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Friday, 8 June 2012

बाबाओं के बाप की भी मां निकली राधे मां ...


गता है आप नहीं समझे। चलिए मैं पूरी कहानी बताता हूं। अभी तक लोग निर्मल बाबा की करतूतों को सुनते देखते चले आ रहे थे। अब मार्केट मे धमाकेदार एंट्री की है मुंबई से राधे मां ने। चलिए पहले जान लीजिए कि राधे मां है कौन। बताते हैं कि राधे मां का जन्म पंजाब के होशियारपुर जिले के एक सिख परिवार में हुआ है।  इनकी शादी भी पंजाब के ही रहने वाले व्यापारी सरदार मोहन सिंह से हुई है। शादी के बाद इनका वैवाहिक जीवन ठीक ठाक चल रहा था, परंतु एक दिन इनकी मुलाकात शिव मंदिर के पास महंत श्री रामदीन दास से हुई। उन्होंने इनकी धार्मिक प्रतिभा तो पहचाना। महंत रामदीन के प्रभाव में आने के बाद ये राधे मां बन गईं और कथिक रूप से वह लोगों के व्यक्तिगत, व्यापारिक और पारिवारिक समस्याओं को दूर करने लगी। पहले तो इन्हें ज्यादा लोग नहीं जानते थे, लेकिन अब इनकी दुकान लगभग सभी बाबाओं से बड़ी हो गई है।

आज राधे मां का जलवा देश-विदेश में भी फैला हुआ है। मुंबई में उनके लिए बड़े-बड़े आयोजन किए जाते हैं। इन्हें उनके अनुयायी दुर्गा का अवतार बता रहे हैं। ये न तो कुछ बोलती हैं और न कोई प्रवचन देती हैं, लेकिन इनकी नजरों का कायल हर कोई है। पंजाबी के होशियापुर की रहने वाली इस महिला के आयोजनों में लाखों लोग शरीक होते हैं। शहर भर में बड़े-बड़े बैनर पोस्टर लगाकर इनका प्रचार किया जाता है। अच्छा राधे मां के आयोजन में श्रद्धालुओं को आनंद बहुत आता है। राधे मां दुल्हन की तरह सज संवर कर आती हैं और पूरे समय तक झूमती रहती हैं। उनके मंच के चारो ओर बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी झूमते रहते हैं। इस दौरान राधे मां लोगों को अपनी नजरों से अपने वश में करतीं नजर आतीं है।
किसी भक्त पर मां जब बहुत खुश हो जाती हैं तो वो झूमते झूमते उसकी गोद में कूद जाती हैं। माना जाता है कि जिस भक्त की गोद में मां ने छलांग लगाई है वो बहुत भाग्यशाली है और उसकी सभी मन्नतें तत्काल पूरी हो जाएंगी। राधे मां जब गोद में आ जाती हैं तो भक्त दोगुनी खुशी से मां को लेकर नाचता है। मुंबई में आजकल राधे मां के एक के बाद एक आयोजन हो रहे हैं और खास बात ये है कि इसमें तमाम पढे लिखे लोगों के साथ ही सिनेमा जगत के लोग भी मां के दर्शन को आ रहे हैं।

राधे मां ने जब इस धंधे की शुरुआत की थी तो उन्हें पता नहीं था कि कभी उनकी ये दुकान इतनी बड़ी हो जाएगी। कुछ साल पहले राधे मां ने दिल्ली में कई दिन गुजारा। उस दौरान ये दिल्ली के लाजपतनगर मे जिसके घर रुकी हुई थीं, उनके घर का जीना मुहाल हो गया था। लाल टीशर्ट और लाल  ही टाइट सेलेक्स पर जिस तरह फिल्मी धुनों पर  घर में रात बिरात फूहड़ डांस करती फिर रहीं थी, घर के लोग परेशान  हो गए थे। जब लोग मना करते कि ये क्या हो रहा है तो इनके अनुयायी कहा करते थे की राधे मां खेल रही हैं। वैसे वीड़ियों में राधे मां अपने पिछले हिस्से को जिस फूहड़ तरीके से हिलाती दिखाई दे रही हैं, उस तरह का डांस हम गांव में लगने वाले मेलों में देखते रहे हैं। फूहड़ डांस का ही नतीजा है कि एक आयोजन के दौरान दो लड़के राधे मां को किनारे खड़े घूरते रहे। बाद मे जब ये बात इस राधे को समझ में आई तो इन्होंने माइक थामा और जोर जोर से चिल्लाने लगीं, मुझे देखने मत आओ, बस मेरा दर्शन करो। हाहाहाहहा.. इस बहुरुपिया मां को कौन समझाए कि जब आप देखने की चीज बन गई हो तो दर्शन करने कौन आ रहा है।

और हां अब बात प्रसाद की। इस मां का प्रसाद देने का जो तरीका है, उससे उल्टी आने लगती है। एक भक्त  खीर लेकर आता है, ये कथित मां उसमें से एक  चम्मच खीर मुंह में रखती है, पांच सेकेंड बाद वो खीर एक भक्त के हाथ पर उगल देती है और लोग एक एक चावल का दाना प्रसाद के रुप मे ग्रहण करते हैं। इसी तरह इसे कोई भी प्रसाद चढता है तो ये उसे जूठा करती है और गंदे तरीके से भक्तों  के हवाले कर देती है। बाद में उसे ही लोग प्रसाद के रुप में ग्रहण करते हैं। मैने तो जो कुछ देखा और इसके बारे में सुना है, उससे तो यही लगता है कि   ये धर्म की नहीं गंदगी की राधे मां है।

इतना ही नहीं इस  मां को धर्म की एबीसीडी  नहीं आती है, इसीलिए वो पूरे समय खामोश रहती है। एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने इंगलिश में दो लाइनें बोल दीं, जिसको लेकर विवाद मचा हुआ है। अब हर मुंबई वासी कह रहा है कि ये तो बाबाओं के बाप की मां निकली राधे मां.।

 निर्मल बाबा छोडेगे बाबागिरी ? 
कल रात का सपना बड़ा भयावह था, देख रहा था कि मैं निर्मल बाबा के सिंहासन पर चूड़ीदार पैजामा और डिजाइनर कुर्ता पहने बैठा हूं और मेरे सामने खुद निर्मल बाबा घिघियाते हुए कह रहे हैं, बाबा मुझे बचाओ। उनकी आंखो से आंसू निकल रहे थे और मैं कह रहा था कि पहले ये बताओ आप कहां से आए हो ? हाथ जोड़े खड़े निर्मल ने कहा बाबा ने कहा पता मत पूछिए, मेरे पीछे पुलिस लगी है। अरे पुलिस को छोड़ो, अब ये बताओ तुम्हारे सामने मुझे आलू के पराठे क्यों दिखाई दे रहे हैं ? निर्मल बाबा बोले बाबा मैने कल रात पराठा खाया था और चार पांच पराठे गरीबों में बांटे भी थे। मैने कहा आपने पराठा किस चीज के साथ खाया, निर्मल बोले बाबा दही के साथ, और गरीबों को क्या दिया ? वो बोले केवल पराठा, बस यहीं कृपा रुकी हुई है। जाओ गरीबों को भी दही के साथ पराठा खिलाओ..। कृपा आनी शुरू हो जाएगी। निर्मल वापस अपनी कुर्सी पर जाने लगे तो मैने उन्हें फिर बुलाया और कहा ये हमारी मुठ्ठी बंद क्यों हो रही है भाई, एक बात बताओ, आपने दुनिया भर के लोगों से दसवंत निकलवाया, क्या आपने खुद दसवंत निकाला। अब निर्मल बाबा समझ गए थे कि गल्ती कहां हुई है और क्यों रुक गई कृपा। बेचारे चुपचाप जाकर पीछे की सीट बैठ गए। मेरे समागम में अगला श्रद्धालु आया तो मेरे सम्मान में कसीदें पढ़ने लगा। बोला

और मेरा कौन है, जो कुछ हैं सो आप हैं।
आप मेरे बाप के भी बाप के भी बाप हैं।।

मैने अपना बायां हाथ थोडा सा ऊपर करके उसे आशीर्वाद तो दे दिया, लेकिन मन ही मन सोचने लगा कि क्या ये मुझे पहचान तो नहीं गया है। क्योंकि शक्ल से तो ये श्रद्धालु बिल्कुल लुच्चा लग रहा है और मुझे अपने बाप का बाप बता रहा है। खैर नींद खुली तो सपने की बात को बड़ी देर तक सोचता रहा। निर्मल बाबा पर दया भी आ रही थी कि उन्हें क्या दिन देखने पड़ रहे हैं। बहरहाल अब मुझे लगता है कि निर्मल बाबा का खेल खत्म होने को है। अपने अजीबो-गरीब और बेतुके सुझावों से भक्तों पर कृपा बरसाने का दावा करने वाले निर्मल जीत नरूला उर्फ निर्मल बाबा के खिलाफ अब जनता ने पुलिस में रिपोर्ट लिखानी शुरू कर दी है और बाबा पर चार सौ बीसी के तहत गिरफ्तारी का खतरा भी मंडरा रहा है। बाबा अपनी बाबागीरी छोड़ने के मूड में आ गए लगता हैं। अपने चर्चित समागमों के द्वारा करोड़ों रुपये डकार चुके निर्मल बाबा ने पहली बार जून महीने के सभी समागम को अचानक रद्द कर दिया। बताते हैं कि बाबा को डर है कि कहीं श्रद्धालु बनकर पुलिस ही समागम में ना आ जाए और उनकी कृपा की दुकान बंद कर गिरफ्तार कर ले जाए।


Monday, 2 April 2012

निर्मल बाबा का दरबार बोले तो लाफ्टर शो ...


भाई साधु संतो से तो मैं भी डरता हूं, इसलिए मैं पहले ही बोल देता हूं निर्मल बाबा के चरणों में मेरा और मेरे परिवार का कोटि कोटि प्रणाम। वैसे मैं जानता हूं कि साधु संत अगर आपको आशीर्वाद दें तो उसका एक बार फायदा आपको हो सकता है, पर वो चाहें कि आपको अभिशाप देकर नष्ट कर दें तो ईश्वर ने अभी उन्हें ऐसी ताकत नहीं दी है। इसलिए ऐसे लोगों से ज्यादा डरने की जरूरत नहीं है, लेकिन मेरा उद्देश्य सिर्फ लोगों को आगाह भर करना है, मैं किसी की भावना को आहत नहीं करना चाहता। चलिए आपको एक वाकया सुनाता हूं शायद आपकी समझ में खुद ही आ जाए।

पिछले दिनों मुझे लगभग 11 घंटे ट्रेन का सफर करना था, इसके लिए मैं रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म के बुक स्टाल पर खड़ा देख रहा था कि कोई हल्की फुल्की किताब ले लूं, जिससे रास्ता थोड़ा आसान हो जाए। बहुत नजर दौड़ाई तो मेरी निगाह एक किताब पर जा कर टिक गई। किताब का नाम था धन कमाने के 300 तरीके। मैने सोचा इसी किताब को ले लेते हैं इससे कुछ ज्ञान की बातें पता चलेंगी, साथ ही बिजिनेस के तौर तरीके सीखने को मिलेगें और सबसे बड़ी बात कि ट्रेन का सफर आसानी से कट जाएगा। लेकिन दोस्तों सफर आसानी से भले ना कटा हो पर जेब जरूर कट गई । 280 रुपये की इस किताब में माचिस, टूथपेस्ट, पालीथीन पैक, जूते की पालिस, मोमबत्ती, आलू चिप्स, पापड, मसाले के पैकेट तैयार करने जैसी बातें शामिल थीं। पूरी किताब पढ़ने के बाद मैं इस नतीजे पर पहुंचा धन कमाने का सबसे कारगर तरीका तो इसमें शामिल है ही नहीं, यानि मेरी नजर में धन कमाने के 300 तरीके वाली किताब छाप कर जितनी कमाई की गई है, किताब में शामिल तरीकों को अपना कर उसका आधा भी नहीं कमाया जा सकता।

बस जी भूमिका समझा दिया ना आपको, क्योंकि आजकल कुछ ऐसा ही कहानी चल रही है निर्मल बाबा के समागम यानि टीवी के लाफ्टर शो में। निर्मल बाबा की खास बात ये है कि उनके भक्तों की किसी भी तरह की समस्या हो, ये बाबा हर समस्या का समाधान वो पलक झपकते बता देते हैं। अब देखिए ना हम बीमार होते हैं तो डाक्टर के पास जाते हैं, पढाई लिखाई में कामयाब होने के लिए कोचिंग करते हैं, नौकरी पाने के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की गंभीरता से तैयारी करते हैं, किसी ने मकान या जमीन पर कब्जा कर लिया तो पुलिस की मदद लेते हैं, दुर्घटना हो जाने पर जल्दी से जल्दी अस्पताल जाने की कोशिश करते हैं, बेटी की शादी तय नहीं होने पर दोस्तों और रिश्तेदारों की मदद लेते हैं, नौकरी में प्रमोशन हो इसके लिए अपने काम को और मन लगाकर करते हैं, व्यापारियों का कहीं पेमेंट फंस जाए तो तगादा और ज्यादा करते हैं, बाल झड़ने लगे तो कुछ दवाएं लेते हैं, सुंदरता बनाए रखने के लिए ब्यूटिशियन की मदद लेते हैं, बुढापे में चलने फिरने  में तकलीफ ना हो तो व्यायाम और सुबह टहलने जाते हैंलेकिन अब आपको ये सब करने की जरूरत नहीं है, बल्कि आप बिना देर किए चले आएं निर्मल बाबा के दरबार में। 

बाबा के पास तीसरी आंख है, वो सामने आने वाले भक्त को 100 मीटर दूर से जान जाते हैं कि इसे क्या तकलीफ है और उसका इलाज क्या है। बाबा का मानना कि जीवन में अगर कुछ गड़बड़ होता है तो ईश्वर की कृपा आनी बंद हो जाती है और बाबा तीसरी आंख के जरिए बता देते हैं कि कृपा के रास्ते में कहां रुकावट है और इस रुकावट का इलाज क्या है।  हालांकि बाबा कब क्या बोल दें, कोई भरोसा नहीं है। एक ओर तो वो खुद ही लोगों को बताते हैं कि पाखंड से दूर रहें। साधु संतों के ड्रामें में नहीं फंसना चाहिए, खुद पूजा करो, क्योंकि ईश्वर भावना देखते हैं, सच्चे मन से भगवान को याद करें तो कृपा खुद आ जाएगी। ये बात मैं नहीं कह रहा हूं, खुद निर्मल बाबा कहते हैं, फिर मेरी समझ में नहीं आता कि ये बाबा पाखंडी किसे बता रहे हैं। पाखंड की सारी बाते तो उनके समागम में होती हैं और ये ज्ञान की बाते किसे समझा रहे हैं।

अब देखिए दो दिन पहले निर्मल बाबा एक नवजवान भक्त से पूछ रहे थे - तुम अपनी कमीज़ की बटन कैसे खोलते हो जल्दी जल्दी या देर से। सकपकाया भक्त बोला कभी जल्दी तो कभी देर से भी। बाबा बोले आराम आराम से खोला करो। कृपा आनी शुरू हो जाएगी। अब भला ये भी कोई प्रश्न है? एक भक्त से उन्होंने पूछा बाल कहां कटवाते हो, भक्त बोला नाई से कटवा लेता हूं। बाबा बोले कभी पारर्लर जाने का मन नहीं होता, भक्त संकोच करते हुए बोला होता तो है, तो जाओ पारर्लर में एक बार बाल कटवा लो, कृपा आनी शुरू हो जाएगी। एक गरीब महिला कुछ गंभीर समस्याओं से घिरी हुई थी, उनके सामने आई, वो बाबा से कुछ कहती, उसके पहले बाबा ही बोल पड़े, अरे भाई तुम्हारे सामने से मुझे कढी चावल क्यों दिखाई दे रहा है। वो बोली मैने कल कढी चावल ही खाया था, बाबा क्या बोलते, कहा अकेले ही खाया तुमने। वो बोली नहीं पूरे परिवार ने खाया। हां यही तो गल्ती है तुमने किसी बाहर के लोगों को नहीं खिलाया, जाओ चार दूसरे लोगों को कढी चावल खिला देना, कृपा आनी शुरू हो जाएगी।

कुछ और वाकये का जिक्र करना जरूरी समझ रहा हूं। बाबा कहते हैं कि पूजा में भावना होनी चाहिए, लेकिन जब बिहार की एक महिला को देखते ही उन्होंने कहाकि तुम छठ पूजा करती हो। वो बोली हां बाबा करती हूं, बाबा ने कहा कितने रुपये का सूप इस्तेमाल करती हो, वो बोली दस  बारह रुपये का। बाबा ने कहा बताओ दस बारह रुपये के सूप से भला कृपा कैसे आएगी, तुम 30 रुपये का सूप इस्तेमाल करो। कृपा आनी शुरू हो जाएगी। बात यहीं खत्म नही हुई। एक महिला भक्त को उन्होंने पहले समागम में बताया था कि शिव मंदर में दर्शन करना और कुछ चढावा जरूर चढाना। अब दोबारा समागम में आई उस महिला ने कहा कि मैं मंदिर कई और चढावा भी चढाया, लेकिन मेरी दिक्कत दूर नहीं हुई। बाबा बोले कितना पैसा चढ़ाया, उसने कहा कि 10 रुपये, बाबा ने फिर हंसते हुए कहा कि दस रुपये में कृपा कहां मिलती है, अब की 40 रुपये चढाना देखना कृपा आनी शुरू हो जाएगी।

अब देखिए इस महिला को बाबा ने ज्यादा पैसे चढाने का ज्ञान दिया, जबकि एक दूसरी महिला दिल्ली से उनके पास पहुंची, बाबा उसे देखते ही पहचान गए और पूछा शिव मंदिर में चढ़ावा चढ़ाया या नहीं। बोली हां बाबा चढा दिया। बाबा ने पूछा कितना चढ़ाया, वो बोली आपने 50 रुपये कहा था वो मैने चढ़ा दिया, और मंदिर परिसर में ही जो छोटे छोटे मंदिर थे, वहां दस पांच रुपये मैने चढ़ा दिया। बस बाबा को मौका मिल गया, बोले फिर कैसे कृपा आनी शुरू होगी, 50 कहा तो 50 ही चढ़ाना था ना, दूसरे मंदिर में क्यों चली गई। बस फिर जाओ.. और 50 ही चढ़ाना। क्या मुश्किल है, ज्यादा चढ़ा दो तो भी कृपा  रुक जाती है, कम चढ़ाओ तो कृपा शुरू ही नहीं होती है। निर्मल बाबा ऐसा आप ही कर सकते हो, आपके चरणों में पूरे परिवार का कोटि कोटि प्रणाम।
एक भक्त को बाबा ने भैरो बाबा का दर्शन करने को कहा। वो भक्त माता वैष्णों देवी पहुंचा और वहां देवी के दर्शन के बाद और ऊपर चढ़ाई करके बाबा भैरोनाथ का दर्शन कर आया। बाद में फिर बाबा के पास पहुंचा और बताया कि मैने भैरो बाबा के दर्शन कर लिए, लेकिन कृपा तो फिर भी शुरू नहीं हुई। बाबा ने पूछा कहां दर्शन किए, वो बोला माता वैष्णों देवी वाले भैरो बाबा का। बाबा ने कहा कि यही गड़बड़ है, तुम्हें तो दिल्ली वाले भैरो बाबा का दर्शन करना था। अब बताओ जिस बाबा ने कृपा रोक रखी है, उनके दर्शन ना करके, इधर उधर भटकते रहोगे तो कृपा कैसे चालू होगी। भक्त बेचारा खामोश हो गया।

यहां मुझे एक कहानी याद आ रही है। एक आदमी बीबी से हर बात पर झगड़ा करता था। उसकी बीबी ने नाश्ते में एक दिन उबला अंडा दे दिया, तो पति ने बीबी को खूब गाली दी और कहा कि आमलेट खाने का मन था, और तुमने अंडे को उबाल दिया। अगले दिन बेचारी पत्नी ने अंडे का आमलेट बना दिया, तो फिर गाली सुनी। पति ने कहा आज तो उबला अंडा खाने का मन था। तुमने आमलेट बना दिया। तीसरे दिन बीबी ने सोचा एक अंडे को उबाल देती हूं और एक का आमलेट बना देती हू, इससे वो खुश हो जाएंगे। लेकिन नाश्ते के टेबिल पर बैठी पत्नी को उस दिन भी गाली सुननी पड़ी। पति बोला तुमसे कोई काम नहीं हो सकता, क्योंकि जिस अंडे को उबालना था, उसका तुमने आमलेट बना दिया और जिसका आमलेट बनाना था, उसे उबाल दिया। कहने का मतलब मैं नहीं समझाऊंगा। आप मुझे इतना बेवकूफ समझ रहे हैं क्याकि निर्मल बाबा से सारे पंगे मैं ही लूंगा, कुछ चीजें आप अपने से भी तो समझ लो।

बहरहाल दोस्तों तीसरी आंखे क्या क्या चीजें देखतीं है, मैं तो ज्यादा नहीं जानता। पर परेशान हाल आदमी से ये पूछा जाए कि आपने मटके का पानी कब पिया, भक्त कहे कि मटका तो बाबा मैने कब देखा याद ही नहीं, फिर बाबा बोले कि याद करो, भक्त कहता है कि हां कुछ याद आ रहा है कहीं प्याऊ पर रखा देखा था। बाबा कहते है कि हां यही बात मैं याद दिलाना चाहता था, आप प्याऊ पर एक मटका दान दे आओ और उस मटके पानी खुद भी पियो और दूसरों को भी पिलाओ। एक दूसरे भक्त को बाबा कहते हैं कि आप के सामने मुझे सांप क्यो दिखाई दे रहा है। भक्त घबरा गया, बोला बाबा सांप से तो मैं बहुत डरता हूं। बाबा बोले तुमने सांप कब देखा, भक्त ने कहा मुझे याद नहीं कब देखा। बाबा बोले याद करो, बहुत जोर डालने पर उसने कहा एक सपेरे के पास कुछ दिन पहले देखा था। बस बाबा को मिल गया हथियार, बोले कुछ पैसे दिए थे सपेरे को, भक्त ने कहा नहीं पैसे तो नहीं दिए। बस वहीं से कृपा रुक रही है। अगली बार सपेरे को देखो तो पैसे चढ़ा देना, कृपा आनी शुरू हो जाएगी। वैसे तो बाबा के किस्से खत्म होने वाले ही नहीं हैपर एक आखिरी किस्सा बताता हूं। एक भक्त को उन्होंने कहाकि आपके मन में बड़ी बड़ी इच्छाएं क्यों पैदा होती हैं ? बेचारा भक्त खामोश रहा। बाबा बोले आप कैसे चलते हो, साईकिल, बाइक या कार से। वो बोला बाइक से। इच्छा होती है ना बडी गाड़ी पर चलने की, उसने कहा हां, बस बाबा ने तपाक से कह दिया कि यही गलत इच्छा से कृपा रुकी है। आप बड़ी गाड़ी रास्ते पर देखना ही बंद कर दें। अब बताओ भाई कोई आदमी रास्ते पर है, अब बड़ी गाड़ी आ जाए तो बेचारा क्या करेगा। आंख तो बंद नहीं करेगा ना। इसीलिए कहता हूं कि मुझे तो लगता है कि बाबा के सामने मूर्खो की जमात लगती है । आप अगर उनके प्रश्न और सलाह सुन लें तो हँस-हँस कर लोटपोट हो जाएँ। जय हो इस निर्मूल बाबा की !

चलिए बात खत्म करें, इसके पहले मैं आपको बता दूं कि कुछ लोगों ने अपने निर्मल बाबा की कृपा को ही रोक लिया और उन्हें सवा करोड़ रुपये का चूना लगा दिया। बात लुधियाना की है। बाबा को बैंक ने जो चेक बुक दी है, उसकी हूबहू कापी तैयार करके एक व्यक्ति ने सवा करोड़ रुपये बाबा के एकाउंट से निकाल लिया । हालाकि इस मामले में रिपोर्ट दर्ज हो गई है, पुलिस को फर्जीवाड़ा करने वालों की तलाश है। पर मेरा सवाल है कि जब बाबा के खुद के एंकाउंट में सेंधमारी हो गई और बाबा बेचारे कुछ नहीं कर पा रहे तो वो दूसरों के एकाउंट की रक्षा कैसे कर पाएंगे। वैसे भी निर्मल बाबा के जीवन या उनकी पृष्ठभूमि के बारे में बहुत कम लोगों को पता है। उनकी आधिकारिक वेबसाइट nirmalbaba.com  पर कोई जानकारी नहीं दी गई है। इस वेबसाइट पर उनके कार्यक्रमों, उनके समागम में हिस्सा लेने के तरीकों के बारे में बताया गया है और उनसे जुड़ी प्रचार प्रसार की सामग्री उपलब्ध है। झारखंड के एक अखबार के संपादक ने फेसबुक पर निर्मल बाबा की तस्वीर के साथ यह टिप्पणी की है, ‘ये निर्मल बाबा हैं। पहली बार टीवी पर उन्हें देखा। भक्तों की बात भी सुनी। पता चला..यह विज्ञापन है. आखिर बाबाओं को विज्ञापन देने की जरूरत क्यों पड़ती है? सुनने में आया हैये बाबा पहले डाल्टनगंज (झारखंड) में ठेकेदारी करते थे?’। मित्रों आप बाबा पर भरोसा करें, मुझे कोई दिक्कत नहीं, पर जरा संभल कर और हां बाबा जी आपकी कृपा बनी रहनी चाहिएदेखिए ज्यादा लंबी लंबी मत छोड़िएगा, क्योंकि ये पब्लिक है, सब जानती है।