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Saturday, 12 October 2013

आसाराम का मिशन बलात्कार !

हले सोच रहा था कि पांच राज्यों मं चुनाव घोषित हो गए हैं, उसकी बात करूं, 2014 यानि आम चुनाव में भले ही अभी देरी हो पर सियासी पारा बिल्कुल चढ़ा हुआ है। लेकिन इन सब पर भारी पड़ रहा है आसाराम और उसका परिवार। सूरत की दो बहनें जिस तरह सामने आई हैं और उनकी आप बीती सुनने से तो लगता है कि आसाराम और उसका दुलारा नारायण साई दोनों ही रेपिस्ट हैं। सवाल ये भी है कि अगर आसाराम रेपिस्ट नहीं होता तो भला वो क्यों भरी सभा में कहता कि वो मर्दानगी बढ़ाने के लिए दूध में सोना उबाल कर पीता है। इसके अलावा पलास का फूल और ना जाने क्या - क्या चबाता है। अच्छा इस बाप बेटे की करतूतें सुन कर ही आम आदमी हिल जाता है, उसे लगता है कि ये धर्म की आड़ कैसे - कैसे भेड़िए पनाह लिए हुए हैं। एक बार बात यहीं खत्म हो जाती तो गनीमत थी, लोगों को लगता कि अब इस बाप - बेटे की करतूत सामने आई है तो ये दोनों आगे सुधर जाएंगे, क्योंकि अब तो ये समाज में क्या परिवार में मुंह दिखाने के लायक नहीं रहे। पर सबसे बड़ी हैरानी इस बात पर हुई की बाप के लिए लड़की का इंतजाम उसकी बेटी कर रही थी। जब ऐसी करतूतें सामने आ रही हों तो भला कहां राजनीति पर कलम चलाने की जरूरत थी, पहले तो इन कुकर्मियों का असली चेहरा लोगों के बीच में लाना जरूरी हो गया।

चलिए पहले बात आसाराम की ही कर लेते हैं। यूपी की शाहजहांपुर की बेटी ने जिस तरह इसके कुकर्मों का खुलासा किया है, मुझे लगता है कि उस बेटी ने तमाम दूसरी बेटियों की जिंदगी तबाह होने से बचा ली। वरना एकांतवास और समर्पण की आड़ में आसाराम की  अय्याशी यूं ही चलती रहती। आसाराम के लिए लड़कियों का इंतजाम कौन करता था, ये नाम सुनकर आप भी हमारी तरह चौंक जाएंगे। इसके लायक बेटे और बेटी अपने अपने बाप के लिए लड़कियां पहुंचाने का काम करते थे। इतना ही नहीं इसकी बीबी भी अपने पति के चरणों में लड़की पेश करती थी। ये बात मैं नहीं कह रहा हूं, इसका खुलासा जोधपुर में मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज बयान में आसाराम के ही पूर्व सेवादार अजय कुमार ने किया है। उसका साफ कहना है कि नारायण साई अक्सर आसाराम के लिए लड़की का इंतजाम करता था। लड़के की करतूतों का खुलासा जहां पूर्व सेवादार ने कर दिया, वहीं सूरत की बहनों ने पुलिस में दर्ज कराई गई एफआईआर में कहा है कि उन्हें आसाराम के पास उनकी बेटी ले जाती थी, इतना ही नहीं एक बार जाने से मना कर देने पर आसाराम की बीबी ने उसे तमाचा मारा। आसाराम के कुकर्मों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वो अय्य़ाशी में इस कदर अंधा है कि लड़की का इंतजाम करने के लिए अपने बेटे, बेटी और पत्नी सब को लगा रखा है।

हालांकि ये सब सुनकर हैरानी होती है। मेरा मानना है कि बेटा अगर खुद भी निकम्मा और अय्याश हो तो एक बार बाप की करतूतों को बर्दास्त कर लेगा, लेकिन बेटी और पत्नी भला ये कैसे बर्दास्त कर सकती हैं कि उसका बाप या पति लड़कियों के साथ अय्याशी करे ? जब से सूरत की दोनों बहनों ने इस परिवार के बारे में खुलासा किया है, ये पूरा परिवार कम से कम मेरी निगाह में तो घृणा का पात्र बन गया है। बताते हैं कि पुलिस को प्राथमिक जांच में आसाराम के खिलाफ पुख्ता सुबूत मिले हैं। इसके बाद अहमदाबाद पुलिस ने कोर्ट से आसाराम का ट्रांजिट वारंट मांगा है। चूंकि लड़की का आरोप  है उसके साथ बलात्कार अहमदाबाद के मोटेरा आश्रम में हुआ, इसलिए इस मामले की जांच अहमदाबाद पुलिस कर रही है। इस बीच आसाराम की न्यायिक हिरासत 25 अक्टूबर तक बढ़ गई है। मतलब ये कि अभी कुछ दिन और इस आसाराम जेल की ही रोटी खानी होगी। वैसे लड़कीबाजी आसाराम की बीमारी है, तो ये साल दो साल अगर जेल में रह गया तो काफी  हद तक उसे इस बीमारी से आराम मिलेगा। बस जरूरत इस बात की है इसे महिला वैद्य से भी दूर रखा जाए।

बात नारायण साईं की करें तो हम कह सकते हैं कि बड़े मियां तो बड़े मियां, छोटे मियां सुहानल्लाह ! खैर जब बाप ही आश्रमों में रंगरेलियां मना रहा है, उसे लड़की की सप्लाई भी बेटा कर रहा है, फिर नारायण साईं तो आसाराम के अनुयायी ही है ना। उसका तो बाप के पदचिन्ह पर चलना हक बनता है। आरोप लगा है कि सूरत की जिन दो बहनों के साथ बलात्कार हुआ, उसमें बड़ी के साथ आसाराम ने और छोटी के साथ नारायण साईं ने मुंह काला किया। इसके पहले  इंदौर की एक लड़की ने भी नारायण साईं पर छेड़छाड़ का गंभीर आरोप लगाया था। हालांकि ये सब आरोप है, सभी मामले न्यायालय में विचाराधीन है। ऐसे में इस मामले में किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। लेकिन ये बात भी सही है कि अगर नारायण साईं सही होता तो वह पुलिस से भागता नहीं। कुछ दिन पहले तक तो वो खुद तमाम न्यूज चैनलों में जाकर अपने बाप आसाराम का बचाव कर रहा था, जब से सूरत की लड़कियों ने रिपोर्ट दर्ज कराई है, ये अचानक लापता हो गया है। पुलिस की नोटिस का जवाब भी नहीं आ रहा है। लुकआउट नोटिस के बावजूद इसका कहीं कोई अता पता नहीं है। सूरत पुलिस ने इसे पूछताछ के लिए जहांगीरपुरा आश्रम में समन भेजा है। ऐसी आशंका है कि नारायण साईं नेपाल भाग गया है। लेकिन पुख्ता तौर पर पुलिस को उसके बारे में कुछ नहीं पता। उधर पुलिस ने सूरत आश्रम में छापेमारी के बाद दावा किया कि बलात्कार के मामले में नारायण साईं के खिलाफ उसे पुख्ता सबूत मिले हैं।

नारायण साईं खुद फरार है, लेकिन पुलिस से बचने और जनता में अपनी छवि बनाए रखने के लिए वो अपने वकील गौतम देसाई के जरिए समर्थकों को संदेश दे रहा है। उसके वकील ने सूरत के एक स्थानीय अखबार में इश्तेहार दिया है कि नारायण को बलात्कार के केस में फंसाया जा रहा है। मैं कहता हूं कि अरे भाई अगर तुम्हें फंसाया जा रहा है तो सामने आकर उसका सामना करो । लड़की के साथ आमने सामने की बात चीत से साफ हो जाएगा कि तुमने बलात्कार किया या नहीं ! भागने से क्या होगा, किसी को ये पता नहीं है कि नारायण इस समय है कहां, वो देश में है या नेपाल  भाग गया है। रही बात अग्रिम जमानत की अर्जी डालने की, तो वो सभी को हक है।  हास्यास्पद तो ये है कि प्रवक्ता नीलम दुबे कह रही हैं कि नारायण कहीं  भाग नहीं हैं, बल्कि वो किसी आश्रम में ध्यान-योग में लीन है। मैडम नीलम जिसके पीछे पुलिस लगी हो, वो भी बलात्कार जैसे गंभीर मामले में, वो ध्यान योग भला क्या करेगा ! माफ कीजिएगा, पर आपसे एक बात जरूर कहूंगा कि बलात्कार जैसे गंभीर मामलो के आरोपी आसाराम और नारायण साईं के चक्कर में पड़कर कम से कम ध्यान और योग को कलंकित मत कीजिए। अगर नारायण साईं सच्चा और अच्छा होगा तो वो खुद पुलिस के सामने आएगा और कहेगा कि मेरी जांच कीजिए, मैं निर्दोष हूं। लेकिन इतना कहने के लिए नैतिक बल की जरूरत है, जो आपके नारायण साईं में नहीं है।

वैसे मैडम नीलम दुबे जी माफ कीजिएगा, मैं महिलाओं के बारे में बिना ठोस जानकारी के कुछ नहीं कहना चाहता, लेकिन एक टीवी चैनल पर चर्चा के दौरान आश्रम के पूर्व सेवादार नाम शायद भोला है, उसने तो आप पर भी गंभीर आरोप लगाएं हैं। उसने तो चैनल पर चर्चा के दौरान यहां तक कहाकि नारायण साईँ ने आपके प्राईवेट पार्टंस पर बाईं ओर दांत काट लिया है, जिसका काफी दिनों तक इलाज चला है। उसका दावा है कि आज भी कटे का निशान वहां मौजूद है। इस दावे की सच्चाई मे मैं नहीं जाना चाहता, पर इतना जरूर कहूंगा कि आप महिला हैं, इसलिए इस संवेदनशील मुद्दे पर बस सच बोलना चाहिए, वरना लोगों का महिलाओं पर से भी भरोसा टूट जाएगा। आप ये बात भले ना स्वीकार करें, पर जब आप आसाराम और नारायण साईं का बचाव करतीं है, तब आपकी बाँडी लँग्वेज से बदबू आती है, पता चलता है कि आप झूठ बोल रही हैं।

खैर जहां आसाराम की बेटी और पत्नी पर गंभीर आरोप लग रहे हों, वहां आपकी चर्चा करना बेमानी है, लेकिन हर मामले में आश्रम की ओर से आप ही मीडिया के सामने आती हैं, इसलिए आपके बारे में दो बातें करना जरूरी हो गया था। हालांकि मैने जो बातें कहीं है, वो आश्रम के ही पूर्व सेवादार यानि भोला के आरोप हैं। हो सकता है कि भोला का दावा गलत हो, लेकिन इसके लिए आपको भी ये साबित करना होगा कि आपके प्राईवेट पार्टस के बाईं ओर दांत से काटने का कोई निशान मौजूद नहीं है और ना ही इसका कोई इलाज कराया गया है। बीजेपी की वरिष्ठ नेता साध्वी उमा भारती ने जब आसाराम की बेटी को अपना प्रिय दोस्त बताया तो मुझे लगा कि आसाराम की बेटी एक सरल और सामान्य महिला होंगी। लेकिन जिस तरह का आरोप उन पर सूरत की दोनों बहनों ने लगाया है, वो बहुत ही गंभीर है। मैं तो ईश्वर से प्रार्थना करूंगा कि कि आसाराम की बेटी और पत्नी पर लगे आरोप सच ना हों, लेकिन ये आरोप अगर सच हैं तो मैं एक बात तो दावे के साथ कह सकता हूं कि देश और दुनिया में इससे ज्यादा निकृष्ट परिवार और कोई नहीं होगा।




Tuesday, 27 August 2013

ये राजस्थान नहीं आसाराम की पुलिस है !

मुझे नहीं पता ये कौन है, आप पहचानिए !
साराम के बारे मे आगे बात करने से पहले आप इस तस्वीर को देख लीजिए। आमतौर पर ऐसी तस्वीर सामने आने के बाद पहले तो लोग तस्वीर को ही खारिज कर देते हैं, कहते हैं कि इस तस्वीर के साथ छेड़छाड़ की गई है। लेकिन सोशल नेटवर्क साइट पर ये तस्वीर मौजूद है और जिसने इस तस्वीर को पोस्ट किया है, उसका दावा है कि इस तस्वीर के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है। इसमें जो शख्स दिखाई दे रहा है, वो वही आसाराम है जो इन दिनों की एक बहुत ही घिनौने आरोपों में बुरी तरह फंस हुआ है। सवाल ये कि  अगर ये तस्वीर सही है तो आसाराम का ये कौन सा एकांतवास है ? ये कौन सी साधना कर रहे है आसाराम ? अच्छा चूंकि मैने तो ये तस्वीर खिंची नहीं है, इसलिए मैं भी इस तस्वीर को खारिज कर दे रहा हूं। लेकिन मासूम बेटी ने जिस तरह का आरोप लगाया है, अगर उसकी बातों के आधार पर आसाराम का चित्र बनाया जाए, तो वो तस्वीर इससे भी गंदी होगी। वो ऐसी तस्वीर होगी, जिसे यहां पोस्ट करना भी संभव नहीं होगा। आसाराम कहते हैं कि उनकी अवस्था 75 वर्ष की हो गई है, ऐसे में उन पर बलात्कार का आरोप लगाना ठीक नहीं है। योनशोषण का आरोप लगाने वाली लड़की को अब आसाराम अपनी पोती बताकर "दादा" के रिश्ते को भी कलंकित कर रहा है। चित्र में जिस लड़की को वो खिला रहे हैं, मुझे तो लगता है कि ये भी उनकी पोती के ही समान होगी, लेकिन आसाराम बताएगा कि पोती को स्नेह, प्यार और दुलार करने का ये कौन सा आसन है। बहरहाल एक लाइन की बात ये कि इस घृणित कार्य के बाद भी जिस तरह से पुलिस की कार्रवाई चल रही है, उसे तो यही लग रहा है कि ये राजस्थान की नहीं आसाराम की पुलिस है।

हम सब जानते हैं कि संत के पीछे भक्त लगे होते हैं, इस संत की पीछे पुलिस लगी है। संत भागवत गीता, रामायण, रामचरित मानस पढ़ता है, ये संत कानून की धाराएं पढ़ता है। संत भक्तों को भगवान से मिलने का रास्ता बताता है, ये संत लोगों कानून की आंख में धूल झोंकने का रास्ता सिखाता है। एक सामान्य आदमी पर भी ऐसा घिनौना आरोप लगता है तो वह भीतर से टूट जाता है और आत्ममंथन कर गलती को सुधारने की कोशिश करता है। ये गलती पर गलती को दोहराता रहता है। ये संत झूठ भी बोलता है और तब तक बोलता रहता है, जब तक पकड़ा नहीं जाता। इस तथाकथित संत के ऊपर देश भर में ना जाने कितने मामले चल रहे हैं, मैं तो यही देखकर हैरान हो जाता हूं। बलात्कार, हत्या की कोशिश, जमीन कब्जाने, काला जादू से लेकर और ना जाने क्या-क्या आरोप इस पर और इसके आश्रम पर नहीं लगे। अच्छा हैरानी तो ये कि गंदगी करने के बाद श्रद्धालुओं की आड़ में कानून को चुनौती भी देता है। उसे लगता है कि अगर पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया तो देश में बवाल मचा देगा। फिर चुनाव का मौका है, लिहाजा कोई भी राज्य सरकार उससे पंगा लेने की हिम्मत नहीं जुटा पाएगी।

बहरहाल पुलिस की जो कार्रवाई चल रही है, उससे तो लगता नहीं कि राजस्थान में पुलिस है, बल्कि वो सामाजिक कार्यकर्ता की तरह काम कर रही है। यही वजह है कि वो किसी तरह इस मामले का शांतिपूर्ण समाधान निकालना चाहती है। मसलन लाठी भी ना टूटे और काम भी बन जाए। लेकिन काम इतनी आसानी से बनने वाला नहीं है। नाबालिग लड़की के यौन शोषण का मामला है और आरोपी भी कोई सामान्य व्यक्ति नहीं बल्कि आसाराम हैं। ये तो साफ है कि आसाराम के खिलाफ जितनी गंभीर धाराओं में मामला दर्ज है, अगर उसकी जगह कोई और होता तो अब तक तो उसे पुलिस गिरफ्तार कर थर्ड डिग्री के जरिए अपराध भी कबूलवा चुकी होती। लेकिन आसाराम को अतिथि अपराधी का दर्जा हासिल है। जिन धाराओं में अपराध पंजीकृत है, उसमें पुलिस को तो ज्यादा मेहनत करने की जरूरत ही नहीं है, क्योंकि इसके तहत खुद आसाराम को साबित करना है कि वो पाक साफ है। पुलिस को तो बस उसे गिरफ्तार कर कोर्ट के सामने पेश भर करना है।

मैने देखा कि मुंबई बलात्कार की घटना के बाद राजस्थान सरकार, राजस्थान पुलिस और आसाराम बहुत खुश थे। इन्हें लगा कि अब मीडिया मुंबई में ही रहेगी, उसे जोधपुर की घटना से ज्यादा लेना देना नहीं रहेगा। लेकिन भला हो उस बेटी का कि इस वक्त संसद चल रही है। वैसे तो मैने संसद में शरद यादव को बेकार की बातें करते हुए ही ज्यादा सुना है, लेकिन पहली बार उन्होंने देश की जनता की आवाज में अपनी आवाज मिलाई और आसाराम के खिलाफ जमकर बोले। गुरुदास गुप्ता ने तो इसे फांसी देने तक की बात कह दी। इसके अलावा भी तमाम सांसदों ने आसाराम पर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। संसद में माहौल गरम देख राजस्थान सरकार के पसीने छूट गए। मुख्यमंत्री को लगा कि अगर राजस्थान पुलिस की लापरवाही की वजह से संसद में कार्य बाधित हुआ तो पार्टी नेता उन्हें निशाना बना सकते हैं। इसी बीच गृहमंत्री ने अपनी बचाने के लिए राजस्थान सरकार से पूरी रिपोर्ट तलब कर ली। यहीं से पुलिस थोड़ा सतर्क हुई और इंदौर जाकर आसाराम को नोटिस देकर कहा कि वो 30 अगस्त तक पूछताछ के लिए हाजिर हों। वरना तो इसके पहले राजस्थान पुलिस पूरे केश का बलात्कार करने में जुटी हुई थी। राजस्थान के एक गैरजिम्मेदार पुलिस अफसर ने तो अपना  फैसला ही सुना दिया, कहाकि बलात्कार का मामला पुष्ट नहीं हुआ है, इसलिए धारा 376 हटा ली गई है। जब देश में इसकी तीखी प्रतिक्रिया हुई तो पुलिस का वही अफसर अपनी बात से पलट गया। वैसे भी राजस्थान पुलिस की कार्रवाई का भगवान ही मालिक है। सब ने देखा कि आसाराम इंदौर में है और राजस्थान की पुलिस अहमदाबाद में उन्हें नोटिस थमाने गई थी। आसाराम मालामाल है, उन्हें पैसे की कमी तो है नहीं। इसलिेए वो कहीं भी भाग सकते हैं, लिहाजा राजस्थान की पुलिस ने लुकआउट नोटिस जारी कर दिया है, इससे अब आसाराम विदेश नहीं भाग सकेंगे।

शिकंजा कसता देख आसाराम अब परेशान है। लेकिन इसके बाद भी वो परेशानी से निकलने के लिए सच्चाई का रास्ता नहीं देख रहा है। वो सरकारों को डराने की कोशिश कर रहा है। ऐसा माहौल बनाना चाहता है जिससे सरकार डर जाए और गिरफ्तार ना करे। इसीलिए आज उसने भक्तों के बीच कहाकि  अगर  पुलिस ने गिरफ्तार किया तो वो अन्न जल त्याग देगा। अब उसे कौन समझाए कि तुझे तो फांसी पर लटकाने की बात तक संसद में हो रही है। ऐसे में खाना पानी छोड़ने से भी कोई सहानिभूति नहीं होने वाली। अब तो एकांतवास और साधना की आड़ में रंगबाजी या कहूं रंगरेलिया नहीं चल पाएगी। आपको पता है इंदौर में जब आसाराम को बताया गया कि पुलिस आई है, आसाराम तुरंत एक कमरे चला गया और चेलों से कहा कि उन्हें बता दो कि मैं साधना कर रहा हूं। हाहाहहा। वाह रे, साधना वाले आसाराम। हां एक बात तो बताना ही भूल गया। आसाराम कह रहा है कि पुलिस उसे गिरफ्तार करके कुछ ऐसा वैसा खिला देगी। अरे पुलिस क्यों खिला देगी ? पुलिस पागल है क्या ? पुलिस के लिए तो आसाराम संत नहीं बल्कि "मोटा माल" है। पुलिस अच्छी तरह जानती है कि किसके साथ कैसा सलूक करना है। मैं तो बहुत से पुलिस वालों को देखता हूं कि वो अपने सर्विस काल में किसी लंपू चंपू बाबा का साथ देते रहते हैं और रिटायर होने के बाद उसी के आश्रम पर कब्जा जमा लेते हैं। अब आसाराम को भी एक दो आश्रम से तो हाथ धोना ही पडेगा।

सच कहूं, मैं आसाराम से ज्यादा उनके श्रद्धालुओं को गलत मानता हूं। भक्ति तो ठीक है, लेकिन अंधभक्ति का क्या मतलब है ? जब हम सब देख रहे हैं कि जिस आदमी का हम सब जय जयकार कर रहे हैं, वो बहुत ही घृणित और नीच कर्म में शामिल हैं। ऐसे में हमें खुद ही उस आदमी के खिलाफ मुखर होना चाहिए। यहां मुखर होना तो दूर, हम उसकी जय-जय कार कर सरकार को ये बताने की कोशिश कर रहे हैं, कि हम इसी के पापी के साथ खड़े हैं। मैं ज्यादा कुछ नहीं कहूंगा, लेकिन इतना जरूर कहूंगा कि जिस किसी को लगता है कि पीड़ित बेटी झूठ बोल रही है, वो किसी साजिश के तहत ऐसा आरोप लगा रही हो, तो प्लीज आप एक काम कर सकते हैं, जब ये आसाराम के एकांतवास में जाए तो अपनी बेटी को उसके पास भेज कर देखिए। शायद फिर आपकी आंखे खुल जाएं !





Thursday, 22 August 2013

क्या " लाल " करना नहीं जानती दिल्ली पुलिस ?

मैं बात तो बापू आसाराम की ही करने आया हूं, लेकिन इस बूढ़े की करतूत से मन इतना खिन्न है कि इसके नाम के आगे बापू लिखने का बिल्कुल मन नहीं है। लिहाजा आगे बस आसाराम ही लिखूंगा। आपको पता ही होगा, हफ्ते भर पहले पुलिस के हत्थे चढ़ा 70 साल का आतंकी टुंडा ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि तीन साल पहले उसने 18 साल की लड़की से शादी की है, ये उसकी तीसरी बीबी है। शायद इसी टुंडा की कहानी आसाराम को जंच गई. और वो खुद को रोक नहीं पाया, और एक नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म करने के लिए पागल हो गया। खैर इस बूढे आसाराम की तो मैं आगे खबर लूंगा ही, लेकिन सच बताऊं मैं आसाराम से ज्यादा दिल्ली और राजस्थान की पुलिस से नाराज हूं। एफआईआर दर्ज हुए तीन दिन बीत गए और अभी तक पुलिस इसे गिरफ्तार नहीं कर पाई। मेरा दावा है कि ये मामला अगर यूपी पुलिस के पास होता तो अब तक पुलिस न सिर्फ आसाराम को गिरफ्तार कर चुकी होती, बल्कि इतना लाल कर चुकी होती कि ये आसाराम कम से कम महीने भर तो बैठकर प्रवचन करने की हालत में नहीं होता। ये पुलिस वाले दो चार रूपये चोरी करने वाले बच्चों पर तो "थर्ड डिग्री" इस्तेमाल कर दरिंदगी की सारी सीमाएं तोड़ देते हैं, लेकिन जब इनके सामने किसी बड़े आदमी का नाम आता है, चाहे उसने कितना ही घिनौना काम क्यों ना किया हो, इनकी घिग्घी बंध जाती है।

स्वामी नित्यानंद, कृपालु महराज, चिन्मयानंद के बाद अब आसाराम। सभी पर महिलाओं के साथ यौन शोषण के गंभीर आरोप है। संत समाज का रवैया अगर ऐसा ही रहा तो वो दिन दूर नहीं जब संतों की विश्वसनीयता खत्म हो जाएगी। हालाकि मेरा मानना है कि अब इन संतो के प्रवचन में कोई दम नहीं रहा, वरना आज जितनी अधिक मात्रा में भागवत कथा, रामकथा के साथ देश भर में जहां तहां धार्मिक प्रवचन हो रहे हैं। उसके बाद तो देश के लोगों में कोई सुधार नहीं है। आपको पता है कि लगभग हर प्रवचन का टीवी पर प्रसारण भी होने लगा है, ऐसे में तो देश में कोई बुराई रहनी ही नहीं चाहिए थी, लेकिन मेरा मानना है कि इन प्रवचनों में का समाज पर कोई असर नहीं है,  यही वजह है कि अपराध भी तेजी से बढ़ रहे हैं। अब बढ़े भी क्यों ना ! संतों का चरित्र जो सामने आ रहा है, ये सब देखकर इन भगवाधारियों से घिन्न आने लगी है। मुझे हैरानी इस बात पर भी है कि बिना जांच कि रिपोर्ट आए ही, बीजेपी नेता उमा भारती ने आसाराम को कैसे क्लीन चिट दे दिया। आसाराम के चरित्र को किस आधार पर उमा भारती साफ सुथरा बता रही हैं, जबकि आसाराम पर आज भी तरह तरह के गंभीर  आरोप हैं। खैर खग ही जाने खग की भाषा।

आसाराम पर आरोप लगा कि उनके आश्रम में काला जादू होता है, इससे दो बच्चों की मौत तक हो गई, उन पर जमीन कब्जाने के कई मामले चल रहे हैं। बद्जुबानी तो आसाराम के खून मे हैं। उनकी नजर में पत्रकार कुत्ते हैं, राहुल गांधी कम बुद्धि वाला लड़का है, महाराष्ट्र में पानी की बर्बादी पर सवाल उठा तो बोले पानी किसी के बाप का नहीं है। रतलाम में कहाकि पृथ्वी पर पानी की कमी नहीं है, अगर मैं झूठ बोलूं तो तुम सब मर जाओ। तुम सब का आशय सामने बैठे भक्तों से था। सबसे घृणित आचरण तो इसने तब किया जब दिल्ली में बलात्कार के खिलाफ आंदोलन चल रहा था तो कहा कि " इतनी रात में लड़की सिनेमा देखकर आ रही थी, फिर भी अगर वो बलात्कारियों से हाथ जोड़कर प्रार्थना करती और उन्हें भाई बना लेती तो ऐसा नहीं होता। ये तो यहां तक कहने से नहीं चूके कि गलती एक तरफ से नहीं होती। मतलब दामिनी की भी गलती थी। बहरहाल अब एक बच्ची ने इसी आसाराम पर इतने गंभीर आरोप लगाए हैं कि सुनकर इस आदमी से नफरत होने लगी है। ऐसा नहीं है कि दिल्ली की पुलिस किसी भी लड़की के आरोप लगाने मात्र से इतनी गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर लेगी ? ऐसा तो बिल्कुल नहीं है, बकायदा पुलिस ने लड़की का मेडिकल कराया है। रिपोर्ट में लड़की के आरोपों को सही पाया गया है, उसके बाद ही यहां एफआईआर दर्ज हुई है। फिर मामला गंभीर था, इसीलिए धारा 376 के साथ ही "पास्को" के तहत भी मामला दर्ज किया गया। मतलब ये कि अब खुद आसाराम को साबित करना है कि वो बेगुनाह हैं।

मुझे तो लगता है कि दिल्ली पुलिस लाल करना ही नहीं जानती है। वरना तो आसाराम कुछ दिन पहले यहीं दिल्ली में थे। बंद कमरे में आधे घंटे की पूछताछ में एक-एक बात बता देते। मेरा तो मानना है कि पुलिस को बहुत ज्यादा लाल करने की जरूरत भी नहीं पड़ती। सच बताऊं, दिल्ली पुलिस ने एक बहुत बड़ा अवसर खो दिया। अगर वो आसाराम के मामले में सख्त कार्रवाई करती तो दिल्ली पुलिस पर लोगों का भरोसा बढ़ जाता। लगता कि दिल्ली में कानून का राज है, यहां कोई बड़ा छोटा नहीं है। लेकिन दिल्ली पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर महज खानापूरी की, कार्रवाई के नाम पर वो पीछे हट गई। हैरानी इस बात पर हो रही है कि आसाराम के प्रवक्ता मीडिया के सामने झूठ पर झूठ बोले जा रहे हैं। कह दिया कि जिस दिन बलात्कार की बात की जा रही है, उस दिन ये जोधपुर में थे ही नहीं। बाद में फार्महाउस के मालिक ने खुलासा किया कि नहीं आसाराम यहीं रुके थे और लड़की भी अपने परिवार के साथ यहां थी।  

बहरहाल आसाराम पर जो आरोप लगे हैं मैं तो उससे बिल्कुल हैरान नहीं हूं। मेरा तो मानना है कि एक अयोग्य आदमी को जब इतना मान सम्मान, एश्वर्य मिलता है तो वो पागल  हो जाता है। ये संत समाज ऐसे ही अपराधियों की शरणस्थली बनता जा रहा है। आपको याद होगा जो नित्यानंद एक अभिनेत्री के साथ अश्लील हरकत करते हुए पकड़ा गया और उसकी सीडी तक आम जनता के बीच आ गई। उसे जेल तक जाना पड़ा।  पर उस भगवाधारी को इसी संत समाज ने इलाहाबाद के कुंभ मेले के दौरान जगतगुरु की उपाधि से नवाजा। बुजुर्ग कृपालु महराज पर भी बलात्कार का गंभीर आरोप लग चुका है। स्वामी चिन्मयानंद पर भी उनकी  ही शिष्य़ा चिदर्पिता ने बलात्कार का ना सिर्फ आरोप लगाया, बल्कि थाने में रिपोर्ट तक दर्ज कराई। मैं तो ऐसा आचरण करने वालों को साधु संत बिल्कुल नहीं मानता। ये अपराधी हैं और इनके साथ अपराधियों जैसा ही सलूक होना चाहिए।









Thursday, 25 April 2013

शर्मिंदा हूं क्योंकि " मैं दिल्ली हूं " ...


मुझे ये कहते हुए शर्म आ रही है कि "मैं दिल्ली हूं"। मैं इतनी कमजोर कभी नहीं थी कि मैं अपनी बेटियों की रक्षा ना कर पाऊं। पिछले साल दिसंबर में मेरी ही छाती पर बस दौड़ाते हुए कुछ दरिदों ने बेटी दामिनी को अपनी हवस का शिकार बनाया, उस समय अंधेरा था, लेकिन मैं चीख रही थी कि दामिनी को बचाओ, पर नशे में डूबे मेरे बेटों को मेरी आवाज नहीं सुनाई दी। मैं चीखती रही, रोती रही, मेरी आंखो के आंसू सूख गए, लेकिन मेरे बेटों की ना ही नींद खुली और ना दिल पसीजा। अब बेटे मेरी बातें नहीं सुनते, इन्हें लगता है कि मेरी उम्र ज्यादा हो गई है और मैं यूं ही चीखती रहती हूं। मैने पहले ही आगाह किया था कि सुधर जाओ, दामिनी के बलिदान को बेकार मत जाने दो, राक्षसों के संहार के लिए कमर कस लो, समय निकल गया तो फिर बहुत पछताओगे, लेकिन मेरी किसी ने नहीं सुनीं। अब  मासूम गुड़िया के साथ हैवानियत देख मेरी तो जान ही निकल गई। लेकिन जब मैं अपनी ही बेटियों की "लाज" नहीं बचा पाई तो अब इससे ज्यादा मेरे लिए बुरा दिन भला क्या हो सकता है। अब मैं खुद सड़क पर उतरूंगी, मेरे बच्चों ने मेरी दूघ का अगर एक घूंट भी पीया है, उसे उसी दूध का वास्ता दूंगी और कहूंगी कि मुझे फिर से ऐसी दिल्ली बना दो जिससे मैं कम से कम मुंबई, कोलकता, भोपाल, जयपुर और लखनऊ से आंख मिलाकर बात तो कर सकूं। मुझे पक्का भरोसा है कि एक ना एक दिन मेरे करन अर्जुन आएंगे और मुझे साफ सुथरी बेदाग दिल्ली बनाएंगे।

दिल्ली के बाहर था, आज वापस आया तो "दिल्ली" उदास मिली। पूछा हुआ क्या ? पर कोई जवाब नहीं। परेशान होकर टीवी खोला कि शायद कुछ पता चले, लेकिन नहीं, यहां तो सचिन तेंदुलकर के जन्मदिन दिन का केक काटकर खुशियां मनाई जा रहीं थी। देश भर से सचिन को बधाई देने की अपील की जा रही थी। ये देखकर मन खिन्न हो गया, लगा कि दो दिन पहले जिस गुडिया को टीवी चैनल वाले "देश की बेटी" बता रहे थे और रोना सा मुंह बनाकर सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर रहे थे, आखिर आज उन्हें क्या हो गया ? क्या देश की बेटी स्वस्थ होकर घर आ गई कि उसी टीवी स्क्रिन पर खुशियां मनाई जा रही हैं। सचिन के प्रशंसक नाराज हो सकते हैं, लेकिन मैं पूछना चाहता हूं कि क्या सचिन अपना एक जन्मदिन सादगी से नहीं मना सकते ? देश की बेटियां सड़कों पर हैं, मासूम बेटियों के साथ देश के कई हिस्सों में घिनौनी वारदात से देश सकते मे है। क्या सचिन आज के दिन एक ऐसी प्रतिक्रिया नहीं दे सकते थे कि जिससे पीड़ित मासूम बच्चियां के चेहरों पर दो सेकेंड के  लिए ही सही, खुशी तो दिखाई देती। सचिन को आज क्या एक ठोस संदेश नहीं देना चाहिए था, दिल्ली का ये सवाल मेरे दिल को छलनी कर गया।

आइये ! लगे हाथ आईपीएल की बात भी हो जाए। हमें पता है कि नए फार्मेट मे गेम हो रहा है, लाखों लोग इस खेल के प्रेमी हैं और इससे जुड़े हैं, समय मिलता है तो मैं भी मैच देखता हूं। लेकिन मेरी समझ में नहीं आ रहा है कि जब देश में एक ऐसी घटना हो गई हो, जिसे लेकर पूरा देश दुखी है। ऐसे में क्या दो चार मैच सादगी से नहीं हो सकते, इन मैचों में लड़कियों को नहीं नचाया जाएगा तो क्या खेल खराब हो जाएगा ? क्या इस खेल की जान अब बल्लेबाजों के चौकों छक्कों में नहीं महज 10 ग्राम कपड़े पहने चीयर गर्ल्स की कमर में सिमट कर रह गया है। हैवानियत की शिकार मासूम बच्चियां देश की विभिन्न अस्पतालों में मौत से जूझ रही हैं और यहां खेल के मैदान पर क्रिकेट के नाम पर नंगा नाच जरूरी है। सब देख रहे हैं कि टीवी के कैमरे सचिन के बेट पर उतना फोकस नहीं रहते जितना चीयर गर्ल्स की टांगों पर फोकस करते हैं। आईपीएल का अगर यही मतलब है तो राजीव शुक्ला साहब तो बेशक आप इसे किसी दूसरे देश में ले जा सकते हैं। वैसे भी आप लोगों के लिए आईपीएल  इतना जरूरी है कि देश में चुनाव के दौरान सरकार ने सुरक्षा देने में असमर्थता जताई तो आपने मैच साउथ अफ्रीका में करा लिया, मैच आगे नहीं बढा पाए। इससे साफ है कि आपकी नजर में देशवासियों की क्या हैसियत है।

मैं दिल्ली से बात करता हुआ थोड़ा भटक गया। खैर बात-चीत के दौरान मैने पूछा आखिर आपकी ये हालत किसने बना दी ? किसने आपको इतना लाचार कर दिया कि अपनी आंखो के सामने बेटियों की इज्जत लुटती देखती रहीं ? कैसे एक पुलिस वाला बेटी पर हाथ उठा देता है और आपके बेटे देखते रहते हैं। राक्षसों के चलते बेटियों को फांसी का फंदा लगाने को मजबूर होना पड़ता है। अब अपनी दिल्ली भावुक हो गई, उसकी आंखें भर आईं। दीवार की ओर इशारा किया कि इन लोगों की वजह से न सिर्फ मैं कमजोर हुई, बल्कि अपंग भी हो गई हूं। दीवार पर मैने नजर दौड़ाई तो वहां मनमोहन सिंह और यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी की तस्वीर लगी हुई थी। मैने कहा मनमोहन सिंह ! इनकी वजह से भला क्यों ? दिल्ली बोली अगर आज इनकी जगह कोई और प्रधानमंत्री होता तो मैं इतना कमजोर कभी नहीं होती। मेरी इस हालत के लिए यही जिम्मेदार हैं, इनकी वजह से ही मेरी ये हालत हुई है। आज कोई सख्त आदमी पीएम होता तो क्या मुझे अहमदाबाद इतनी बातें सुनाकर यहां से चला जाता। लखनऊ, कोलकाता और भोपाल की हैसियत होती कि मेरी ओर आंख उठाकर देखे। आपको याद है ना कि मैने पटना की क्या हैसियत बनाकर रखी थी, लालू पूरे दिन मैडम दिल्ली, मैडम दिल्ली की रट लगाए रखता था, आज पटना की ये हैसियत हो गई कि वो मुझे आंखे तरेरता है। आखिर इसकी वजह तो यही मनमोहन सिंह ही है ना। मुझे भी लगा कि बात तो कुछ हद तक सही ही है। मैने पूछा खैर मनमोहन तो चलिए मान लेते हैं, पर सोनिया क्यों ? दिल्ली बोली मनमोहन की क्या हैसियत है, उसके पीछे ताकत तो उन्हीं की है।

हां ये बात तो बिल्कुल सही है। सिसकियां लेते हुए दिल्ली बोली कि ये दिन मै पहली बार देख रही हूं कि सिर्फ दो आदमी की वजह से एक आदमी कितने दिनों से मेरे सिर पर बैठा हुआ है और मैं लाचार हूं, कुछ नहीं कर पा रही हूं। दो आदमी की बात मैं समझ नहीं पाया, दिल्ली बोली सोनिया और सीबीआई। इनमें से एक भी मनमोहन का साथ छोड़ दे तो इनकी सरकार उसी दिन गिर जाएगी। दिल्ली की ये खरी-खरी बातें सुनकर मैं हैरान था। मैने सोचा कि विपक्ष अगर सरकार की आलोचना करता है तो बात समझ में आती है, लेकिन यहां तो खुद दिल्ली खून के आंसू रो रही है, आखिर दिल्ली को सरकार से इतनी शिकायत क्यों है ? कुछ इधर उधर की बातें करने के बाद मैने दिल्ली से पूछ ही लिया कि आखिर आपको सरकार से इतनी शिकायत क्यों है ? वो बोली आप शिकायत की बात कर रहे हैं, मेरा बस चले तो मैं इन सभी को दिल्ली से बेदखल कर दूं। इस सरकार में कई तो ऐसे हैं जिन्हें अगर सूली पर भी चढ़ा दिया जाए तो कम से कम मुझे तो कोई तकलीफ नहीं होने वाली है। दिल्ली की बातें सुनकर मैं फक्क पड़ गया। मैं समझ नहीं पा रहा था कि आखिर एक शहर अपने ही रहनुमाओं को सूली पर लटकाने तक की बात क्यों कह रहा है।

बातों का सिलसिला आगे बढ़ा तो मुझे भी लगा कि इन्हें कितनी भी सजा दे दो, वो कम है। कामनवेल्थ गेम में चोरी इन नेताओं ने की, बदनामीं दिल्ली की हुई, टूजी आवंटन में बदमाशी नेताओं ने की, बदमानी दिल्ली की हुई, कोल ब्लाक आवंटन में सबको पता है कि कौन-कौन शामिल है, लेकिन बदनामी दिल्ली के हिस्से आई। आदर्श सोसाइटी में घपलेबाजी में आरोप लगा कि दिल्ली ने लापरवाही बरती, कमजोर बिल्डिंग गिर गई, तमाम लोगों की मौत हुई, जिम्मेदार यहां के नेता और अफसर थे, लेकिन बदनामी दिल्ली के हिस्से में आई। इस सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लग रहे हैं, सरकार बुरी तरह फंसी हुई है, पर चर्चा दिल्ली की हो रही है। काफी देर बातचीत के बाद दिल्ली ने एक सवाल मुझसे पूछा, कहा कि आप तो जर्नलिस्ट हैं, आपको पता है कि किस नेता कि कितनी हैसियत है, फिर भी सोनिया गांधी मनमोहन सिंह को आखिर प्रधानमंत्री क्यों बनाए हुए हैं। दिल्ली ने कहाकि मनमोहन ऐसे नेता हैं कि किसी को चुनाव जिता नहीं सकते, खुद चुनाव जीत नहीं सकते, उनकी आर्थिक नीतियां भी ऐसी नहीं है कि देश तरक्की कर रहा हो, फिर सोनिया की आखिर ऐसी क्या मजबूरी है कि अपनी और पार्टी की साख को उन्होंने दांव पर लगा रखा है ? सच में दिल्ली ने मुझसे महत्वपूर्ण सवाल पूछा, इसका जवाब मुझे पता था, लेकिन मैं टालता रहा। मैने दिल्ली से ही जानना चाहा कि उसे क्या लगता है, क्यों सोनिया गांधी ऐसा कर रही हैं। दिल्ली बोली सब अपने बेटे के लिए।

मैं समझ तो गया था, लेकिन मैने ऐसा नाटक किया जैसे मेरी समझ में नहीं आया कि दिल्ली क्या इशारा कर रही है। फिर दिल्ली ने मुझे और करीब आने को कहा। करीब गया तो उसने बताया कि अगर कांग्रेस के किसी मजबूत नेता को प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी दी जाती तो आगे चलकर पता नहीं वो राहुल के लिए कुर्सी छोड़ता या नहीं, लिहाजा बिना रीढ़ के ऐसे आदमी को ये कुर्सी सौंपी गई है, जिससे उनके बेटे को मुश्किल ना हो। मैं दिल्ली की हां में हां मिला रहा था तो उसे मुझ पर और भरोसा हो गया। उसने दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित और उनके बेटे संदीप दीक्षित की ऐसी बातें बताईं कि मेरे कान खड़े हो गए। बहरहाल बात लंबी हो जाएगी, इसलिए मैं सारी बातों की चर्चा नहीं कर रहा हूं, लेकिन दिल्ली की बात सुनकर साफ हो गया कि ये दोनों भी ईमानदार नहीं है। संदीप को क्या कहा जाए, गुडिया के साथ हुए अमानवीय कृत्य पर वो दिल्ली के पुलिस कमिश्नर नीरज कुमार का इस्तीफा तो मांग रहे हैं, लेकिन अपनी मुख्यमंत्री मां शीला दीक्षित के मामले में उनकी जुबान नहीं खुल रही है। दिल्ली बोली कि इसका ये मतलब नहीं कि मैं पुलिस कमिश्नर के काम से संतुष्ट हूं, सच तो ये है कि उन पर कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी है, पर वो इसके काबिल ही नहीं हैं। उनकी काबिलियत पर क्या कहूं, उनके आका, बोले तो गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे को ही दिल्ली में रहने का हक नहीं है। बहरहाल भ्रष्टाचार के मामले में भी दिल्ली की मुख्यमंत्री की भूमिका पर उंगली उठती रही है, लेकिन उनके सात खून माफ हैं, क्योंकि धब्बा तो दिल्ली पर लग रहा है ना, इसलिए उनसे भला क्या लेना देना।

दिल्ली ने आखिर में जो बात कही, वो सुनकर मै हैरान रह गया। दिल्ली ने कहाकि यहां की संसद का सिर्फ देश में ही नहीं दुनिया में सम्मान और गरिमा है। लेकिन दागदार खद्दरधारी जिनके खिलाफ बलात्कार के मामले न्यायालयों में विचाराधीन है। फिर भी वो दिल्ली आ जाते हैं। मैं इनका चेहरा देखती हूं तो कई बार सोचती हूं कि कोई जरूरी है कि देश की राजधानी मेरे यहां यानि दिल्ली में ही रहे और देश भर के लफंगे यहां आते रहें। दिल्ली ने कहाकि ऐसे तो तमाम लोगों पर आरोप हमेशा से ही लगते रहे हैं, लेकिन जब राज्यसभा के उपसभापति पर ऐसा आरोप लगा तो मैं हिल गई, ईश्वर से मनाती रही कि ये बात गलत हो, वरना ये दाग तो मैं कभी धो नहीं पाऊंगी। खैर आगे देखिए क्या सच सामने आता है। लेकिन दिल्ली एक चीज चाहती है, वो कहती है कि रामसिंह, मनोज और प्रदीप जैसे लोग तो बहुत कमजोर कड़ी हैं, मैं तो चाहती हूं कि बलात्कार के बड़े आरोपी यानि नेता, अफसर और बिजिनेस मैन को पहले रामलीला मैदान मे सरेआम सूली पर चढाया जाए। बलात्कारी कोई भी कांडा यानि कीड़ा जिंदा नहीं रहना चाहिए। सच कहूं तो उसी दिन मेरी आत्मा को शांति मिलेगी। तब मैं कहूंगी कि हां दिल्ली दिलवालों की है, आज तो दिल्ली दरिंदों की है।

 

Sunday, 30 December 2012

आप बताएं ! नायक या खलनायक ...


दिल्ली गैंगरेप पीड़ित बेटी की मौत ने देश को हिलाकर रख दिया है। इस पूरे घटनाक्रम को देखता हूं तो मुझे बलात्कारियों से कहीं ज्यादा गुस्सा देश की कमजोर सरकार से है। सोनिया गांधी महिला हैं, मैं उन पर सख्त टिप्पणी नहीं करना चाहता, लेकिन मुझे पक्का भरोसा है कि देश के बर्बादी की जब भी कभी कहानी लिखी जाएगी तो सोनिया गांधी का  नाम सबसे ऊपर  होगा। उन्होंने देश के प्रमुख पदों पर ऐसे कमजोर, गिजगिज, निरीह आदमी को बैठा दिया, जिससे देश की ऐसी तैसी हो जाए। प्रधानमंत्री बनाया मनमोहन सिंह को और गृहमंत्री बना दिया सुशील कुमार शिंदे को। अब ये दोनों कितने सक्षम है, देश की जनता जानती है। बहरहाल इन बदबूदार चेहरों की कल्पना मात्र से सिर शर्म से झुक जाता है पर ये चिकने घढ़े इस सब से बेपरवाह अपने राजनीतिक दाँव-पेचों से असल मुद्दों से जनता को भटकाने का खेल खेलते रहे हैं।

नाराणय दत्त तिवारी
आइये आज आपको मिलाते हैं कुछ ऐसे लोगों से जो हमारे बीच में ही हैं। ये देश की अगुवाई करते रहे हैं, इनके नाम के आगे हमें माननीय लगाने को मजबूर होना पड़ता है। ये ऐसे शख्स हैं जो होने वाले मुख्यमंत्री को शपथ दिलाते हैं। पहले इन्हीं की बात कर लें, नाम है नारायण दत्त तिवारी। इन्हें अगर हम रसिया तिवारी कहें तो गलत नहीं होगा। आंध्र प्रदेश का राज्यपाल रहते हुए इनका ऐसा वीडियो बाहर आया, जिससे पूरा देश सन्न रह गया। आपको  पता है इनकी उम्र 80 के पार हो चुकी है। हम सब जानते हैं कि उज्जवला शर्मा और उनके बेटे रोहित शर्मा को न्याय के लिए कानून का सहारा लेना पड़ा। आखिर में डीएनए टेस्ट के बाद ये साफ हो गया कि रोहित शेखर कांग्रेस के वयोवृद्ध नेता नारायण दत्त तिवारी का बेटा है। तिवारी की करतूतों पर देश भले शर्मिंदा हो, पर तिवारी शर्मिंदा होंगे, लगता नहीं है।

गोपाल कांडा
हरियाणा के पूर्वमंत्री गोपाल कांडा सत्ता के गलियारे का काफी रसूखदार शख्स है। आलीशान हवेलियों में शानो शौकत से रहने के आदी कांडा ने देश की बेटी गीतिका का जीना मुहाल कर दिया था। इसके व्यवहार से वो इतना परेशान हो गई थी कि इसके कंपनी की नौकरी छोड़कर चली गई। लेकिन इस हैवान ने उसे परेशान करना नहीं छोड़ा। हालत ये हो गई कि बेचारी गीतिका फांसी के फंदे पर झूल गई। हालाकि बेटी गीतिका ने जाते जाते एक सुसाइड नोट छोड़ दिया, जिससे इस काले करतूतों वाले मंत्री का असली चेहरा देश के सामने आ जाए। गोपाल कांडा का असली चेहरा सामने आया, उसे हरियाणा के मंत्रिमंडल से बाहर किया गया, बाद में वो जेल गया। लेकिन जेल में इसके लिए वीआईपी सुविधाएं उपलब्ध थीं। एक ओर देश बलात्कारियों के लिए फांसी मांग रहा है, वहीं देश के अफसर ऐसे लोगों को जेल में भी वीआईपी सुविधा देकर जी हजूरी करते रहते हैं।

चंद्र मोहन उर्फ चांद मोहम्मद
ये शख्स किसी पहचान को मोहताज नहीं है। हरियाणा के उप मुख्यमंत्री रहे हैं। लेकिन उप मुख्यमंत्री के तौर पर इन्होंने क्या काम किया, ये तो देश को नहीं पता। लेकिन शादी शुदा होते हुए भी दूसरी शादी करने के लिए धर्म परिवर्तन किया और चंद्र मोहन से बन गए चांद मोहम्मद। इन्होंने अपनी प्रेमिका अनुराधा बाली का भी धर्म परिवर्तन कराया और वो हो गई फिजा। दोनों ने शादी कर ली। मगर ये शादी ज्यादा दिन नहीं चली, महीने दो महीने में ही तलाक हो गया। शादी टूटने के बाद कुछ दिन तक तो अनुराधा उर्फ फिजा काफी आक्रामक रही। वो चंद्रमोहन और उसके परिवार को लगातार कठघरे में खड़ा करती रही। बाद मे ना जाने क्या हुआ कि फिजा का शव उसके घर में ही पंखे से लटका मिला। आज अनुराधा बाली उर्फ़ फिज़ा की संदिग्ध मौत ने राजनेताओं की चाल, चेहरा और चरित्र को बेपर्दा कर दिया ! अपनी हवस और मौजमस्ती के लिये ये नेता अपने माँ-बाप,भाई बहन , बीवी बच्चे और यहाँ तक कि दीन और इमान को भी छोडने में रति भर नही झिझके, तो सोचिये कि किस तरह के शासन/प्रशासन की हम इनसे उम्मीद लगाए बैठे हैं ?

अमर मणि त्रिपाठी
उत्तर प्रदेश के बड़े और ताकतवर नेताओं में अमरमणि त्रिपाठी का नाम भी शुमार है। कवियित्री मधुमिता शुक्ला की हत्या में अमरमणि और उनकी पत्नी दोनों आरोपी हैं। कोर्ट ने दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इस मामले की जांच सीबीआई ने की थी और जांच में यह बात सामने आई कि हत्या के वक्त मधुमिता गर्भवती थी और अमरमणि के इशारे पर ही उनके गुर्गे पांडेय और राय उसके घर जाकर मधुमिता को गोली मारी थी। सुनवाई के दौरान सीबीआई ने जो तथ्य अदालत में रखे थे, कोर्ट ने उससे सहमति जताई थी। इसी आधार पर कोर्ट ने अमरमणि उनकी पत्नी और उनके दो गुर्गों कुल मिलाकर चार लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। तत्कालीन सरकार में मंत्री रहे अमरमणि त्रिपाठी से मधुमिता के काफी करीबी रिश्ते थे। बताया जाता है कि मधुमिता मां बनने वाली है यह बात जैसे ही अमरमणि को पता चली उसने अपनी पत्नी संग मिलकर उसकी हत्या करवा दी। क्योंकि मधुमिता को अमरमणि के काले कारनामों का पता था, उसने धमकी दी थी कि अगर वो उनसे शादी नहीं करते तो उनके सारे राज उगल देगी। जिसके बाद मधुमिता को खतरनाक मौत मिल गयी।

स्वामी नित्यानंद
खद्दरधारी नेताओं पर तो बलात्कार के आरोप काफी समय से लगते रहे हैं, लेकिन बलात्कार के मामले में भगवाधारी भी पीछे नहीं रहे हैं। इसमें स्वामी नित्यानंद की तो बकायदा सीडी बाहर आ गई थी, जिसमें वो एक अभिनेत्री के साथ अश्लील हरकत करते हुए कैमरे में कैद हो गए थे। इस सीड़ी के बाद काफी बवाल मचा था, उनके खिलाफ हजारों लोग गुस्से में सड़कों पर निकल आए, जगह जगह उनका पुतला  फूंका जाने लगा। उनके आश्रम में छापे पड़े, लेकिन स्वामी नित्यानंद भूमिगत हो गए थे। वैसे नित्यानंद पर महिलाओं के साथ अश्लीलता का आरोप कोई नया नहीं है। उन पर अमेरिकी महिला के साथ पांच साल पहले उसका यौन शोषण करने का आरोप लगा था। इस आरोप से भी जनता भड़क गयी थी और कन्नड़ संगठनों ने प्रदर्शन भी किया था। नित्‍यानंद उस अमेरिकी महिला से कहते थे कि हम भगवान है तुम भगवान के साथ सेक्‍स कर रही हो, यह पाप नहीं है। तुमको स्‍वर्ग प्राप्‍त होगा। हम शंकर है तुम मेरी पार्वती। वाह रे स्वामी जी...


एसपीएस राठौर
सीनियर आईपीएस अफसर एसपीएस राठौर हरियाणा के पूर्व डीजीपी रहे हैं। इन पर जिस तरह का आरोप लगा है, अगर मजबूत कानून होता तो हो सकता  है कि अब तक ये वाकई सजा पा चुके होते।  एक नाबालिग लड़की रुचिका इनके उत्पीड़न से इतना परेशान हो गई कि उसे आत्महत्या करने को मजबूर होना पड़ गया। आरोप तो यहां तक है कि राठौर हमेशा पुलिस के रौब में रहे, यही वजह है कि उनके इशारे पर रुचिका के भाई को भी कई बार थाने पर बुलाकर प्रताड़ित किया जाता रहा है। रुचिका के भाई आशु ने आरोप लगाया था कि छेड़छाड़ मामले के बाद राठौड़ के इशारे पर उसके खिलाफ वाहन चोरी का झूठा मुकदमा दर्ज किया गया और हरियाणा पुलिस ने उसे प्रताड़ित किया। राठौर उस समय आईजी रैंक का आधिकारी था। इस मामले में सीबीआई की भूमिका पर भी उंगली उठी। मामले की जांच सीबीआई को ही सौंपी गई थी, लगभग सभी आरोपों में सीबीआई ने रटारटाया जवाब दिया कि जो आरोप  लगाए गए हैं, उनका कोई साक्ष्य नहीं मिला। वो तो भला हो रुचिका की सहेली और उसके परिवार का जो बगैर डरे, इस मामले  में लड़ते रहे, जिससे कुछ दिन के लिए ही सही कम से कम राठौर को जेल की हवा तो खानी पड़ी, वैसे तो राठौर पर कोई असर नहीं, वो तो कोर्ट में भी मुस्कुराता खड़ा रहता था।


स्वामी चिन्मयानंद
नित्यानंद का तो वीडियो मार्केट में आ गया था, लेकिन स्वामी चिन्मयानंद का मामला बिल्कुल अलग है। यहां तो स्वामी की शिष्या ने ही बकायदा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। रिपोर्ट में स्वामी पर बलात्कार, अपहरण और गला दबाकर जान से मारने की बात कही गई है। अब इन स्वामी को भी जान लें, ये स्वामी कोई और नहीं बल्कि बीजेपी नेता, पूर्व गृह राज्यमंत्री स्वामी चिन्मयानंद हैं। इन पर गंभीर आरोप लगाने वाली इनकी ही शिष्या है, जिनका नाम है साध्वी चिदर्पिता। साध्वी बनने से पहले इनका नाम कोमल गुप्ता था। कोमल की बचपन से ही ईश्वर में अटूट आस्था थी। ये मां के साथ लगभग हर शाम मंदिर जाती थी। इसी बीच मां की सहेली ने हरिद्वार में भागवत कथा का आयोजन किया और इन्हें भी वहां मां के साथ जाने का अवसर मिला। उसी समय कोमल गुप्ता का स्वामी चिन्मयानन्द से परिचय हुआ। स्वामी जी उस समय जौनपुर से सांसद थे। तब कोमल की उम्र लगभग बीस वर्ष थी। स्वामी को ना जाने कोमल में क्या बात नजर आया कि वे कोमल को संन्यास के लिये मानसिक रूप से तैयार करने लगे। मैं कह नहीं सकता कि कोमल नासमझ थी या वो सन्यास लेकर नई दुनिया में खो जाना चाहती थी। बहरहाल कुछ भी हो कोमल ने स्वामी की बातों में हामी भरी और सन्यास के लिए राजी हो गई। स्वामी चिन्मयानंद ने कोमल को दीक्षा देने के साथ ही उसका नाम बदल कर साध्वी चितर्पिता कर दिया। दीक्षा के बाद साध्वी का नया ठिकाना बना शाहजहांपुर का मुमुक्ष आश्रम। चिन्मयानंद ने साध्वी को दीक्षा तो दी पर उसके सन्यास की बात को टालते रहे। ऐसा क्यों, इस रहस्य से स्वामी और साध्वी ही पर्दा हटा सकते हैं, बहरहाल स्वामी चिन्मयानंद के खिलाफ बलात्कार का रिपोर्ट लिखाने के बाद कोमल ने एक पत्रकार से शादी कर ली और वैवाहिक जीवन में हैं।

शशिभूषण सुशील
शशिभूषण सुशील सामान्य व्यक्ति नहीं है, ये आईएएस अधिकारी हैं और उत्तर प्रदेश में तैनात हैं। इन अफसरों की जिम्मेदारी  होती है कि कानून की रक्षा कराएं और कानून तोड़ने वालों को सजा दिलाएं। लेकिन इस अफसर ने तो मर्यादा की सारी सीमाएं ही तोड़ दीं। यूपी में तकनीकी शिक्षा विभाग में विशेष सचिव के पद पर तैनात वर्ष 2001 बैच के आईएएस अधिकारी शशिभूषण सुशील के खिलाफ एक युवती की शिकायत पर भारतीय दंड विधान की धारा 354, 376, 506 और 511 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। पीडित लडकी के साथ ही सफर कर रही उसकी मां द्वारा दर्ज करायी गयी रिपोर्ट के मुताबिक भूषण गाजियाबाद स्टेशन से लखनऊ मेल ट्रेन के एसी सेकेंड डिब्बे में सवार हुए। आरोप है कि सूचना-प्रौद्योगिकी क्षेत्र में काम करने वाली महिला की मां जब शौचालय गयी तो भूषण ने अकेली पाकर उस युवती से बलात्कार की कोशिश की, इसकी शिकायत ट्रेन में तैनात सुरक्षा जवानों तथा कंडक्टर से भी की गयी। ट्रेन के लखनऊ पहुंचने पर राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) ने भूषण से करीब चार घंटे तक पूछताछ की और फिर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। उन्हें बाद में स्थानीय रेलवे अदालत में पेश किया गया जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। सबसे ज्यादा शर्मनाक  बात तो ये रही कि इस आरोपी आईएएस  को बचाने के लिए यूपी के दर्जनो आईएएस स्टेशन पहुंच गए। इसके बाद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव आरोपी को बचाने के लिए स्टेशन गए आईएएस की रिपोर्ट मांगी तो सब बगले झांकने लगे।

महिपाल मदेरणा
राजस्थान के पूर्वमंत्री महिपाल मदेरणा का नाम भी उनके काम की वजह से लोग नहीं जानते, बल्कि उनका नाम भी भंवरी देवी हत्याकांड के बाद चर्चा में आया। मॉडल से नर्स बनी भंवरी देवी के हत्‍याकांड ने पूरे देश की राजनीति को हिला कर रख दिया था। पहले सेक्‍स फिर ब्‍लू फिल्‍म की सीडी बनाकर ब्‍लैकमेल करने की बात को लेकर भंवरी देवी की हत्‍या कर दी गई। कहा जा रहा  है कि उसके शव को चूना बनाने वाले भट्ठे में फेंक दिया गया था। भंवरी देवी के लापता होने के बाद जब इसकी जांच शुरु हुई तो परत दर परत सारे मामले सामने आ गये। पुलिस की छानबीन के बाद मामला सीबीआई को सौंपा गया। सीबीआई ने इस मामले में राजस्‍थान के जल संस्‍थान मंत्री महिपाल मदेरणा और कांग्रेस विधायक मलखान सिंह को गिरफ्तार किया। सीबीआई ने जब भंवरी के बैंक एकाउंट को खंगला तो उसके होश उड़ गये। भंवरी देवी के बैंक लॉकर से सैकड़ों सीडियां बरामद हुई जिसमें राजस्‍थान के बड़े नेता और अधिकारियों के आपत्तिजनक फिल्‍म थे। इतना ही नहीं राजस्‍थान के बड़े नेताओं के साथ भंवरी देवी विदेश यात्रा पर भी जा चुकी थी। मगर भंवरी का अंजाम क्‍या हुआ यह पूरा देश जानता है । सीबीआई के ह‍त्‍थे चढ़े भाड़े के अपराधियों ने कबूला कि मदेरणा और मलखान के कहने पर ही उन लोगों ने भंवरी की हत्‍या की थी।


रवींद्र  प्रधान
मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय की प्रवक्ता कविता रानी बुलंदशहर स्थित घंसुरपुर गांव में दीवाली की छुट्टी बिताकर 23 अक्टूबर 2006 को मेरठ के लिए रवाना हुई थी, लेकिन वह इंदिरा गांधी वर्किंग विमिन हॉस्टल नहीं पहुंची। उसका मोबाइल फोन भी स्विच ऑफ हो गया था। इस संबंध में कविता रानी के भाई सतीश ने हॉस्टल पहुंचकर पता किया तो उसके कमरे के दरवाजे पर ताला लगा था। सतीश ने 31 अक्टूबर 2006 को बुलंदशहर स्थित स्याना कोतवाली में कविता की गुमशुदगी दर्ज कराई थी। बाद में स्याना पुलिस ने मामला मेरठ पुलिस के पास स्थानांतरित कर दिया। पुलिस ने मेरठ स्थित हॉस्टल में कविता के कमरे का ताला उसके भाई सतीश की मौजूदगी में तोड़ा। जहां धमकी भरे लेटर और एक डायरी मिली। जिसमें कुछ राजनेताओं के नाम और नंबर थे। पुलिस ने रवींद्र प्रधान, सुलतान, योगेश, अशोक और रवींद्र को गिरफ्तार किया। इनकी गिरफ्तारी के बाद कुछ राजनेताओं के नाम भी उछले। जिसकी वजह से राजनीतिक हलकों में हड़कंप मच गया था। 10 जनवरी 2007 को केस सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया गया। सीबीआई ने रवींद्र प्रधान, सुलतान, योगेश,अशोक और रविन्द्र के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में पेश कर दी। केस की सुनवाई के दौरान 29 मई 2008 को डासना जेल में रवींद्र प्रधान की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। गिरफ्तारी के बाद आरोपी सुलतान ने पुलिस और सीबीआई के सामने कविता की हत्या करने का जुर्म कबूल किया। शव को गाजियाबाद स्थित नहर में फेंकने की बाद बताई थी। पुलिस ने कविता का शव बरामद करने के लिए नहर में कई दिनों तक छानबीन की थी। मगर शव बरामद नहीं हुआ था। ( तस्वीर उपलब्ध नहीं )

आनंद सेन
फैजाबाद में कानून की छात्रा शशि भी एक मंत्री आनंद सेन के प्रेम के चंगुल में फंस गयी थी। जिसका खामियाजा भी शशि को अपनी दर्दनाक मौत से चुकाना पड़ा। 22 अक्टूबर 2007 को फैजाबाद में अपने घर से गायब हुई शशि के बारे में लंबी छानबीन के बाद पता चला कि उसकी हत्या कर दी गई है। शशि के पिता एक राजनीतिक कार्यकर्ता थे। राजनीतिक पृष्ठभूमि के परिवार की तेज तर्रार शशि की आंखों में विधानसभा से चुनाव लड़कर विधायक बनने का सपना था, और इस सपने को साकार करने का सपना शशि को दिखाया खुद आनंद सेन ने। इसी सपने के जरिए शशि आनंद सेन के करीब होती चली गई। नतीजा ये हुआ उसकी दर्दनाक मौत हो गई। फिलहाल आनंद सेन को सजा हुई और वह जमानत पर बाहर भी निकल आये हैं मगर आजतक शशि का शव तक बरामद नहीं हो सका।

सुशील शर्मा
नैना साहनी केस ने पूरे देश को हिला कर रख दिया था। हालांकि यह मामला राजनीति से ज्‍यादा जुड़ा हुआ नहीं था मगर नैना का मित्र सुशील दिल्ली प्रदेश युवक कांग्रेस का अध्यक्ष था। घटना वर्ष 1995 की है। सुशील ने नैना की हत्‍या कर दी और उसके शव के टुकड़े-टुकड़े कर डाले। उसके बाद सुशील ने नैना के शव के टुकड़ों को तंदूर में डालकर जला दिया। फिलहाल इस मामले में सुशील को सजा हो चुकी है।

ये तो सिर्फ चुनिंदा घटनाएं हैं। इन घटनाओं से साफ है कि सत्‍ता से नजदीकियां रखने वाली महिलाओं का अंजाम हमेशा बुरा ही हुआ है। पिछले कुछ सालों में जिन महिलाओं की कहानियां सामने आईं हैं वो सत्‍ता और राजनेताओं के करीब तो रहीं मगर उनका अंजाम काफी बुरा हुआ। यहां तक की इन दरिंदे राजनेताओं ने उन्‍हें अपनी जिंदगी से ही हाथ धोने को मजबूर कर दिया। कुछ मामलों में अदालत ने नेताओं को सजा सुनाई तो कुछ पर मुकदमा अभी जारी है। कुछ की तो अभी पुलिसिया जांच चल रही है। दिल्ली गैंगरेप के बाद देश भर में गुस्सा है। बलात्कारियों को फांसी की बात की जा रही है। मेरा भी मानना है कि इन्हें वाकई सख्त सजा होनी चाहिए, लेकिन मैं इस मत का हूं कि अगर कानून पहले से सख्त होता तो ये लोग भी बच नहीं पाते। इन सबको सजा होती तो आज लोगों की हिम्मत ना होती कि वो देश की बेटी के साथ ऐसा सुलूक करते। बहरहाल अब एक उम्मीद जगी है कि सख्त कानून बनेगा और देश की बेटियां सुरक्षित रहेंगी।