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Saturday, 25 May 2013

IPL ने क्रिकेट को " कोठा " बनाया !


क्या कहूं, एक हफ्ते से देश की सारी समस्याएं पीछे छूट गई हैं, हर तरफ सिर्फ एक ही चर्चा है, वो है क्रिकेट की। अच्छा क्रिकेट की भी चर्चा हो तो एक बार ठीक है, लेकिन यहां चर्चा हो रही है आईपीएल 6 की, वैसे इसकी चर्चा में भी कोई बुराई नहीं है। पर अब इस चर्चा में खेल कहीं शामिल ही नहीं है। आईपीएल का आँरेंज और पर्पल कैप किसके पास है और अभी इस कैप के लिए किसकी चुनौती कारगर हो सकती है, इससे किसी को कोई लेना देना नहीं है। आपको पता होगा कि कम से कम 16-16 मैच तो सभी टीमों ने खेले ही हैं, इस दौरान खिलाड़ियों ने बहुत सी अच्छी बाल फैंकी है और बहुत शानदार शाट्स भी लगाए हैं। लेकिन किसी को इससे कुछ लेना-देना नहीं है। जानते हैं आज चर्चा क्या हो रही है ? चर्चा हो रही है क्रिकेट में सट्टेबाजी की, चर्चा हो रही है क्रिकेट में लड़कियों के इस्तेमाल की, चर्चा हो रही है मैंच के बाद रात में होने वाली रंगीन पार्टियों की, चर्चा हो रही है नो बाल फेंकने लिए कालगर्ल के इस्तेमाल की,  चर्चा हो रही है क्रिकेट में अंडरवर्ल्ड के कनेक्शन की। हालत ये है कि क्रिकेट की खबरें जो न्यूज चैनलों पर "खेल के बुलेटिन" में हुआ करती थीं, आज ये खबरें चैनलों के " क्राइम शो " में चल रही हैं। इस खेल में आज जितनी बात खेल और खिलाड़ियों की नहीं हो रही है, उससे कहीं ज्यादा बातें चीयर गर्ल, कालगर्ल, मांडल्स, अभिनेत्रियों और रात में होने वाली रंगीन पार्टियों में पांच से दस ग्राम कपड़े पहन कर खिलाडियों के इर्द-गिर्द मंडराने वाली लड़कियों की हो रही है। आसान शब्दों में कहूं तो सच्चाई ये है कि इस आईपीएल ने क्रिकेट को कोठा बना दिया है।

देखिए आपको अगर इस खेल में होने वाले "असली खेल" को समझना है तो थोड़ा सावधानी और धैर्य से इस पूरे लेख को आराम से पढ़ना होगा। वजह इसमें किरदार बहुत सारे हैं। कुछ किरदार ऐसे हैं, जिनके बारे में चर्चा करना जरूरी है। बगैर कोई भूमिका के सबसे पहले मैं   बीसीसीआई अध्यक्ष एन श्रीनिवासन की बात करता हूं। अध्यक्ष के साथ ही ये चेन्नई सुपर किंग के मालिक भी हैं। इन पर बहुत ही गंभीर आरोप हैं, लेकिन बीसीसीआई इतनी पावरफुल बाँडी है कि इनका कोई कुछ नहीं कर सकता। इनके दामाद टीम के सीईओ की हैसियत रखते थे। मुंबई पुलिस की जांच में पाया गया है कि ये खुद ही सट्टेबाजी भी करते थे और अपनी ही टीम की रणनीति अभिनेता बिंदू दारा सिंह के जरिए सट्टेबाजों से साझा करते थे। अब गिरफ्तार हो चुके हैं। दामाद गुरुनाथ मयप्पन के गिरफ्तार हो जाने के बाद नैतिकता के आधार पर श्रीनिवासन को अध्यक्ष पद से हट जाना चाहिए था, लेकिन वो अड़े हैं कि इस्तीफा नहीं दूंगा। आईपीएल में एक नियम है कि अगर कोई फ्रैंचाइजी अनैतिक कार्य में शामिल पाया जाता है तो उसकी टीम को ब्लैक लिस्टेड कर दिया जाएगा। अब जिस टीम का सीईओ सट्टेबाजी कर रहा है, उस टीम को क्यों नहीं अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए ? अब तक तो इस टीम को अयोग्य घोषित कर आईपीएल से बाहर कर दिया जाना चाहिए था।

मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि आखिर श्रीनिवासन की चमड़ी कितनी मोटी है। कुछ दिन पहले जब राजस्थान रायल्स के तीन खिलाड़ी श्रीसंत के साथ दो अन्य पकड़े गए, तब इसी बीसीसीआई ने फ्रैंचाइजी के मालिकों पर दबाव बनाया गया को वो खुद उनके खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराएं। राजस्थान रायल्स ने मजबूर होकर रिपोर्ट दर्ज कराया और उन खिलाड़ियों से करार भी तोड़ दिया। मेरा सवाल है श्रीनिवासन साहब आपने अपने दामाद के खिलाफ पुलिस में अभी तक रिपोर्ट क्यों नहीं दर्ज कराया ? आप फंस ना जाएं इसलिए अपने सट्टेबाज दामाद को अब ये बता रहे हैं कि वो तो सिर्फ टीम में एक मानद सदस्य है। उसका टीम प्रबंधन से कोई लेना देना नहीं है, वैसे एक बात तो आपने सही कहा कि उसका टीम से कोई लेना देना तो नहीं था, उसका लेना देना आईपीएल की आड़ में कालगर्ल और माडल्स को रिसार्ट में बुलाना था, सट्टेबाजी कराना था, दलाली का काम था। एक नजर में ये दामाद वाकई कितना घिनौना दिखाई दे रहा है।

वैसे तो ये उनके घर की बात है, इसका जिक्र नहीं होना चाहिए, लेकिन जब श्रीनिवासन का बेटा अश्विन खुलेआम अपने पिता पर गंभीर आरोप लगा रहा है तो दो लाइन की चर्चा मै भी कर लेता हूं। कहा जा रहा है बीसीसीआई अध्यक्ष अपने बेटे से इसलिए नाराज हैं, क्योंकि कि वो समलैंगिक है। यानि मर्दों के साथ सोता है। बेटे का आरोप है कि इससे नाराज उसके पिता ने उसे अपने गुर्गों से पिटवाया भी। लेकिन बेटा चीख-चीख कर कह रहा है कि यह उसका निजी मामला है, इस पर उसके पिता नाराज क्यों हैं? हालांकि अब श्रीनिवासन इसका क्या जवाब देगें। वैसे मुझे लगता है कि बाप जो कुछ जमा करता है वो अपने बेटों के लिए ही तो करता है। अब आईपीएल से इतनी चीयर गर्ल, कालगर्ल, माडल्स, अभिनेत्रियों के अलावा हजारों लड़कियां जुड़ी हैं और बेटा है कि वो मर्दों के साथ सो रहा है, गुस्सा आना तो स्वाभाविक है। खैर बाप, बेटे और दामाद का असली चेहरा सबके सामने है। बेहतर तो यही था कि श्रीनिवासन को खुद बीसीसीआई अध्यक्ष का पद छोड़कर अलग हो जाते। लेकिन ये इतना आसान नहीं है, अगर श्रीनिवासन और मनयप्पा जाते हैं तो उनकी टीम भी तो जाएगी। इसलिए मुझे तो लगता है कि श्रीनिवासन अंतिम दम तक कुर्सी नहीं छोड़ने वाले हैं।

अब बात क्रिकेट टीम के कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी की। धोनी आईपीएल में ही नहीं बल्कि भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान हैं और क्रिकेटप्रेमियों को उनसे बहुत प्यार है। हो भी क्यों ना ,धोनी की अगुवाई में टीम ने दो-दो वर्ल्ड कप जीते हैं। लेकिन सट्टेबाजी में उनकी ही टीम के तथाकथित सीईओ दामाद मनयपत्ता का नाम सामने आया है, जो धोनी के बहुत अच्छे मित्र हैं। कई दफा प्लेइंग 11 तय करने में या फिर टीम की रणनीति बनाने के दौरान भी ये दामाद मौजूद रहता है। ऐसे में आसानी समझा जा सकता है कि जो आदमी सट्टेबाजी में पैसा लगा रहा है तो वो पैसा डुबोने के लिए नहीं, बल्कि कमाने के लिए लगा रहा है। ऐसे में इस बात से कत्तई इनकार नहीं किया जा सकता कि वो टीम के भीतर की रणनीति भी सट्टेबाजों के साथ शेयर ना करता हो। धोनी की बात यहीं खत्म नहीं हो रही है। उनकी पत्नी साक्षी धोनी और बिंदू दारा सिंह की करीबी पर भी सवाल उठ रहे हैं। वैसे तो स्टेडियम के वीवीआईपी स्टैंड में आमंत्रित मेहमान यहां कहीं भी बैठकर मैच देख सकता है, लेकिन सट्टेबाजी में पुलिस के हत्थे चढ़े बिन्दुदारा सिंह ने कहा है कि उन्हें अपने पास बैठने के लिए साक्षी ने खुद बुलाया था। बिंदु सट्टेबाजी कर रहा है और साक्षी धोनी की पत्नी है, जाहिर है कि उसे भी बहुत सी चीजें पता होंगी। अब साक्षी और बिंदु की मित्रता में सट्टेबाजी शामिल नहीं है, इसे भरोसे के साथ कैसे कहा जा सकता है। जाहिर हर आदमी यही कहेगा कि इसकी भी जांच होनी चाहिए। वैसे धोनी की पत्नी का नाम एक जगह और आया है। स्पाँट फिक्सिंग में गिरफ्तार श्रीसंत ने जिस लड़की को मंहगा फोन गिफ्ट किया है, वो लड़की कोई और नहीं बल्कि साक्षी की दोस्त है और उसकी श्रीसंत से मुलाकात भी साक्षी ने ही कराई थी। इसलिए इस साक्षी कनेक्शन को भी खंगालने की जरूरत है।

वैसे अब ये मामला पुलिस के हाथ में है, धीरे-धीरे सबकुछ खुलेगा ही। लेकिन मैं तो यही कहूंगा कि आईपीएल ने इस खेल की ऐसी तैसी कर दी। क्रिकेट की चर्चा अब खेल कम नंगई, टुच्चई, गाली देने, मारपीट, थप्पड़ मारने, रात रंगीली करने, मैच के पहले-मैच के बाद सेक्स, अर्धनग्न औरतों के साथ शराब पीकर चिपकने, सोने, सट्टा लगाने, मैच फिक्सिंग, गलत तरीकों से पैसा कमाने, ड्रग्स लेने, बार डांसरों से नाम जुड़ने जैसी कारगुजारियों के चलते ज्यादा चर्चा हो रही है। पुलिस की जांच में जो बात सामने आई है, उसे सुनकर हैरानी होती है, नो बाल फैंकने के लिए कैसे एक गेंदबाज लड़की की मांग कर रहा है। कह रहा है नो रिपीट, मतलब उसे आज नई चाहिए। क्या है ये ? श्रीनिवासन साहब और राजीव शुक्ला जी देश में ये कौन सा क्रिकेट आपने शुरू कर दिया है। बात पिछले सीजन की है आईपीएल की नंगई, टुच्चई की कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। दिल्ली के एक पांच सितारा होटल में आईपीएल की एक टीम के विदेशी खिलाड़ी ल्यूक ने दारु पी और फिर लगे एक एनआरआई महिला से चिपकने। उससे गंदी-गंदी हरकतें करने । जबरदस्ती बेडरुम में घूस गए और अश्लील हरकतें करने की कोशिश की। लड़की के दोस्त ने रोका तो उसे इतना पीटा कि वो बेचारा आईसीयू में पहुंच गया। मारपीट में ल्यूक को भी चोटें आईं। क्रिकेटर ल्यूक की गंदी हरकत से जो क्रिकेट शर्मसार हुआ, क्रिकेट के करोडो़ फैन्स आहत हुए उसे लेकर भी बीसीसीआई अध्यक्ष बिल्कुल चुप हैं। ठीक वैसे ही जैसे अपने बेटे के मर्दों के साथ सेक्स करने यानि समलैंगिक होने पर अपने पिता से हुए विवाद को सड़कों पर लाने पर चुप है।

अच्छा इतना कुछ हो जाने के बाद भी बेशर्मी की हद ये है कि आईपीएल या बीसीसीआई का कोई भी पदाधिकारी ये मांग नहीं कर रहा है कि आईपीएल से देश में क्रिकेट का फायदा कम बल्कि राष्ट्रीय चरित्र का नुकसान ज्यादा हो रहा है। बहुत ज्यादा गंदगी बढ़ती जा रही है। खिलाड़ियों में भी चरित्रहीनता बढ़ रही है। कहा तो ये भी जा रहा है कि बकायदा फ्रैंचाइजी और आयोजक ही जहां खिलाड़ी रुकते हैं, उसी होटल में लड़कियों के कमरे भी बुक करातें हैं। मसलन ऐसा नहीं है कि "कोठेबाजी" के इस धंधे के बारे में किसी को जानकारी नहीं है, बल्कि सच ये है कि यही लोग इस तरह की सुविधाएं मुहैय्या करा रहे हैं। स्व. दारासिंह का नाम हम सब कितने सम्मान से लेते हैं, अब जांच से ये बात सामने आई है कि उन्ही का बेटा बिंदु दारा सिंह भी खिलाड़ियों, सट्टेबाजों और धंधे से जुड़े अन्य लोगों को लड़की की सप्लाई करता रहा है। वैसे अब तो वाकई देश भी जानना चाहता है कि सभी क्रिकेटरों का असली चेहरा क्या है? दो चार लोग ही यहां निकम्मे हैं, या फिर ये गंदगी पूरी टीम में फैली हुई है।

इस खेल में अगर नेताओं और पुलिस की चर्चा न की जाए तो बात पूरी ही नहीं होगी। राजनीतिक दल के नेता आम जनता से जुड़े मुद्दे पर तो एक दूसरे पर कुत्तों की तरह भोंकते दिखाई देते हैं। उनके विरोध के तरीकों से तो लगता ही नहीं कि ये कभी आपस में मिलजुल  कर शांति से बैठते भी होंगे। लेकिन ये देखकर हैरान हो जाता हूं कि क्रिकेट के मुद्दे पर सब एक दूसरे का तलवा चाटने को तैयार रहते हैं। अब देखिए ना फिक्सिंग पर कानून बनाने की बात कहकर कैसे राजीव शुक्ला और अरुण जेटली एक दूसरे के कंधे पर हाथ डाले घूम रहे हैं। दरअसल क्रिकेट में तमाम नेताओं का इंट्रेस्ट जुड़ा हुआ है। मसलन कृषिमंत्री शरद पवार, रेलमंत्री सीपी जोशी, फारुख अब्दुल्ला, अरुण जेटली, राजीव शुक्ला, अनुराग सिंह समेत तमाम राजनेता क्रिकेट में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। ऐसा नहीं है कि ये सब कभी क्रिकेट खेलते रहे हैं, इनमें क्रिकेटर तो कोई नहीं है। हां सब चक्कर बस "मोटे माल" का है।

आखिर में चर्चा पुलिस की। दरअसल आईपीएल अब इंडियन पुलिस लीग में बदल गया है। मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि किसी भी इलाके में पुलिस की जानकारी के बगैर सट्टेबाजी हो ही नहीं सकती। पुलिस इन सबमें बराबर की भागीदार होती है। बल्कि जिस इलाके में सट्टेबाजी होती है, उस इलाके का थाना बहुत मंहगा होता है। यहां थानेदार की तैनाती के पैसे भी कुछ उसी हिसाब के होते हैं। मुझे तो पक्का यकीन है कि दिल्ली में बलात्कार की घटना के बाद जिस तरह से लोगों का गुस्सा पुलिस के खिलाफ था और लोग पुलिस कमिश्नर को हटाने की मांग कर रहे थे, बस जनता का ध्यान बांटने के लिए दिल्ली पुलिस ने ये तुरुप का चाल चला। सच कहूं तो दिल्ली पुलिस इस मामले में ज्यादा हाथ डालने वाली नहीं थी, उसने मुंबई से श्रीसंत को गिरफ्तार कर मीडिया का रुख मोड़ दिया था। उसका  मकसद पूरा हो गया था। आपको हैरानी होगी कि श्रीसंत को गिरफ्तार करने के बाद जब दिल्ली के पुलिस कमिश्नर मीडिया से मुखातिब थे, तो उन्होंने शातिराना अंदाज में ये बात कही भी कि आज आप लोग मेरा इस्तीफा नहीं मांग रहे हैं। मैं दिल्ली पुलिस से सवाल पूछना चाहता हूं कि अब वो किसे बचाने की कोशिश कर रही है कि अदालत को भी सही जानकारी नही दे रहे है, जिसकी वजह अदालत में उसे फटकार खानी पड़ी। ये जवाब तो दिल्ली पुलिस ही देगी।

बात मुंबई पुलिस की भी कर ली जाए। जब दिल्ली पुलिस ने श्रीसंत के साथ दो और खिलाड़ियों को मुंबई से गिरफ्तार कर लिया और मुंबई पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगने दी, इस बात से मुंबई पुलिस ने आंखे तरेरनी शुरू कर दी। उसे लगा कि दिल्ली ने उसके साथ विश्वासघात किया है। बात इतनी बिगड़ गई कि दोनों ने एक दूसरे का सहयोग करना ही बंद कर दिया। श्रीसंत मुंबई में जिस होटल में रुका था, वहां छापेमारी मुंबई पुलिस ने की और वहां से बरामद लैपटाप, फोन और अन्य सामान दिल्ली पुलिस के हवाले करने से ही इनकार कर दिया। अब मुंबई ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है, जिससे लोग मुंबई पुलिस पर उंगली ना उठा सकें। लोग ये ना कहें कि दूसरे राज्य की पुलिस मुंबई में अपराधियों को गिरफ्तार कर ले रही है और मुंबई पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है। अब कोई बेवकूफ ही होगा जो ये कहेगा कि मुंबई पुलिस का सट्टेबाजों से कोई लेना देना नहीं है। वैसे जब मामला एक है, आईपीएल में मैच फिक्सिंग, स्पाँट फिक्सिंग, सट्टेबाजी तो इसकी जांच अलग-अलग पुलिस को क्यों करना चाहिए ? सभी  मामले सीबीआई को सौंप दिए जाएं, वो जांच कर लेगी। लेकिन इसके लिए दिल्ली और मुंबई दोनों ही पुलिस तैयार नहीं होगी। मामला क्रिकेट में सट्टेबाजी का नहीं मामला "मोटेमाल" का भी तो है।






Friday, 17 May 2013

IPL बोले तो इंडियन पाप लीग !


 वैसे तो मेरा हमेशा से मानना है कि इंडियन प्रीमियर लीग यानि आईपीएल की बुनियाद ही चोरी, बेईमानी, भ्रष्टाचार, अश्लीलता पर टिकी हुई है, लेकिन इससे भला हमें या आपको क्या लेना देना। हम तो आज की भागमभाग जीवनचर्या से बिल्कुल थक गए हैं, इसीलिए इस छोटे फार्मेट का क्रिकेट मैंच पसंद करते हैं। ये मैच हमारी थकान को खत्म भले ना पाएं, लेकिन कम तो जरूर करता है। मैं तो इस टूर्नामेंट का ऐसा दीवाना हूं कि देर रात तक मैच तो देखता ही हूं, सुबह जल्दी उठकर अखबार का इंतजार भी करता हूं कि मैच की रिपोर्टिंग कैसे की गई है। मुंबई इंडियन हमारी फेवरिट टीम है, बुधवार की रात हुए एक नीरस मैच में उसने राजस्थान रायल्स को हराया और अंक तालिका में सबसे ऊपर पहुंच गई। ऐसे में थोड़ा शुकून महसूस किया और चैन की नींद सोया, लेकिन सुबह टीवी की एक खबर ने मैच का मजा किरकिरा कर दिया। खबर ये कि स्पाँट फिक्सिंग के मामले में पूर्व टेस्ट क्रिकेटर श्रीसंत समेत दो और खिलाड़ी पुलिस के हत्थे चढ़ गए।  हालांकि इस खबर से कोई हैरानी नहीं हुई क्योंकि क्रिकेट में अब स्पाँट फिक्सिंग कोई नई बात नहीं रह गई है। इसीलिए अगर आईपीएल को "इंडियन पाप लीग" कहा जाए तो मैं समझता हूं इसमें कुछ भी गलत नहीं है।

बहरहाल दिल्ली पुलिस के हत्थे चढ़े फिक्सर क्रिकेटर श्रीसंत, अंकित चह्वाण और अजित चंडिला को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने निलंबित कर दिया और ऐलान किया कि ये तीनों जांच पूरी होने तक निलंबित ही रहेंगे। वैसे बीसीसीआई के इस कदम से थोड़ी हैरानी हुई। मसलन उसने केवल तीन खिलाड़ियों को निलंबित कर इस पूरे मामले से अपना पल्ला झाड़ लिया। सफाई में रटारटाया बयान आया कि कुछ खिलाड़ियों की वजह से पूरे आईपीएल पर उंगली उठाना सही नहीं होगा। मेरा तो मानना है कि बीसीसीआई को और सख्त कदम उठाना चाहिए था, मसलन तीनों खिलाड़ी एक ही टीम यानि राजस्थान रायल्स से जुड़े हैं, ऐसे में क्यों नही राजस्थान रायल्स को इस टूर्नामेंट से बाहर किया गया ? पुरानी बात नहीं है, रेलमंत्री पवन कुमार बंसल का भांजा रेलवे में ट्रांसफर पोस्टिंग के लिए घूस लेते पकड़ा गया तो देश भर से मांग उठी कि नैतिकता के आधार पर रेलमंत्री को इस्तीफा देना चाहिए। ऐसे में नैतिकता का तकाजा तो यही है कि राजस्थान रायल्स को भी नैतिकता के आधार पर इस टूर्नामेंट में अयोग्य घोषित करते हुए बाहर का रास्ता दिखाना चाहिए। इसकी नैतिक जिम्मेदारी क्यों नहीं शिल्पा सेट्टी और उनके पति राज कुंद्रा को लेनी चाहिए ?

देश में आज क्रिकेट एक धर्म बन गया है, करोड़ों भारतीय आज क्रिकेट को अपना धर्म मानते हुए क्रिकेटरों को पूजने तक लगे हैं । आप देखिए ना सचिन तेंदुलकर को हम सब क्रिकेट का भगवान कहते हैं। ऐसे में अगर धर्म पर हमला हो तो भला इसे हम कैसे बर्दाश्त कर सकते हैं ? बहरहाल आज क्रिकेट में जितना पैसा इन्वाल्व है, हम आसानी से इसकी कल्पना तक नहीं कर सकते। छोटा सा उदाहरण ले लेते हैं, मैच के दौरान क्रिकेटर जो जर्सी पहनते हैं, उसका कोना-कोना बिका होता है। मतलब वो मैदान में जो जर्सी पहनते हैं, वो साधारण जर्सी भर नहीं है। इसमे दारू, बिल्डर, हवाई जहाज, फोन, जूते, कोल्ड ड्रिंक्स, बैंकिग भर ही नहीं कच्छा बनियान तक के विज्ञापन देखे जा सकते हैं। इसके बाद भी इन खिलाडि़यों में पैसे की भूख बनी हुई है। मैने देखा कि जब तीन खिलाडि़यों को आज पुलिस ने गिरफ्तार किया तो तमाम क्रिकेट प्रेमी हैरान थे, कुछ ने मुझे भी फोन किया और पूछा कि क्या ये सब सही है, या दिल्ली पुलिस अपने ऊपर लगे आरोपों से जनता का ध्यान बांटने के लिए साजिश कर रही है। अब ये सही है या गलत, ये तो जांच के बाद ही पता चलेगा, लेकिन मैं इस बात से आश्वस्त हूं कि दिल्ली पुलिस अपनी छवि सुधारने के लिए कम से कम ये काम तो नहीं ही कर सकती।

वैसे आईपीएल में गंदगी के लिए काफी हद तक फ्रैंचाइजी और हमारी मीडिया भी कम जिम्मेदार नहीं है। मीडिया में जिस तरह से इस आईपीएल की कवरेज हो रही है, मुझे लगता है कि ये ज्यादा नहीं बल्कि बहुत ज्यादा है। हैरानी तब होती है जब इन खिलाड़ियों के नीलामी के लिए बकायदा मंडी सजती है और मीडिया इनकी नीलामी को भी पूरे दिन बड़े ही शिद्दत से कवर करती है। अब गौतम गंभीर 12 करोड़ में बिके या फिर दो करोड़ में इससे भला आम आदमी को क्या लेना देना है ? लेकिन मीडिया ने आज हर खिलाड़ी की कीमत तक सार्वजनिक कर दी है। हमें पता है कि नीलामी में कुछ लोग खिलाड़ी के नाम पर कीमत लगाते हैं, कुछ खिलाड़ी के खेल के आधार पर कीमत लगाते हैं। ईमानदारी से देखा जाए तो हैदराबाद की टीम में एक दो को छोड़ दें तो कोई बड़ा चेहरा नहीं है, लेकिन टीम का प्रदर्शन शाहरुख खान की टीम केकेआर से कहीं बेहतर है। आज की तारीख में सचिन तेंदुलकर क्रिकेट में बहुत बड़ा नाम भर है, अगर उनका प्रदर्शन आईपीएल 6 में देखा जाए तो टाप 10 में भी वो कहीं नहीं टिकते। यहां तक कि अपनी टीम में ही उनका प्रदर्शन छठें सातवें नंबर पर भी नहीं है। लेकिन वो क्रिकेट के बड़े आदमी हैं, लिहाजा देश के सबसे बड़े उद्योगपति की टीम में वो शामिल रहेंगे ही, ये तो अंबानी बंधुओं के भी नाक का सवाल बन जाता है।

एक बहुत गंदा काम जो आईपीएल में हो रहा है, जिसके लिए सभी टीमों के फ्रैंचाइजी जिम्मेदार है, ये मसला आज भले नहीं लेकिन कल देश में एक बड़ा मुद्दा बनने वाला है। आपको याद होगा कि आईपीएल की शुरुआत में चीयर गर्ल्स को लेकर बहुत विवाद हुआ। कुछ राजनैतिक दलों के साथ ही सामाजिक संगठनों ने इनके डांस क्या इनकी मौजूदगी पर ही सवाल खड़े किए। लेकिन पैसे की ताकत के आगे किसी की एक नहीं चली और आज भी मैच के दौरान इन चीयर गर्ल्स का फूहड डांस बेरोक टोक जारी है। हमें याद है कि कुछ चीयर गर्ल्स शारीरिक शोषक का भी आरोप लगा चुकी हैं, फिर भी ये रास लीला बंद नहीं हुई। मैं आईपीएल कमिश्नर से एक सवाल पूछता हूं। चेन्नई में माहौल ठीक ना होने की वजह से श्रीलंका के खिलाड़़ियों को चेन्नई में खेलने से रोकने में किसी को कोई तकलीफ नहीं हुई, ना आईपीएल कमिश्नर को, ना बीसीसीआई को और ना ही टीम की फ्रैंचाइजी को। लेकिन तमाम विरोध के बाद भी 10 ग्राम कपड़ों में इन चीयर गर्ल्स के नाचने पर कहीं रोक नहीं लगाया गया। मतलब माहौल ठीक ना होने पर खिलाड़ी तो बाहर हो सकते हैं, पर ये चीयर गर्ल्स नहीं ! अब आईपीएल का सबसे बड़ा पाप बताऊं ? विदेशी खिलाड़ियों ने जान लिया कि ये तो क्लब मैच है, यहां मजे लो और रंगरेलिया मनाओ। देश की एक अपनी सभ्यता और संस्कृति है, लेकिन इन सबको हम ताक पर रखकर विदेशी खिलाडियों को यहां रंगरेलिया मनाने की सुविधा दे रहे हैं। हालत ये है कि दर्जनों विदेशी खिलाड़ी यहां अपनी पत्नी के बजाए "गर्ल फ्रैंड" यानि महिला मित्र को साथ लेकर भारत आए हैं और फ्रैंचाइजी उन्हें अय्याशी के लिए उचित सुविधा दे रहे हैं।

खैर बाकी बातें बाद में करेंगे, आज क्रिकेट के कलंक पर ही थोड़ी और चर्चा कर लें। हम सब जब टीवी के सामने होते हैं तो गेंदबाजी और बल्लेबाजी देखते हैं। हमने तो आज तक ये नहीं सोचा था कि क्रिकेटर अगर अपने गले में पहने लाकेट को बाहर करता है तो वो बुकी बोले तो दलाल को कुछ संदेश दे रहा है। अगर हाथ में पहने घड़ी को घुमाता है तो वो कोई इशारा कर रहा है। अगर अपनी जर्सी से मुंह पोछता है तो ये उसका कोड वर्ड है। अगर वो तौलिये के साथ गेंदबाजी करता है तो इसका मतलब कुछ है और तौलिया हटा देता है तो इसका मतलब कुछ और हो जाता है। इशारों में होने वाली बात का खुलासा आज दिल्ली पुलिस ने किया तो सच कहूं मैं तो दंग रह गया। मैदान में होने वाली इन हरकतों पर ये खिलाड़ी करोडों का वारा न्यारा करते हैं और हम सोचते हैं कि बेचारा कितना मेहनत कर रहा है कि पसीने-पसीने हो गया। जबकि वो पसीना बहाने का पैसा फ्रैंचाइजी से और पसीना पोछने का पैसा देश के बाहर बैठे दल्लों से वसूलता है।


दो बातें क्रिकेटर श्रीसंत की। केरल के क्रिकेट खिलाड़ी और तेज़ गेंदबाज़ श्रीसंत की गणना उन खिलाड़ियों में होती है जो हमेशा विवादों में रहता है। सच तो यही है कि अपने व्यवहार की वजह से ही वो भारतीय टीम से बाहर है। कहा जा रहा है कि उसके इसी गंदे व्यवहार के कारण ही कप्तान महेंद्र सिंह धोनी से संबंध बहुत मधुर नहीं है। श्रीसंत के गिरफ्तार होने के बाद उसके परिवार वालों ने धोनी और भज्जी पर आरोप लगाया कि इसके पीछे उनकी साजिश है। मुझे हैरानी ये जानकर भी हुई कि उसे खेल के मैदान में भज्जी ने थप्पड़ मारा भी या नहीं, ये थप्पड़ भी फिक्स बताया जा रहा है। श्रीसंत ने खुद ही एक ट्विट के जरिए अपने थप्पड़ पर विवाद खड़ा कर दिया। क्रिकेट प्रेमियों को याद होगा कि 2008 में एक आईपीएल मैच के दौरान हरभजन सिंह के कथित चाँटे के बाद वो कैमरे पर फूट-फूट कर रोता दिखाई दिया और बाद में उसने एक ट्विट करके कहा कि वो सब योजनाबद्ध था और उन्हें चाँटा मारा ही नहीं गया। बहरहाल श्रीसंत तो हमेशा विवादित रहा है, सच कहूं तो अब उसकी बातों को ज्यादा गंभीरता से लेने की जरूरत भी नहीं है। मेरा मन कहता है कि वो पैसे के लिए अब कुछ भी कर सकता है।

वैसे मुझे इन दो खिलाडि़यों से जरूर सहानभूति है। मैं नहीं जानता कि स्पाँट फिक्सिंग में ये शामिल हैं या नहीं। लेकिन अंकित अनिल चव्हाण और अजीत चंडीला दोनों ही रणजी खिलाड़ी हैं । बाएँ हाथ के बल्लेबाज़ अंकित मुंबई के लिए खेलते हैं जबकि अजीत चंडीला हरियाणा के लिए मैदान में उतरता है। अभी इनका क्रिकेट में इनका बहुत कैरियर है, ऐसे में ये खेल पर ध्यान देने के बजाए पैसे की ओर भागेंगे,  मुझे तो नही लगता, पर अब तो क्रिकेट मैदान में नहीं सट्टेबाजों की टेबिल पर खेली जाती है। कहा जा रहा है कि आईपीएल में 40 हजार करोड़ का सट्टा दांव पर लगा है। सट्टेबाज आईपीएल 6 का चैंपियन अभी से मुंबई इंडियन को बता रहे हैं, अगर कुछ ऐसा होता है तो मुझे भी लगेगा कि हां ये खेल मैदान में नहीं होता है बल्कि ये सट्टेबाजों की टेबिल पर होता है। चलिए हम सब इंतजार करते हैं, अब तो आईपीएल आखिरी दौर में पहुंच ही चुका है।






Monday, 7 May 2012

मसाला क्रिकेट : चलो चलें आईपीएल


हर भजन मैच हारा तो तुझे जूनियर अंबानी को उठाना पडेगा, हाहहा
इस समय देश में कई चीजें एक साथ चल रही हैं। राजनीतिक गलियारे में एनसीटीसी और राष्ट्रपति के चुनाव को लेकर गहमा गहमी है। अन्ना  हजारे और रामदेव सड़कों को गरम किए हुए हैं। नक्सली जंगलों को गरम किए हुए हैं. लगातार बढती मंहगाई से बाजार गर्म है, बाबाओं की कारगुजारी से धार्मिक समागमों मे गरमी है,सेना में भ्रष्टाचार की खबरें अखबारों की सुर्खियों में हैं, और खेल के मैदानों में आईपीएल की मची धूम से गरमी छाई हुई है।  मेरे साथ ही हो सकता है कि आप सब भी इस बात से सहमत हों कि हिंदी ब्लागर्स खेल के मैदान पर बहुत कम बल्लेबाजी करते दिखाई देते हैं। यहां तो सबसे बड़ी संख्या ऐसे लोगों  की है जो प्रेम पर बहुत अच्छी पकड़ रखते हैं और निश्चित रुप से उनकी लिखी रचनाएं मन के बहुत करीब होती है। अच्छा प्रेम एक ऐसा विषय है, जिसमें सभी लोगों की कुछ ना कुछ छोटी बड़ी कहानी जरूर होती है, लिहाजा प्रेम पर लिखी गई हर रचना को काफी महत्व मिलता है, क्योंकि सभी को लगता है कि ये रचना कहीं ना कहीं उन्हीं के इर्द गिर्द घूम रही है।

ब्लाग में हम जैसों को अपनी उपस्थिति बनाए रखने में बहुत मुश्किल होती है। मेरा जो विषय है, आमतौर पर ब्लाग के 70 फीसदी लोग उससे नफरत करते हैं। जो 30 फीसदी लोग राजनीति को समझते हैं, उनकी रुचि है वो बिखरे हुए हैं। वो राजनीति को बाहर से देखकर खुश हो जाते हैं। भीतर घुसने की कोशिश ही नहीं करते। अन्ना और रामदेव भी इसी का फायदा उठा रहे हैं।  खैर छोड़िए आज मैं विवादित विषय को छूऊंगा ही नहीं। अन्ना और रामदेव पर फिर लिखूंगा। चलिए सीधे चलते हैं खेल के मैदान और आनंद लेते हैं फटाफट क्रिकेट का।

आईपीएल में खेल तो है ही, यहां मसाला भी खूब है। दर्शक चाहते हैं कि मुझे वहां बैठने को मिलें, जहां से खेल भले दिखाई ना दे, पर चीयर गर्ल्स के करीब रहूं। इन खेल प्रेमियों को चीयर गर्ल्स के ठुमके ही भाते हैं। उन्हें मैदान मे लगने वाले चौके छक्कों से कोई लेना देना ही नहीं। खेल मे वालीवुड का तड़का लोगों में और उत्साह भर देता है। अच्छा सचिन, राहुल और सौरभ गांगुली को खेलते देखना वाकई एक सुखद अनुभव है। ये खिलाड़ी कभी भी मैदान से हट सकते हैं। इसलिए इनके खेल से तो मन ही नहीं भरता।

ये इसी खेल में संभव हो सकता है कि मै इस समय दिल्ली में हूं तो मेरा समर्थन दिल्ली की टीम के साथ होना चाहिए, पर नहीं। मेरी फेवरिट टीम मुंबई इंडियन है। लेकिन मेरा इस समय फेवरिट खिलाड़ी आंजिक्य रहाणे है जो राजस्थान टीम का सदस्य है। मैं उसे भारतीय टीम में देखना चाहता हूं। मेरी पसंद यहीं खत्म नहीं हो जाती, गेल के छक्के का हमेशा इंतजार रहता है, भले ही वो हमारे मुंबई इंडियन के खिलाफ ही क्यों ना खेल रहा हो। वैसे इस बार मुझे सबसे ज्यादा निराश किया है कोलकता नाइट राईडर के खिलाडी युसुफ पठान ने। तरह गयां उसके लंबे शाट्स देखने के लिए।

अच्छा मुझे तो खेल के मैदान में जो चल रहा होता है उससे तो आनंद आता ही है, पर एक एक गेंद पर टीम के मालिकों का रियेक्शन देखना और भी अच्छा लगता है। गेंदबाजों के पिटने पर वालीवुड बादशाह शाहरुख खान के चेहरे पर कैसा तनाव देखा जाता है। अपनी टीम के खिलाडी के लंबे शाट्स पर प्रीटी जिंटा का खुशी से उछल जाना। पूरे उत्साह के साथ शिल्पा सेट्ठी का मैदान में जमें रहना। टीम की जीत पर ना सिर्फ बच्चों की तरह खिलखिलाकर हंसती है मुंबई इंडियन की मालकिन नीता अंबानी, बल्कि वो खिलाड़ियों से भी ज्यादा उत्साह में उछलकर खिलाडियों को गले लगा लेती हैं। आईपीएल से अगर आप जुड़े हैं और रोजाना मैच देख रहे हैं, तो मुझे बहुत ज्यादा कुछ बताने की जरूरत नहीं... आप खुद इस आनंद को नहीं भुला पाएंगे।

हालांकि अभी तय तो नहीं हुआ है कि कौन कौन सी टीम सेमीफाइनल में रहेगी। लेकिन मैं दिल्ली, कोलकता, मुंबई और राजस्थान को सेमीफाइनल में देखना चाहता हूं। हालाकि मेरे चाहने से कुछ भी होने वाला नहीं, क्योंकि शुरआती मैचों में खराब प्रदर्शन करने वाली चेन्नई की टीम अब बेहतर प्रदर्शन कर रही है। ऐसे में पहले चार में चेन्नई की टीम भी जगह बना ले तो हैरानी की बात नही होगी। पुणे की टीम से मुझे उम्मीद थी, पर मुझे लगता है कि अगले सीजन में दादा को आईपीएल में कमेंट्री ही करनी होगी, वो और उनकी टीम कुछ खास नहीं कर पा रही है, जबकि यही टीम शुरु के कुछ मैंचो में बेहतर प्रदर्शन किया था।

और हां चलते चलते आप इस चित्र का आनंद लीजिए, एक रोमांचक मैच जीतने के बाद नीता अंबानी टीम के कप्तान हरभजन के गले लगने के लिए उछल पड़ी। खैर मौका ही ऐसा होता है खुशी का, जीत की उत्साह का। यहीं नीता के बेटे यानि जूनियर अंबानी भी खड़े दिखाई दे रहे हैं। शायद वो टीम के कप्तान से ये कह रहे हैं कि ठीक है बेटा हरभजन, अगर कोई मैच हारे तो मुझे उठाकर मैदान का चक्कर काटना होगा। हाहाहहाहाह।