Thursday, 12 May 2011

राहुल तब शर्म क्यों नहीं आई..

आज बात खालिस सियासत की। दिल्ली से सटे ग्रेटर नोएडा के किसान उत्तर प्रदेश सरकार से खफा हैं, वजह है उनकी कीमती जमीन का औने पौने दाम में मायावती सरकार अधिग्रहण कर रही है। किसानों की मांग है कि उनकी जमीन का उन्हें वाजिब दाम मिलना चाहिए। किसानों की मांग जायज है, उन्हें उनका हक मिलना ही चाहिए।

अपने हक की लड़ाई किसान महीनों से लड़ रहे हैं, पर तब राहुल ही नहीं किसी भी सियासी दल ने उनका साथ नहीं दिया। सप्ताह भर पहले जब यहां माहौल बिगड़ा, पुलिस और किसानों के बीच फायरिंग में चार लोगों की मौत हो गई और डीएम एसपी भी घायल हो गए तो राजनेताओं ने किसानों के गांव की ओर रुख किया। माहौल ना बिगड़े इसके लिए सूबे की सरकार ने धारा 144 लगा दी, इसका मतलब पांच व्यक्ति से ज्यादा लोग गांव के आसपास जमा नहीं हो सकते। इसके बावजूद यहां चौधरी अजित सिंह ने जाने की कोशिश की तो पुलिस ने उनका रास्ता रोक लिया। इसी तरह बीजेपी नेता राजनाथ सिंह और समाजवादी पार्टी के नेता शिवपाल यादव को भी वहां नहीं जाने दिया गया। राहुल गांव के चोर रास्ते से होते हुए वहां पहुंचने में कामयाब हो गए।

राहुल गांधी का लड़कपन

जी हां इसे तो राहुल का लड़कपन ही कहा जाएगा, क्योंकि वो एसपीजी प्रोटेक्टेड नेता हैं और उन्हें कहीं भी जाने के पहले वहां की सूबे की सरकार को बताना चाहिए, जिससे उनकी सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम किया जा सके। लेकिन राहुल ने ऐसा नहीं किया। बात काल्पनिक हो सकती है, लेकिन अहम है कि अगर यहां राहुल के साथ कुछ भी हो जाता तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होती। जाहिर है यूपी की सरकार तो हाथ खड़े कर देती और एसपीजी को जवाब देते नहीं बनता। वैसे तो गांव में मीडिया से बात करने की जिम्मेदारी कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने संभाल रखी थी, लेकिन गांव वालों से बात करते हुए राहुल ने कहा कि इस गांव में आकर जो हालात हमने देखा है, उससे हमें भारतीय होने पर शर्म आ रही है। मैं राहुल की बात से इत्तेफाक नहीं रखता हूं। क्योंकि मैं जानता हूं कि कई ऐसे मौके आए जब राहुल को भारतीय होने पर नहीं उस पार्टी का नेता होने पर शर्म आनी चाहिए थी जो उन्हें नहीं आई।

तब शर्म क्यों नहीं आई राहुल

1. जी मैं बताता हूं राहुल को उस समय शर्म क्यों नहीं आई, जब कारगिल के शहीदों की विधवाओं के लिए मुंबई में बने आदर्श सोसायटी के फ्लैट कांग्रेस नेताओं ने हथिया लिए। इसमें कांग्रेस के एक दो नाम नहीं कई नामचीन नेता हैं। यानि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण, विलासराव देशमुख, सुशील कुमार शिंदे और अभी के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज सिंह चव्हाण शामिल हैं। इतने कांग्रेसियों ने जब विधवाओं के फ्लैट कब्जाए तो कांग्रेसी होने पर शर्म क्यों नहीं आई।

2. कॉमनवेल्थ घोटाले में कांग्रेस नेता सुरेश कलमाडी को जेल जाना पड़ा। करोड़ों रुपयों की हेराफेरी में कलमाडी के बाद अब दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को भी नोटिस हो चुका है। गवर्नर पर भी इस गोरखधंधे में शामिल होने की बात की जा रही है। इसके अलावा जांच अधिकारी जयपाल रेड्डी के मंत्रालय की भूमिका को भी खंगाल रहे हैं। तब राहुल को शर्म क्यों नहीं आई।

3.टू जी स्पेक्ट्रम के आवंटन में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार के एक मंत्री ए राजा जेल में हैं। उन पर हजारों करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप है। इस पर उन्हें शर्म क्यों नहीं आई।

4. देश का लाखों करोड़ रुपया देश के धनपशुओं ने विदेशी बैंकों में जमा कर रखे हैं। बीजेपी के साथ ही तमाम सामाजिक संगठन कालेधन को वापस लाने की मांग कर रहे हैं और वित्तमंत्री ऐसा करने से हाथ खड़े कर रहे हैं। इस पर भी तो उन्हें शर्म आ सकती है। क्यों नहीं शर्म आई?

5. राहुल जी हालत ये हो गई कि सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ सामाजिक संगठनों के साथ पूरा देश खड़ा हो गया। तब कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार घुटने टेकते हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ कानून का मसौदा बनाने को तैयार हुई। देश भर में आपकी पार्टी की थू थू हुई, फिर भी आपको शर्म नहीं आई।

मैं मानता हूं कि आप संवेदनशील है, आप गरीबों के दुख दर्द को समझने की कोशिश करते हैं। रामराज्य की परिकल्पना आपके दिमाग में है। अगर यूपी के किसानों को उनकी जमीन का वाजिब हक ना मिलने पर आपको भारतीय होने पर ही शर्म आ रही है तो महाराष्ट्र में जहां आपकी सरकार है वहां विदर्भ में तमाम किसान आत्महत्या कर रहे हैं। विदर्भ में भी यही बात आपने क्यों नहीं कहा कि यहां की हालत देख आपको शर्म आ रही है। ये कुछ ऐसे सवाल हैं जिसका जवाब देश की जनता आप से जानता चाहती है।

राहुल भारतीय होने पर शर्म नहीं गर्व कीजिए

अगर मैं ये कहूं की आजाद भारत की ये सबसे भ्रष्ट सरकार है तो गलत नहीं होगा। मुझे लगता है कि आप मेरी बात से सहमत होंगे और राहुल भारतीय होने पर शर्म की बजाए गर्व कीजिए। जहां खामियां है वो दूर होनी चाहिए, ना कि शर्म से पीछे हटना चाहिए।





Tuesday, 10 May 2011

पायलटों ने कोर्ट को दिखाया ठेंगा




जाटों ने आरक्षण के लिए ट्रेनों को बंधक बनाया तो एयर इंडिया के पायलटों ने लगभग 10 दिन तक हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों को बंधक बनाए रखा। उत्तर प्रदेश और हरियाणा की सरकार ने जाटों के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई करने से साफ इनकार कर दिया। वजह और कुछ नहीं सिर्फ जाट वोट नाराज ना हो जाएं कि अगले साल विधानसभा चुनाव में वो सरकार के खिलाफ बिगुल बजा दें। इसलिए प्रदेश की सरकारों ने जाटों से अंदरखाने समझौता किया कि वो ट्रेन रोकेंगे, सड़कों पर वे कोई उपद्रव नहीं करेंगे। अब ट्रेन तो केंद्र की और ममता की है, लिहाजा सूबे की सरकार ने इस आंदोलन से आंख मूंद लिया।

हालत ये हो गई रोजाना दर्जनों ट्रेन रद्द होने लगी, लेकिन केंद्र और राज्य की सरकारें खामोश रहीं। आखिरकार इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बैंच ने जाटों के आंदोलन को गंभीरता से लिया और केंद्र के साथ राज्य सरकार को फटकार लगाने के साथ ही आंदोलनकारियों से सख्ती से निपटने के आदेश दिए। कोर्ट के आदेश के बाद अगले ही दिन जाटों ने रेल पटरी को खाली कर दिया।

अब बात एयर इंडिया के पायलटों की। इंडियन एयर लाइंस और एयर इंडिया के विलय के बाद पायलटों की मांग थी जब दोनों कंपनियों का विलय हो गया है तो वेतन में भेदभाव क्यों है। इस महत्वपूर्ण मांग को लेकर वो लंबे समय से प्रबंधन को हड़ताल की नोटिस दे रहे थे। इसके बाद भी प्रबंधन ने बातचीत से मसले को सुलझाने का प्रयास नहीं किया। ऐसे में मजबूर होकर एयर इंडिया के पायलट हड़ताल पर चले गए। इससे बड़ी संख्या में हवाई सेवाएं प्रभावित हुई। रोजाना 90 फीसदी फ्लाइट रद्द की जाने लगी। एयर इंडिया को करोडों का नुकसान हुआ, बाद में सख्ती दिखाते हुए पहले सरकार ने सात पायलटों को बर्खास्त किया, यूनियन की मान्यता खत्म की और हड़ताल को अवैध घोषित कर दिया। इतना ही नहीं हड़ताली पायलटों पर एस्मा लगाने की बात हुई तो पायलटों ने साफ कर दिया कि वो काम पर नहीं लौटेगें भले जेल चले जाएं।


दिल्ली हाईकोर्ट को लगा कि अब इस मामले में उसे हस्तक्षेप करना चाहिए और कोर्ट ने तत्काल हड़ताल खत्म करने आदेश दिया। पर पायलटों का दिमाग सातवें आसमान पर था, लिहाजा उन्होंने कोर्ट का आदेश मानने से साफ इनकार कर दिया।
पहले तो सरकार सख्त दिखने की कोशिश करती रही ओर कहा कि हड़ताल खत्म किए बगैर कोई बातचीत नहीं होगी। लेकिन जब कोर्ट का आदेश पायलटों ने मानने से इनकार कर दिया और उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई भी शुरू हो गई तो सरकार बैक फुट पर आ गई। उसे लगा कि एयर इंडिया के साथ ही बेवजह सरकार की भी फजीहत होगी। इसलिए हड़ताली पायलटों से अचानक बातचीत शुरू कर दी गई और उन्हें भरोसा दिलाया गया कि उनकी मांगों पर ना सिर्फ गंभीरता से विचार होगा बल्कि उसे पूरा भी किया जाएगा। इतना ही नहीं यूनियन की मान्यता बहाल करने और बर्खास्त पायलटों को भी सेवा में लेने का भरोसा दिया गया।

सरकार के झुकने के बाद पायलटों की हड़ताल खत्म हो गई। हड़ताल भले खत्म हो गई, लेकिन बड़ा सवाल ये कि हड़ताल के दौरान यात्रियों को जो मुश्किल हुई उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा, एयर इंडिया को करोडों की चपत लगी इसकी जिम्मेदारी किसकी है। अगर पायलटों की बात माननी ही थी तो जब हड़ताल की नोटिस दी गई उस समय बातचीत क्यों नहीं की गईं। और सबसे बड़ा सवाल ये कि पायलटों ने जो कोर्ट के आदेश को ठेंगा दिखाया इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

जहां तक मुझे याद है कि पहली बार किसी संगठन ने कोर्ट के आदेश को ठुकराया है और अपनी जिद्द पर अडे रहे। फिर भी केंद्र सरकार कोशिश कर रही है कि हड़ताली पायलटों पर अवमानना की कार्रवाई को किसी तरह रोका जाए। सच ये है कि अगर पायलटों को अवमानना की कार्रवाई से मुक्त किया गया तो ये एक नजीर बन जाएगी और आने वाले समय में इसी तरह लोग कोर्ट के आदेश को ठेंगा दिखाते रहेंगे, इसलिए कोर्ट के काम में किसी तरह की दखलअंदाजी नहीं होनी चाहिए।





Friday, 6 May 2011

प्लीज... इस कविता को पूरा कीजिए..


जी, हां मुझे आपकी मदद चाहिए। मैं आगे नहीं सोच पा रहा हूं। मैं चाहता हूं आप सभी मित्रों की मदद से इसे आगे बढ़ाऊं। मुझे भरोसा के आप सभी मित्र कम से कम दो दो लाइन जरूर सुझाएंगे।



कौन सुनेगा कविता मेरी,

किसको है अवकाश।

चला जा रहा हूं धरती पर,

देख रहा आकाश ।



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आपके सहयोग की अपेक्षा है।

Wednesday, 4 May 2011

वाह रे दिल्ली वालों......



अक्सर महानगर वाले यूपी और बिहार को कोसते नजर आते हैं। दिल्ली में गंदगी क्यों है, जवाब मिलता है ये यूपी और बिहार वालों की वजह से। मंहगाई क्यों बढ़ती जा रही है जवाब मिलता है यूपी और बिहार वाले बहुत ज्यादा खाते हैं, इसलिए मंहगाई है। महानगर में मकानों का किराया बहुत ज्यादा बढ रहा है, इसके लिए भी जवाब मिलता है कि यूपी और बिहार वाले अपना घर छोड़ कर महानगरों का रुख कर रहे हैं, इसलिए किराये बढ़ रहे हैं। महानगरों में अपराध बढ रहे हैं, फिर रटा रटाया जवाब यूपी और बिहार की वजह से। जनसंख्या बढने के लिए भी यूपी और बिहार वाले जिम्मेदार। कहने का मतलब ये कि महानगरों में जितनी भी बुराइयां और खामियां है सबके लिए यही यूपी और बिहार वाले जिम्मेदार हैं। चूंकि दिल्ली की सियासत में यूपी और बिहार के लिए आपत्तिजनक टिप्पणी करके किसी भी नेता के लिए चैन की नींद लेना संभव नहीं है, इसलिए यहां तो फिर भी सियासी कुछ बोलने के पहले सौ बार सोचते हैं, लेकिन मुंबई में तो लोग यूपी और बिहार के लोगों पर हमला करने से भी पीछे नहीं रहते।

पर महानगर में रहने वाले कभी ये भी सोचते हैं कि उनके बारे में लोगों की राय क्या है। पिछले दिनों मुझे उत्तराखंड में मसूरी से करीब सौ किलोमीटर और ऊपर चकराता जाना पड़ा। वापसी शनिवार को हो रही थी। वीकेंड होने की वजह से पूरी दिल्ली मसूरी में कैंम्पटीफाल में डेरा डाले हुए थी। इन दिल्ली वालों ने लगभग 1500 से ज्यादा कारों को बेतरतीब जहां तहां खड़ी करके पहाड़ के पूरे रास्ते को जाम कर दिया। यकीन मानिये 8 घंटे से भी ज्यादा समय इस जाम में और लोगों के साथ मैं भी फंसा रहा।

इन गाड़ियों में दिल्ली का नंबर देख हर आदमी दिल्ली वालों को सिर्फ कोस ही नहीं रहा था, बल्कि वो ऐसी गालियां दे रहे थे, जिसे मैं यहां लिख भी नहीं सकता। मैं पूछता हूं दिल्ली वालों, दिल्ली में लेन तोड़ने पर जुर्माना भरते हो, रेड लाइट तोड़ने पर जुर्माना भरते हो, चलती गाड़ी में मोबाइल से बात करने में जुर्माना भरते हो। इसलिए दिल्ली में तो ट्रैफिक नियमों का पालन बखूबी करते हो। लेकिन दिल्ली से बाहर निकलते ही आखिर हो क्या जाता है जो लोगों की गाली सुनते हो। शर्म करो....