कांग्रेस अध्यक्ष खुद या उनकी टीम कितनी भी सफाई दे दे, लेकिन उनके दामाद राबर्ट वाड्रा पर जो गंभीर आरोप लगे हैं, उससे चहरे पर कालिख तो पुत ही गई है। अब इसे कितना भी साफ कर लिया जाए, लेकिन इसका धब्बा आसानी से छूटने वाला नहीं है। अच्छा आज बुरी खबर सिर्फ कांग्रेस के लिए नहीं थी, बीजेपी के अध्यक्ष पर भी गंभीर आरोप लगे। सुबह न्यूज चैनलों पर बेचारे नीतिन गडकरी एक सिफारिसी पत्र को लेकर सफाई देते नजर आए, लेकिन शाम होते-होते सोनिया गांधी को भी अपने दामाद राबर्ट वाड्रा के बचाव में बयान जारी करना पड़ा। यूं कहें कि आज का दिन दोनों ही बड़ी पार्टियों के लिए ठीक नहीं था, तो गलत नहीं होगा। आपको एक शेर सुना दूं, तो आगे लेख को समझना आसान हो जाएगा।
महसूस होता है ये दौरे तबाही है।
शीशे की अदालत है पत्थर की गवाही है।
अब आप खुद सोचें जब आरोप सत्ताधारी पार्टी अध्यक्ष के दामाद पर हो तो भला कैसे कोई जांच हो सकती है। अच्छा मान लीजिए की जांच होती भी है, कौन माई का लाल ईमानदारी से इस पूरे मामले की जांच कर सकता है ? ओह ! बाकी बातें बाद में करेंगे, पहले ये तो जान लीजिए कि " दामाद जी " पर आरोप क्या है। हां आरोप लगाने वाले हैं सामाजिक कार्यकर्ता अरविंद केजरीवाल और उनके दो सहयोगी पिता पुत्र शांतिभूषण और प्रशांत भूषण। आरोप गंभीर है, इसलिए सावधानी से पढिएगा। रियल स्टेट की बड़ी कंपनी डीएलएफ ने राबर्ट को 65 करोड़ रुपये बिना ब्याज और बिना जमानत पर लोन दिया. अब हंसिएगा नहीं, इसी कंपनी से लोन लेकर राबर्ट ने उसी से यानि डीएलएफ से ही प्रापर्टी खरीद ली। आरोप ये भी है कि राबर्ट ने कई कंपनियां बनाईं, इस कंपनी में एक समय प्रियंका गांधी भी डारेक्टर थीं लेकिन बाद में वो यहां से हट गईं। आरोप लगाया गया है कि राबर्ट ने सिर्फ 50 लाख रुपये इन्वेस्टमेंट किया और उसके बाद डीएलएफ से 65 करोड़ रुपये ले लिए। ये सभी प्रापर्टी 2007 से 2010 के बीच खरीदी गई है। चलिए आप भी जान लीजिए कि ये प्रापर्टी है कहां कहां। ( ये अरविंद और प्रशात की जानकारी के आधार पर )
1. दिल्ली के साकेत में हिल्टन होटल में 50 फीसदी शेयर खरीदा ।
2. गुड़गांव में दस हजार वर्गफुट का मकान 89 लाख में खरीदा।
3. डीएलएफ मग्नोलिया में सात फ्लैट खरीदे 5.2 करोड़ में।
4. डीएलएफ कैपिटल ग्रीन्स में एक फ्लैट खरीदा पांच करोड़ में।
5. दिल्ली के ग्रेटर कैलाश में 1.2 करोड़ का एक फ्लैट खरीदा।
6. बीकानेर में 161 एकड़ जमीन खरीदी 1.02 करोड़ में डीएलएफ अर्लियास
7. छह और जमीनें खरीदीं बीकानेर में 2.43 करोड़ की.
8. मानेसर में जमीन खरीदी 15.38 करोड़ में.
9. पलवल में जमीन खरीदी 42 लाख रुपये की.
10. हयातपुर में दो जमीनें खरीदी गईं चार करोड़ में.
11. हसनपुर में 76 लाख की जमीन खरीदी गई.
12. हरियाणा के मेवात में 95 लाख की जमीन खरीदी गई.
13. 69 लाख में एक अन्य जमीन खरीदी गई.
इन आरोंपों के बाद टीम ने कहा कि अब सवाल उठता है कि अगर बिल्डर इस हद तक मदद कर रहा है तो आखिर उसको क्या फायदा हो रहा है ? इसका भी जवाब खुद इसी टीम ने दिया। कहा गया है कि इसके एवज में दिल्ली और हरियाणा की सरकार ने डीएलएफ को फायदा पहुंचाया है और औने पौने दाम में जमीने दी हैं। एक आम आदमी के तौर पर अगर आप पूरे मसले को देखें तो इसी नतीजे पर पहुंचेगे कि भाई दाल में कुछ तो काला जरूर है, वरना ये कैसे हो सकता है कि पहले कोई बिल्डर आप को कौड़ी के भाव प्रापर्टी दे और फिर कौड़ी भर दाम भी चुकाने के लिए इंट्रेस्ट फ्री लोन भी दे दे। मित्रों अगर आपके इलाके में कोई ऐसा बिल्डर हो तो मुझे जरूर बताइयेगा, मुझे भी फ्लैट चाहिए, कम दाम पर और बिना ब्याज के लोन से।
इसीलिए मै कहता हूं कि बात तो सही है कि एक बिल्डर आखिर राबर्ड पर इतना मेहरबान क्यों है? इसका जवाब पहले तो खुद राबर्ट को देना चाहिए, क्योंकि आरोप सीधे उन्हीं पर है। अगर ये मान लिया जाए कि राबर्ट इसलिए निशाने पर हैं क्योंकि वो सोनिया गांधी के दामाद है, तो सोनिया जी को ही कैमरे के सामने आना चाहिए और हर मुद्दे पर साफ साफ बात करनी चाहिए। खैर दामाद पर आरोप लगने से आज कांग्रेस खेमें में हड़कंप मच गया। आमतौर पर टीवी की बहस से नेता पीछा छुड़ाते हैं, वो सामने आना ही नहीं चाहते। लेकिन आज तो गजब हो गया। कांग्रेस के जिस नेता के यहां भी मीडिया से फोन गया, सब ने बिना ना नुकुर किए बहस में शामिल होने के लिए हां किया। जबकि आप सब जानते हैं वाड्रा राजनीति में नहीं है, लेकिन उनके बचाव में पूरी पार्टी कदमताल करती नजर आई।
बहरहाल सोनिया जी मुझे पता है कि आपको मेरे सलाह की कोई जरूरत नहीं है। आपके पास तो सलाहकारों की पूरी टीम है। फिर मैं कहना चाहता हूं कि आप पार्टी और परिवार दोनों की मुखिया हैं। पार्टी में एक के बाद एक कई नेताओं के भ्रष्टाचार का खुलासा हो चुका है, इससे पार्टी की काफी छीछालेदर हुई है। प्लीज परिवार को बचा लीजिए, इस मामले में या तो हमेशा की तरह खामोश रहिएगा या फिर सही बात जनता के सामने रखिएगा। अगर आंख मूंद कर आप दामाद के साथ खड़ी हुई तो वाकई मुश्किल होगी।
वैसे कम तो गडकरी भी नहीं
वैसे आज सुबह कांग्रेस फ्रंट फुट पर खेल रही थी। कांग्रेस आफिस में रहने वाले हाई फाई नेता राष्ट्रीय महासचिव जनार्दन व्दिवेदी ने बीजेपी अध्यक्ष नीतिन गडकरी को कटघरे में खड़ा किया। वैसे सच ये है कि नीतिन गडकरी का मामला भी कम गंभीर नही है। एक ओर तो बीजेपी समेत तमाम राजनीतिक दल महाराष्ट्र में सिचाई घोटाले को लेकर बड़ी बड़ी बातें कर रहे हैं, लेकिन पर्दे के पीछे कुछ अलग ही खेल चल रहा है। यानि अपनी कमीज सफेद बताने वाले नेता विवादित ठेकेदारों के पैसे का भुगतान कराने के लिए सरकार पर दबाव बना रहे थे। इसके लिए बकायदा उन्होंने सरकार को चिट्ठी तक लिखी है। कांग्रेस ने आज वही चिट्ठी सार्वजनिक कर बीजेपी अध्यक्ष को घेरने की कोशिश की।
गड़करी के मामले को समझने के लिए थोडा आपको पीछे चलना होगा। आपको मालूम होगा कि विदर्भ में तमाम किसान आत्महत्या कर चुके हैं। आत्महत्या की एक वजह ये भी बताई जा रही है कि पैसा खर्च होने के बाद भी किसानों के खेतों तक पानी नहीं पहुंचा। यानि इन बांधो और नहर का कोई फायदा नहीं किसानों को नहीं हुआ। इससे सरकार ने विवादित ठेकेदारों का भुगतान रोक दिया। अब बीजेपी अध्यक्ष को वैसे तो किसानों की मुश्किलों को सबसे ऊपर रखना चाहिए था, क्योंकि वहां किसान लगातार आत्महत्या कर रहे थे। लेकिन नीतिन गडकरी को विवादित ठेकेदारों के भुगतान की फिक्र ज्यादा सता रही थी, लिहाजा इसके लिए वो पत्र लिखकर सरकार पर दबाव बना रहे थे। दिलचस्प बात यह है कि इस हेरा-फेरी में एनसीपी, बीजेपी और कांग्रेस तीनों पार्टियां मिली हुई हुई हैं। अगर ठेका पाने वालों में बीजेपी और कांग्रेस के लोग थे तो ठेका देने वालों में एनसीपी के मंत्री शामिल थे। ठेका हासिल करने वालों में नितिन गडकरी के करीबी और राज्यसभा सांसद अजय संचेती का नाम प्रमुख है।
बहरहाल नीतिन गडकरी के मामले की सच्चाई क्या है यो तो वही जानें, लेकिन एक बड़ी पार्टी के अध्यक्ष के तौर पर अगर उनकी चिट्ठी को देखा जाए तो मुझे लगता है कि उन्होने छोटा काम किया। बीजेपी को अपने चाल चरित्र और चेहरे पर बहुत गर्व है। पार्टी नेता इस पर बहुत जोर दिया करते हैं, लेकिन मैं कह सकता हूं कि नीतिन गडकरी के अध्यक्ष बनने के बाद पार्टी का चाल, चरित्र और चेहरा सब दागदार हो गया है। ऐसे में उन्हें अध्यक्ष का दूसरा कार्यकाल देना मेरी समझ से तो परे है। हो सकता है कि इस पर अब पार्टी दोबारा विचार करे। वैसे भी गडकरी का कद इस पद के लायक ना पहले रहा है और ना आज है।
बात अरविंद टीम की भी...
मुझे लगता है कि सोनिया गांधी के दामाद का नाम लेकर अरविंद केजरीवाल ने एक बड़ी राजनीतिक भूल की है। या यूं कहें कि उन्होंने बर्रे की छत्ते में हाथ डाल दिया है। आप सब जानते हैं कि इस टीम में कुछ लोगों के एनजीओ हैं, जिन्हें विदेशी मदद मिलती है। आंदोलन के दौरान भी आरोप लगा था कि सामाजिक कार्यों के लिए ये लोग बाहर से पैसा लेकर देश में आराजकता फैला रहे हैं। कांग्रेसी इस मामले में खामोश बैठ जाएंगे, मुझे तो ऐसा कत्तई नहीं लगता, इसलिए चुनौतियों के लिए तैयार रहना होगा टीम अरविंद को भी।