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Friday, 30 August 2013

चोर नहीं चोरों के सरदार हैं पीएम !

नमोहन सिंह जी मैं आपके साथ हूं, मैं कह रहा हूं कि आप चोर नहीं है, आप चोरों के सरदार हैं। अगर विपक्ष कहता है कि प्रधानमंत्री चोर हैं तो मान लिया जाना चाहिए कि विपक्ष की जानकारी कम है। वैसे आप भावुक व्यक्ति है, जज्ज़बाती हो गए और संसद में बोल गए कि विपक्ष प्रधानमंत्री को चोर कहता है, बताइये अब ये बात संसद की कार्रवाई में दर्ज हो गई ना। ऐसे तो देश अपने नेताओं के कितने बड़े-बड़े दाग भूल जाता है। आपकी ही की पार्टी की पूर्व प्रधानमंत्रियों इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के बारे में देश भर में क्या - क्या नारे नहीं लगते थे ? एक नारा ये भी लगा करता था " गली-गली में शोर है, इंदिरा गांधी .......... है। आपने सुना कभी कि इंदिरा जी या राजीव गांधी ने कोई जवाब दिया हो। उन्होंने कभी रियेक्ट नहीं किया। ये ऐसे मामले थोड़े होते हैं कि इस पर प्रतिक्रिया दी जाए। बस एक कान से सुनिए और दूसरे निकाल दीजिए। चलिए कोई बात नहीं गलती हो गई, अब आगे देखिए। वैसे पता नहीं आपके सलाहकार कौन हैं, लेकिन सच में आपको सलाह गलत मिल रही है। ये कहने की क्या जरूरत थी कि आप कोल ब्लाक से जुड़े फाइल के संरक्षक नहीं है, मुझे तो लगता है कि ये गैरजिम्मेदाराना वक्तव्य है।

खैर प्रधानमंत्री जी, आप बेशक  चोर ना हों, लेकिन आपकी सरकार ने चोरी के सारे रिकार्ड तोड़ दिए हैं। सरकारों पर एक आरोप हो, दो हो, बात समझ में आती है। आपकी सरकार के लगभग हर मंत्री पर कोई ना कोई आरोप लगता ही जा रहा है। बात टू जी स्पेक्ट्रम घोटाले की हुई तो आपकी सफाई आई कि गठबंधन की सरकारों में कुछ दिक्कतें रहती हैं। मतलब आपने समर्थन दे रही पार्टी पर इसका ठीकरा फोड़ दिया। लेकिन काँमनवेल्थ घोटाला, आदर्श घोटाले के बारे में आप क्या कहेंगे ? आपके रेलमंत्री ने क्या गुल नहीं खिलाया। कोल ब्लाक आवंटन के मामले ने तो आपकी सरकार को नंगा ही कर दिया। इसकी जांच रिपोर्ट में हेराफेरी के मामले में आपके कानून मंत्री को इस्तीफा देना पड़ गया। सुप्रीम कोर्ट ने जिस तरह की टिप्पणी सरकार और सीबीआई के बारे में की वो भी सरकार के लिए शर्मनाक रही है। आप ही बताइये जिस मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में चल रही हो, उसकी फाइल गायब हो जाए, और ये मसला उस वक्त का हो, जब कोल मंत्रालय प्रधानमंत्री के पास हो, ऐसे में आप भला जिम्मेदारी से कैसे बच सकते हैं ? खैर इस मामले में सच्चाई सब को पता है।

चलिए प्रधानमंत्री जी हम आपके शुभचिंतक हैं, इसलिए कुछ बात आपसे सीधे पूछ रहे हैं। क्या आपको लगता है कि वाकई आप देश के प्रधानमंत्री हैं ? हां आप कानून और संविधान की बात करते हुए कह सकते हैं कि मैं देश का प्रधानमंत्री हूं। फिर मेरा सवाल होगा कि देश के प्रधानमंत्री के पास जो अधिकार हैं, क्या वो आपके पास है ? आप फिर कहेंगे कि हां वो अधिकार मेरे पास है। मैं फिर सवाल करूंगा कि आपकी सरकार में जो लोग मंत्री हैं, क्या आपको लगता है कि वो आपकी मर्जी यानि आपकी पसंद के हैं ? इस सवाल पर आप खामोश हो जाएंगे, कुछ नहीं बोलेंगे। बुरा मत मानिएगा, एक सवाल और पूछ रहा हूं। सोनिया गांधी ने आपको ही प्रधानमंत्री क्यों बनाया ? कभी इस पर विचार किया आपने ? अब ये मत कह दीजिएगा कि मैं लोकप्रिय नेता हूं और मेरी वजह से चुनाव में पार्टी को फायदा पहुंचता है। मैं बताता हूं आपको प्रधानमंत्री इसलिए बनाया गया क्योंकि सोनिया को पता था कि शरीर में जो सबसे जरूरी हड्डी यानि रीढ़ की हड्डी है, वो आपके पास नहीं है। आपकी सबसे बड़ी क्वालिटी सोनिया जी की नजर में यही थी कि आपको उंगली इशारे पर आसानी से नचाया जा सकता है। आपने कभी सोचा नहीं की प्रणव दा जब वित्तमंत्री थे तो आप वित्त विभाग के सचिव थे। क्या आपको प्रणव दा की काबीलियत पर किसी तरह का संदेह है? मेरे ख्याल से नहीं होगा। कड़वी बात कह रहा हूं, गुस्सा मत हो जाइयेगा। आप नौ साल पहले भी देश के प्रधानमंत्री नहीं थे और आज भी नहीं हैं। आप सिर्फ प्रधानमंत्री पद के केयरटेकर हैं, जैसे ही राहुल इसके काबिल हो जाएगें, आपकी छुट्टी हो जाएगी।

चूकि आज आपने खुद बात छेड़ दी, इसलिए एक आम आदमी की तौर पर मैं आपसे सीधे बात करना चाहता हूं। आपने राज्यसभा में कहा कि दुनिया में कहीं भी विपक्ष के नेता देश के प्रधानमंत्री को चोर नहीं कहते। मैं आपकी इस बात से सहमत हूं, लेकिन ज्यादा दूर की बात नहीं करूंगा, चीन में ही उसके एक मंत्री पर भ्रष्टाचार का आरोप सिद्ध हुआ तो अदालत ने उसे फांसी की सजा सुनाई है। अपने देश में कितने चोट्टे हैं, उन्हें फांसी तो दूर वो आपकी  सरकार में मंत्री बने बैठे हैं। इसलिए आप विदेशों से अपनी तुलना मत किया कीजिए। बात आपने शुरू की है तो एक सवाल और पूछ लेते हैं। किस देश में मुलायम सिंह यादव  और मायावती जैसी नेता और उनकी जैसी पार्टी है। बहुत गरज कर बोल रहे थे, बताइये अगर सीबीआई का डर ना हो तो ये दोनों आपकी सरकार को समर्थन दे सकते हैं ? नीतिगत विरोध पर आप अपने ईमानदार सहयोगियों को किनारे कर देते हैं। वामपंथी आपसे क्या मांग रहे थे ? कोई सौदेबाजी कर रहे थे ? नहीं ना । ममता बनर्जी क्या भ्रष्ट हैं, उनकी पार्टी की कुछ सोच है, जिससे वो समझौता नहीं कर सकतीं। आपने दोनों को किनारे कर दिया। आपको मुलायम और मायावती का साथ रास आ रहा है। प्रधानमंत्री जी आपकी सरकार की बुनियाद ही बेईमानी और भ्रष्टाचार पर टिकी है, इसलिए आपके मुंह से अच्छी बातें भी बहुत बुरी लगती हैं।

अब बहुत ज्यादा लंबी बात करने का मन नहीं है। क्या आपको अभी भी लगता है कि आप एक ईमानदार सरकार चला रहे हैं ? आपको पता है ना कि आपके समय में ये संसद भी कलंकित हो गई, जहां सांसदों की खरीद फरोख्त का मामला सामने आया। राज्यसभा में जब आप आक्रामक होने की कोशिश कर रहे थे और नेता विपक्ष अरुण जेटली ने आपको तीखा जवाब दिया कि दुनिया के दूसरे देशों में सांसदों की भी खरीद फरोख्त भी नहीं होती, उस वक्त आप का चेहरा देखने लायक था। ऐसा लगा कि सरेआम किसी चौराहे पर प्रधानमंत्री के कपड़े उतार लिए गए हों। आप भौचक रह गए, आपको उम्मीद भी नहीं थी कि विपक्ष से ऐसा तीखा जवाब मिलेगा। आमतौर पर प्रधानमंत्री की भाषा बहुत संयमित होती है, जिससे उनकी बातों के बीच सदन में टीका टिप्पणी ना हो, लेकिन आज तो सदन में भी आप चारो खाने चित्त हो गए। वैसे मेरी समझ में नहीं आया कि आप खड़े तो हुए थे चौपट हो रही अर्थव्यवस्था पर अपनी बात कहने, कई महीने पहले आपको सदन में चोर कहा गया था, उस वक्त तो आप खामोश थे, इतनी पुरानी बात आज कहां से याद आ गई ?

आखिर में एक ही बात कहूंगा कि प्रधानमंत्री रहते हुए रिटायरमेंट ले लीजिए, आपके लिए ज्यादा बेहतर होगा। वजह पहले तो मुझे नहीं लगता कि कांग्रेस के नेतृत्व में अगली सरकार बन सकती है। मान लीजिए बन भी गई तो सौ फीसदी गारंटी है कि आप प्रधानमंत्री नहीं बन सकते। वैसे तो कांग्रेस की कोशिश होगी कि राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाकर घाघ कांग्रेसी नेता मजे लूटें, अगर किसी वजह से राहुल तैयार नहीं हुए तो विकल्प  की तलाश होगी। अंदर की बात बता दूं, बहुत सारे कांग्रेसी सोनिया जी के करीब आने के चक्कर में आपरेशन कराकर अपने शरीर में मौजूद रीढ़ की हड्डी निकलवा रहे हैं। इसलिए अच्छा मौका है अभी आप पर कमजोर प्रधानमंत्री का ही आरोप सिद्ध हुआ है, भ्रष्ट प्रधानमंत्री का नहीं। चुपचाप शानदार एक्जिट ले लीजिए, शुकून में रहेंगे। वरना चुनाव में पार्टी की हार का ठीकरा आप पर ही फोड़ी जाएगी, और आप सख्त होकर जवाब भी नहीं दे पाएंगे।



Sunday, 8 April 2012

जी हां ! आज है मेरा जन्मदिन ...


जी हां ! आज मेरा जन्मदिन है। सोचा तो था कि धूमधाम से जन्मदिन मनाऊंगा, खूब हंगामा बरपाऊंगा, कोशिश करुंगा कि पूरा परिवार मेरी इस खुशी में शिरकत करे, क्योंकि ये जन्मदिन कुछ खास है। लगता है कि आप सब घबरा गए कि एक और खर्च बढ गया, गिफ्ट लेने जाएं। फिर कोरियर करें, इतनी जहमत मत उठाइये । चलिए मैं पहले ही आपको बता दूं कि जन्मदिन मेरा नहीं, बल्कि मेरे ब्लाग " आधा सच " का है। ठीक साल भर पहले आज के ही दिन आठ अप्रैल को मैने अपना पहला लेख लिखा, जिसमें मैने अन्ना को जनता की असल दिक्कत बताने की कोशिश की। यानि देश की जनता के असल मुद्दे हैं क्या ? सच बताऊं देश की जनता भ्रष्टाचार से बिल्कुल नाराज नहीं है। उसकी  तो मांग भी अन्ना से बिल्कुल अलग है, जनता चाहती है कि देश में भ्रष्टाचार को ईमानदारी से लागू किया जाए। इससे कम से कम काम हो जाने की तो गारंटी रहेगी।

देश में लोगों ने कभी भ्रष्टाचार का विरोध किया ही नहीं, ना आज करना चाहते है। उनकी मुश्किल ये है कि भ्रष्टाचार में ईमानदारी नहीं रह गई है। नेताऔ इसर अफसर पैसे ले लेते हैं और काम भी नहीं करते हैं। अन्ना के सामने जितनी भीड़ खड़ी होकर बोलती है कि मैं भी अन्ना तू भी अन्ना, इसमें 99 फीसदी वही लोग हैं जो चाहते हैं कि नेता और अफसर पैसे लें और काम तुरंत काम कर दें, बेवजह की किच किच ना करें। बहरहाल ब्लाग में मेरी शुरुआत इसी दर्शन के साथ हुई थी। मेरा भी मानना है कि देश भ्रष्टाचार कभी खत्म नहीं हो सकता। हमें आंदोलन का रुख इस ओर मोडना चाहिए कि भ्रष्टाचार में ईमानदारी हो।

मुझे भी जाने क्या हो गया है, जन्मदिन पर भी ऐसी वैसी बातें याद आ रही हैं। लेकिन करें क्या गंदा है, पर धंधा है ना। छोड़िए दूसरी बातें, आइये मुद्दे की बात करें। वैसे आपने ये नहीं  पूछा कि जब जन्मदिन पर  हमने धमाल मचाने का मन बना लिया था, फिर क्या हुआ कि पूरे दिन खामोश रहे और रात में लोगों को बता रहे हैं कि आज मेरा जन्मदिन है। सच बताऊं ब्लाग परिवार से मन बहुत खट्टा है। तकलीफ ये है कि जिन लोगों का काम ब्लाग परिवार के नाम पर धब्बा जैसा है, वो सभी परिवार के बहुत सीनियर हैं। मैं उनके बारे में कुछ कह नहीं सकता। हम लोग जब बहुत गुस्से में होते हैं तो कहते हैं ना कि आप लक्ष्मण रेखा पार मत कीजिए। मतलब ये कि जब धैर्य जवाब दे जाए तो भी हम दूसरों को लक्ष्मण रेखा की याद दिलाते हैं। पर सच कहूं आज कुछ लोगों ने ना सिर्फ लक्ष्मण रेखा पार कर चुके हैं, बल्कि वो इससे इतनी दूर आ चुके हैं कि चाहें तो चेहरे पर लगे दाग मिटा नहीं सकते।

हां आज कल परिवार में लोग जिस तरह से एक दूसरे से बातें कर रहे हैं, वो देखकर हैरानी होती है। पता नहीं आप सब को इसका आभास है या नहीं लेकिन सच तो यही है कि हिंदी ब्लागर्स को आज भी लोग डाउन मार्केट टाइप समझते हैं। अब लगता है कि अगर लोग हमें अच्छी निगाह से नहीं देखते तो इसके लिए हम ही जिम्मेदार हैं। पिछले दिनों एक रचना ब्लाग पर आई, लोग आज तक नहीं समझ पाए कि आखिर ये रचना क्यों लिखी गई और इसके जरिए ब्लागर्स को क्या संदेश देने की कोशिश की गई है। अच्छा उस रचना पर कमेंट रचना के गुण दोष के आधार पर नहीं दिए गए, बल्कि जिसने लिखा है, उनके मित्र उस रचना के साथ खड़े हो गए, जो  उन्हें नहीं पसंद करते हैं, वो रचना के खिलाफ हो गए। हम जैसे लोग की भूमिका शून्य हो गई, क्योंकि हम रचना के साथ तो बिल्कुल नहीं खड़े थे, लेकिन रचनाकारा का मैं सम्मान करता हूं। लिहाजा मेरे लिए मुश्किल था कुछ भी कहना। मै मानता हूं कि मुझे अपनी राय सबके साथ शामिल करनी चाहिए थी,  पर मैं इतना ईमानदार नहीं हूं।

अच्छा इस रचना ने एक नया मोड़ तब ले लिया जब रचना के एक प्रबल विरोधी के खिलाफ कुछ खास लोगों ने मोर्चा खोल दिया। एक साझा ब्लाग का जिक्र मैं नहीं करना चाहता, पर इस ब्लाग का चरित्र आज तक मेरी समझ में नहीं आया। ब्लाग का इस्तेमाल अपनी थोथी राय सबको मानने के लिए मजबूर करने जैसे लगती है। हद तो तब हो गई, जब एक लेख और उसमें प्रकाशित चित्र से नाराज होने पर मां बहन की गाली पर उतर आए। दस दिन से जो कुछ देख रहा हूं, सच कहूं तो मन इतना दुखी है कि लोगों को ये बताना भी अच्छा नहीं लग रहा कि आज मेरे ब्लाग को पूरे साल भर हो गए। वैसे सच तो यही है कि हिंदी ब्लागिंग में जो कुछ चल रहा है, उसमें कुछ भी ऐसा नहीं है जिस पर हम सब गर्व कर सकें।

वैसे हां अगर मैं व्यक्तिगत रूप से अपने साल भर के इस सफर का मूल्यांकन करता हूं तो खुद को लकी मानता हूं। खासतौर पर कुछ ऐसे लोग यहां पर मेरे दोस्त के रुप में रहे जो किसी ना किसी खास विचारधारा से जुड़े हुए थे। ऐसे लोगों से आपकी जितनी जल्दी दूरी हो जाए वो ठीक है, क्योंकि ऐसे लोग ब्लागिंग नहीं करते, बल्कि स्वदेशी के नाम पर यहां तेल साबुन बेचने वालों की तरफदारी करते हैं।

मित्रों मेरा मानना है कि ब्लाग पर गृहणियों का एक बड़ा तपका सक्रिय है। ये या तो अपनी कविताओं की जरिए अपनी सोच दुनिया के सामने रखती हैं या फिर टीवी और न्यूज चैनल के जरिए मिलने वाली खबरों से देश की राजनीतिक हालातों के बारे में अपनी राय बनाती हैं। पुरुष तपका खुद को इतना विद्वान समझता है कि उसे किसी पर यकीन नहीं है। वो अपनी जानकारी को अंतिम समझता है, उसका मानना है कि जो उसकी जानकारी है, उसके बाद दुनिया का अंत हो जाता है, वही अंतिम सत्य है। खैर ऐसे लोगो का कोई इलाजा नहीं है और इलाज करने की कोशिश भी  बेकार है। ऐसे लोग धक्के खाने के बाद ही सभलते हैं। हां अक्सर बहुत सारे मित्र मुझसे जानना चाहते हैं कि आप आखिर हैं किसके साथ। मेरा सीधा सा जवाब है कि मैं अपने मन के साथ हूं, जो मुझे सही लगता है, उसे सही मानता हूं, जो मुझे ठीक नहीं लगता, उसे गलत ठहराने से पीछे नहीं हटता। यही वजह है कि मेरे ब्लाग पर आपको अन्ना, रामदेव, राहुल गांधी, सुषमा स्वराज, मुलायम सिंह यादव, अखिलेश यादव,  मायावती यहां तक की कोई भी गलत काम करता है तो वो मेरे निशाने पर होता है।

अच्छा जब ब्लाग  परिवार में इतने मतभेद हों तो आप ही बताइये क्या अच्छा लगेगा कि मैं अपने ब्लाग का जन्मदिन मनाऊं। बिल्कुल नहीं, यही वजह है कि आज पूरे दिन मैं खामोश रहा, घर की और ब्लाग की बत्ती बंद किए अंधेरे में सोचता रहा कि आखिर सुबह कब होगी ? वैसे मेरा मन कहता है कि ब्लाग परिवार की सुबह तो होगी, पर कब ये मैं नहीं कह सकता। इस परिवार में सबसे बड़ी खामी यही है कि अगर कोई गल्ती करता है तो वो मानने को तैयार नहीं है कि उससे गल्ती हो गई। आइंदा ध्यान रखेगा, वो उस गलती को सही साबित करने के लिए इतना नीचे गिर जाता है, जहां से वो  दोबारा उठने की कोशिश भी करे तो लोग उसे उठने नहीं देंगे।

बहरहाल मैं जानता हूं कि साल भर के ब्लागर्स की यहां कोई हैसियत नहीं है। फिर भी अच्छा बुरा तो वो समझता ही है ना। प्लीज रचना ऐसी ब्लाग पर होनी चाहिए कि हर आदमी को सुकून दे। ओह ! कितनी बातें करूं, हम तो भाषा की मर्यादा भी भूल गए हैं। हम सबसे घटिया भाषा के बारे में कहते हैं कि गंवारो की भाषा यानि गांव का सबसे घटिया आदमी, उसकी भाषा। लेकिन आज ब्लाग पर जो भाषा दिखाई दे रही है, वो गवारों से भी सौ गुनी घटिया है। हम जानवरों से बदतर होते जा रहे हैं। भला बताइये इस माहौल मे क्या जन्मदिन की पार्टी की जा सकती है। बिल्कुल नहीं। मैं तो पार्टी नहीं कर सकता। अगर सबकुछ ठीक रहा तो अगले साल देखूंगा। बहरहाल कुछ अपने ही लोगों ने मेरे जन्मदिन की पहली ही सालगिरह की बाट लगा दी।

इनसे भी मिल लीजिए... 


इनका नाम है ममता गुप्ता। फेसबुक पर हैं, पर मेरे फ्रैंडलिस्ट में नहीं है। इनके परिचय में लिखा है कि ये लखनऊ विश्व विद्यालय में हैं। वहां की कर्मचारी हैं या छात्रा कहना मुश्किल है। वैसे पहनावे से तो लगता है कि पढती होंगी। लेकिन इससे आप सबको सावधान रहना चाहिए। मुझे तो पता भी  नहीं चलता अगर मेरे किसी अभिन्न मित्र में ने मुझे बताया ना होता। ये लोगों के ब्लाग से लेख चुराती है और अपने वाल पर डाल देती है। जिस किसी के ब्लाग से लेती है, उसका जिक्र तक नहीं करती। मुझे जब बताया गया कि इसने ब्लाग से लेख की चोरी की है तो मैने इन्हें एक मैसेज भेजा कि आपको ऐसा नहीं करना चाहिए, लेकिन इस पर कोई असर नहीं हुआ। बाद में पता चला कि ये इसकी फितरत है।
चूंकि मैं लखनऊ से बहुत अच्छी तरह वाकिफ हूं और ये उसी शहर से हैं। मैने सोचा कि पता करुं इसके बारे में। इसके वाल पर ही कई दोस्तों को मैने मैसेज भेजा कि आपकी सहेली दूसरों के लेख चुराकर अपने वाल पर डालती है, फिर इसके दोस्तों का जवाब आया, सर, हम सब जानते हैं इसे, हम लोग तो बस फ्रैंडलिस्ट में है, इसके रिक्वेस्ट पर कमेंट करते रहते हैं। हम सबको पता है कि लिखना पढना तो इसके बस की बात ही नहीं। आप सोच रहे होंगे कि आखिर मैं इसकी तस्वीर के साथ इसके लिए ऐसा क्यों लिख रहा हूं, तो आप इस लिंक पर जाएं जहां इसने मेरे लेख को अपने नाम पर छाप रखा है। मेरा लेख.. http://aadhasachonline.blogspot.in/2012/04/blog-post.html#comment-form  आप इस ब्लाग पर देख सकते हैं। जिसे मैने दो अप्रैल को पोस्ट किया है। इसने इसे ही अपने फेसबुक पर डाल दिया है। इस लिंक पर..
https://www.facebook.com/photo.php?fbid=113132385485306&set=at.106173829514495.7964.100003656353018.100002843162047.100003602945962&type=1&ref=nf हां चोरी भी करती है और मानती भी नहीं कि इससे कोई गल्ती हुई है। चूंकि मेरे ब्लाग का सालगिरह है इसलिए मैं अपनी ओर से इसे यहीं क्षमा कर देता हूं।

बाबा रामदेव ना बाबा ना ना....

ये तस्वीर बाबा रामदेव की है या नहीं, मैं विश्वास के साथ नहीं कह सकता। फेसबुक से मैने ये तस्वीर ली है। यहां तमाम लोग कुछ तिकडम के जरिए तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ करते हैं। अगर इसमें छेड़छाड़ की गई है तब तो मुझे कुछ नहीं कहना है, लेकिन तस्वीर सही है तो ये बाबा का असली रूप देखकर मैं क्या दुनिया हैरान हो जाएगी।
इस चित्र को देखने से साफ है कि बाबा अपने किसी मित्र के साथ चार्टड प्लेन में हैं। बाबा के हाथ में एक गिलास है, जिसमें देखने से तो लग रहा है कि ये व्हिस्की है, वैसे तो आजकल कई तरह के जूस भी मार्केट में है। इसलिए मैं दावे के साथ नहीं कह सकता कि बाबा के हाथ में क्या है। लेकिन ये तस्वीर जिसने भी फेसबुक डाली है, उसका मकसद तो यही साबित करने का है कि हम बाबा को जो समझते हैं, वो हमारी भूल है। दरअसल बाबा ऐसे हैं नहीं। सच क्या है, क्या बाबा ड्रिंक्स करते हैं या इस तस्वीर की हकीकत क्या है, ये सब हम बाबा पर ही छोड़ देते हैं।