सभी अफसरों ने ऐसी किसी जानकारी से इनकार कर दिया। इसी तरह मैनपुरी के अलावा कुछ और जिलों में भी इस ट्रस्ट के नाम पर गोरखधंधा किया गया।

हैरानी की बात तो ये है कि केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय को पिछले साल मई में ही इस बात की जानकारी मिल गई थी कि सलमान खुर्शीद की अगुवाई वाला ट्रस्ट ईमानदारी से काम नहीं कर रहा है। यहां से जो पैसे दिए जाते हैं उसकी बंदरबांट हो रही है, लेकिन जब मंत्री रसूखदार हों तो भला छोटे मोटे अफसर और कर्मचारी इनके खिलाफ कार्रवाई की हिम्मत कैसे जुटा सकते थे। लिहाजा सब कुछ जानते हुए भी पैसों का भुगतान होता रहा। इस मामले की जानकारी के बाद आज तक ने अपनी टीम का जाल बिछाया और स्टिंग आपरेशन की योजना बनाई। इस आपरेशन में अफसरों की बेबसी खुफिया कैमरे पर दर्ज हुई। पता चला कि ट्रस्ट ने बड़े-बड़े अफसरों के फर्जी दस्तखत और मुहर लगाकर कागजों में कैंप लगाए, बेनामी लाभार्थियों की लिस्ट बनाई गई, पूरा पैसा हजम कर लिया गया।

जांच पड़ताल शुरू हुई तो पता चला कि सलमान खुर्शीद की अध्यक्षता वाले ट्रस्ट ने ना सिर्फ पैसा हड़पा, बल्कि इन्होंने अफसरों के फर्जी हस्ताक्षर, मुहर और पदनाम तक बना डाले। कुछ अफसरों ने भी कैमरे पर कहा कि उनके फर्जी हस्ताक्षर किए गए हैं। बताते हैं कि शिकायत मिलने सरकार ने भी 17 जिलों के जिलाधिकारी से रिपोर्ट तलब की। जब जिलों से जांच की रिपोर्ट आने लगी को सलमान खुर्शीद के ट्रस्ट की कलई खुल गई। पता चला कि लाभार्थियों को मदद मिली या नहीं इसकी तस्दीक करने वाली सरकारी टेस्ट रिपोर्ट में भी जमकर कलाकारी की गई। इटावा से आई रिपोर्ट में सीएमओ के दस्तखत जाली थे, बुलंदशहर से रिपोर्ट आई कि विकलांग कल्याण अधिकारी का दस्तखत भी फर्जी है और मुहर भी। और तो और बुलंदशहर में जिस चिकित्सा अधीक्षक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का ज़िक्र है वो तो वजूद में ही नहीं है। सलमान खुर्शीद के ट्रस्ट ने शाहजहांपुर में फर्जी ब्लॉक भी बना डाला।

बहरहाल ये बात तो साफ हो चुकी है कि कांग्रेस के कद्दावर नेता और कानून मंत्री सलमान खुर्शीद और उनकी पत्नी इस मामले में पूरी तरह जिम्मेदार है। नैतिकता का तकाजा यही है कि सलमान खुद अब सरकार से हट जाएं, लेकिन मनमोहन सिंह की अगुवाई वाले में मंत्रिमंडल तो चोरों की फौज है, इसलिए भला अकेले सलमान ही क्यों इस्तीफा दें। हां सलमान ने विकलांगों यानि अपाहिज लोगों को पैसा हड़पा है, इसकी सजा कानून की अदालत में तो उन्हें मिल नहीं सकती है, क्योंकि वो खुद कानून मंत्री हैं। चलिए हम सब इंतजार करेंगे कि उन्हें भगवान की अदालत से सजा मिले।

एक जरूरी सूचना :-

मित्रों आपको पता है कि मैं इलेक्ट्रानिक मीडिया से जुडा हूं। दिल्ली में रहने के दौरान सियासी गलियारे में जो कुछ होता है, वो तो मैं सबके सामने बेबाकी से रखता ही रहता हूं और उस पर आपका स्नेह भी मुझे मिलता है। अब लगता है कि आप में से बहुत सारे लोग टीवी न्यूज तो देखते हैं, लेकिन इसकी बारीकियां नहीं समझ पाते होगें। मैने तय किया है कि अब आपको मैं टीवी फ्रैंडली बनाऊं। मसलन टीवी के बारे में आपकी जानकारी दुरुस्त करुं, गुण दोष के आधार पर बताऊं कि क्या हो रहा है, जबकि होना क्या चाहिए। इसमें मैं आपको इंटरटेंनमेंट चैनल को लेकर भी  उठने वाले सवालों पर बेबाकी से अपनी राय रखूंगा। मेरी नजर प्रिंट मीडिया पर भी बनी रहेगी। इसके लिए मैने  एक नया ब्लाग बनाया है, जिसका नाम है TV स्टेशन ...। इसका URL है।   http://tvstationlive.blogspot.in । मुझे उम्मीद है कि मुझे इस नए ब्लाग पर भी आपका स्नेह यूं ही मिता रहेगा।