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Friday, 8 June 2012

बाबाओं के बाप की भी मां निकली राधे मां ...


गता है आप नहीं समझे। चलिए मैं पूरी कहानी बताता हूं। अभी तक लोग निर्मल बाबा की करतूतों को सुनते देखते चले आ रहे थे। अब मार्केट मे धमाकेदार एंट्री की है मुंबई से राधे मां ने। चलिए पहले जान लीजिए कि राधे मां है कौन। बताते हैं कि राधे मां का जन्म पंजाब के होशियारपुर जिले के एक सिख परिवार में हुआ है।  इनकी शादी भी पंजाब के ही रहने वाले व्यापारी सरदार मोहन सिंह से हुई है। शादी के बाद इनका वैवाहिक जीवन ठीक ठाक चल रहा था, परंतु एक दिन इनकी मुलाकात शिव मंदिर के पास महंत श्री रामदीन दास से हुई। उन्होंने इनकी धार्मिक प्रतिभा तो पहचाना। महंत रामदीन के प्रभाव में आने के बाद ये राधे मां बन गईं और कथिक रूप से वह लोगों के व्यक्तिगत, व्यापारिक और पारिवारिक समस्याओं को दूर करने लगी। पहले तो इन्हें ज्यादा लोग नहीं जानते थे, लेकिन अब इनकी दुकान लगभग सभी बाबाओं से बड़ी हो गई है।

आज राधे मां का जलवा देश-विदेश में भी फैला हुआ है। मुंबई में उनके लिए बड़े-बड़े आयोजन किए जाते हैं। इन्हें उनके अनुयायी दुर्गा का अवतार बता रहे हैं। ये न तो कुछ बोलती हैं और न कोई प्रवचन देती हैं, लेकिन इनकी नजरों का कायल हर कोई है। पंजाबी के होशियापुर की रहने वाली इस महिला के आयोजनों में लाखों लोग शरीक होते हैं। शहर भर में बड़े-बड़े बैनर पोस्टर लगाकर इनका प्रचार किया जाता है। अच्छा राधे मां के आयोजन में श्रद्धालुओं को आनंद बहुत आता है। राधे मां दुल्हन की तरह सज संवर कर आती हैं और पूरे समय तक झूमती रहती हैं। उनके मंच के चारो ओर बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी झूमते रहते हैं। इस दौरान राधे मां लोगों को अपनी नजरों से अपने वश में करतीं नजर आतीं है।
किसी भक्त पर मां जब बहुत खुश हो जाती हैं तो वो झूमते झूमते उसकी गोद में कूद जाती हैं। माना जाता है कि जिस भक्त की गोद में मां ने छलांग लगाई है वो बहुत भाग्यशाली है और उसकी सभी मन्नतें तत्काल पूरी हो जाएंगी। राधे मां जब गोद में आ जाती हैं तो भक्त दोगुनी खुशी से मां को लेकर नाचता है। मुंबई में आजकल राधे मां के एक के बाद एक आयोजन हो रहे हैं और खास बात ये है कि इसमें तमाम पढे लिखे लोगों के साथ ही सिनेमा जगत के लोग भी मां के दर्शन को आ रहे हैं।

राधे मां ने जब इस धंधे की शुरुआत की थी तो उन्हें पता नहीं था कि कभी उनकी ये दुकान इतनी बड़ी हो जाएगी। कुछ साल पहले राधे मां ने दिल्ली में कई दिन गुजारा। उस दौरान ये दिल्ली के लाजपतनगर मे जिसके घर रुकी हुई थीं, उनके घर का जीना मुहाल हो गया था। लाल टीशर्ट और लाल  ही टाइट सेलेक्स पर जिस तरह फिल्मी धुनों पर  घर में रात बिरात फूहड़ डांस करती फिर रहीं थी, घर के लोग परेशान  हो गए थे। जब लोग मना करते कि ये क्या हो रहा है तो इनके अनुयायी कहा करते थे की राधे मां खेल रही हैं। वैसे वीड़ियों में राधे मां अपने पिछले हिस्से को जिस फूहड़ तरीके से हिलाती दिखाई दे रही हैं, उस तरह का डांस हम गांव में लगने वाले मेलों में देखते रहे हैं। फूहड़ डांस का ही नतीजा है कि एक आयोजन के दौरान दो लड़के राधे मां को किनारे खड़े घूरते रहे। बाद मे जब ये बात इस राधे को समझ में आई तो इन्होंने माइक थामा और जोर जोर से चिल्लाने लगीं, मुझे देखने मत आओ, बस मेरा दर्शन करो। हाहाहाहहा.. इस बहुरुपिया मां को कौन समझाए कि जब आप देखने की चीज बन गई हो तो दर्शन करने कौन आ रहा है।

और हां अब बात प्रसाद की। इस मां का प्रसाद देने का जो तरीका है, उससे उल्टी आने लगती है। एक भक्त  खीर लेकर आता है, ये कथित मां उसमें से एक  चम्मच खीर मुंह में रखती है, पांच सेकेंड बाद वो खीर एक भक्त के हाथ पर उगल देती है और लोग एक एक चावल का दाना प्रसाद के रुप मे ग्रहण करते हैं। इसी तरह इसे कोई भी प्रसाद चढता है तो ये उसे जूठा करती है और गंदे तरीके से भक्तों  के हवाले कर देती है। बाद में उसे ही लोग प्रसाद के रुप में ग्रहण करते हैं। मैने तो जो कुछ देखा और इसके बारे में सुना है, उससे तो यही लगता है कि   ये धर्म की नहीं गंदगी की राधे मां है।

इतना ही नहीं इस  मां को धर्म की एबीसीडी  नहीं आती है, इसीलिए वो पूरे समय खामोश रहती है। एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने इंगलिश में दो लाइनें बोल दीं, जिसको लेकर विवाद मचा हुआ है। अब हर मुंबई वासी कह रहा है कि ये तो बाबाओं के बाप की मां निकली राधे मां.।

 निर्मल बाबा छोडेगे बाबागिरी ? 
कल रात का सपना बड़ा भयावह था, देख रहा था कि मैं निर्मल बाबा के सिंहासन पर चूड़ीदार पैजामा और डिजाइनर कुर्ता पहने बैठा हूं और मेरे सामने खुद निर्मल बाबा घिघियाते हुए कह रहे हैं, बाबा मुझे बचाओ। उनकी आंखो से आंसू निकल रहे थे और मैं कह रहा था कि पहले ये बताओ आप कहां से आए हो ? हाथ जोड़े खड़े निर्मल ने कहा बाबा ने कहा पता मत पूछिए, मेरे पीछे पुलिस लगी है। अरे पुलिस को छोड़ो, अब ये बताओ तुम्हारे सामने मुझे आलू के पराठे क्यों दिखाई दे रहे हैं ? निर्मल बाबा बोले बाबा मैने कल रात पराठा खाया था और चार पांच पराठे गरीबों में बांटे भी थे। मैने कहा आपने पराठा किस चीज के साथ खाया, निर्मल बोले बाबा दही के साथ, और गरीबों को क्या दिया ? वो बोले केवल पराठा, बस यहीं कृपा रुकी हुई है। जाओ गरीबों को भी दही के साथ पराठा खिलाओ..। कृपा आनी शुरू हो जाएगी। निर्मल वापस अपनी कुर्सी पर जाने लगे तो मैने उन्हें फिर बुलाया और कहा ये हमारी मुठ्ठी बंद क्यों हो रही है भाई, एक बात बताओ, आपने दुनिया भर के लोगों से दसवंत निकलवाया, क्या आपने खुद दसवंत निकाला। अब निर्मल बाबा समझ गए थे कि गल्ती कहां हुई है और क्यों रुक गई कृपा। बेचारे चुपचाप जाकर पीछे की सीट बैठ गए। मेरे समागम में अगला श्रद्धालु आया तो मेरे सम्मान में कसीदें पढ़ने लगा। बोला

और मेरा कौन है, जो कुछ हैं सो आप हैं।
आप मेरे बाप के भी बाप के भी बाप हैं।।

मैने अपना बायां हाथ थोडा सा ऊपर करके उसे आशीर्वाद तो दे दिया, लेकिन मन ही मन सोचने लगा कि क्या ये मुझे पहचान तो नहीं गया है। क्योंकि शक्ल से तो ये श्रद्धालु बिल्कुल लुच्चा लग रहा है और मुझे अपने बाप का बाप बता रहा है। खैर नींद खुली तो सपने की बात को बड़ी देर तक सोचता रहा। निर्मल बाबा पर दया भी आ रही थी कि उन्हें क्या दिन देखने पड़ रहे हैं। बहरहाल अब मुझे लगता है कि निर्मल बाबा का खेल खत्म होने को है। अपने अजीबो-गरीब और बेतुके सुझावों से भक्तों पर कृपा बरसाने का दावा करने वाले निर्मल जीत नरूला उर्फ निर्मल बाबा के खिलाफ अब जनता ने पुलिस में रिपोर्ट लिखानी शुरू कर दी है और बाबा पर चार सौ बीसी के तहत गिरफ्तारी का खतरा भी मंडरा रहा है। बाबा अपनी बाबागीरी छोड़ने के मूड में आ गए लगता हैं। अपने चर्चित समागमों के द्वारा करोड़ों रुपये डकार चुके निर्मल बाबा ने पहली बार जून महीने के सभी समागम को अचानक रद्द कर दिया। बताते हैं कि बाबा को डर है कि कहीं श्रद्धालु बनकर पुलिस ही समागम में ना आ जाए और उनकी कृपा की दुकान बंद कर गिरफ्तार कर ले जाए।