राजनीति में सौ - सौ जूते खाने पड़ते हैं,
कदम- कदम पर सौ- सौ बाप बनाने पड़ते हैं।
मुझे याद नहीं कि कब और कहां ये लाइनें मैने सुनीं, लेकिन इतना मुझे जरूर याद है कि जब कवि सम्मेलन में किसी कवि ने ये लाइनें पढी तो पूरा पंडाल तालियों की गडगड़ाहट से गूंज उठा था। लगभग दस हजार लोगों की भीड़ ने इस लाइन पर जिस तरह से समर्थन जताया, उससे मैं ये बात दावे के साथ कह सकता हूं कि लोगों के दिलो दिमाग में सियासियों की छवि बहुत ही घटिया स्तर की है। हो भी क्यों ना, कुर्सी पाने और बचाने के लिए ये एक दूसरे के जूते सिर पर सजाने को तैयार बैठे रहते हैं।
ऐसा नहीं कि छोटे नेता इस तरह की हरकतें करते हैं, सच तो ये है कि बडी पार्टी के नेता इस खेल के हीरो हैं। चलिए दो एक उदाहरण देता हूं कि कैसे ये कदम कदम पर जमीर को ताख पर रख कर सियासी मलाई चाटने के लिए लार टपकती हुई जीभ निकाले घूमते फिरते हैं। आज कांग्रेस के राजकुमार यूपी सरकार को दलालों की सरकार बताते फिर रहे हैं। मैं उनकी इस बात से सहमत हूं कि यूपी में कम से कम कानून का राज तो नहीं रह गया है, लेकिन तस्वीर का ये दूसरा रुख है।
सोनिया गांधी 10 जनपथ पर मायावती के साथ नही हैं, ये मायावती के घर आई हुई हैं। यहां आने की वजह तो मायावती को जन्मदिन की बधाई बताई जा रही है, लेकिन सोनिया जी आप बधाई दें और वो भी मायावती के घर आकर, बात जरा जम नहीं रही है। मायावती का जन्मदिन इसके पहले भी आया, लेकिन घर जाकर बधाई देना तो दूर आपने फोन भी नहीं किया। ये दाल जरूर काली है। सच तो ये है कि कांग्रेस को जब मायावती की जरूरत थी, तो पार्टी की मालकिन सोनिया गाधी जन्मदिन की बधाई देने मायावती के घर जा धमकी। ऐसा नहीं है कि मायावती जो कुछ आजकल कर रही हैं, वो इसके पहले नहीं कर रही थीं। या उनकी छवि के बारे में लोगों को पता नहीं था। लेकिन नहीं सोनियां गांधी सब जानते हुए सिर्फ वो रास्ता खोलने गईं थी कि लोकसभा चुनाव के पहले या बाद में गठबंधन की जरूरत पडे़ तो सोनिया गांधी को मायावती से बात करने में कोई मुश्किल ना हो। इस तस्वीर से आप समझ सकते हैं कि सियासी लोगों के ये गुलदस्ते बहुत कीमती होते हैं, क्योंकि इसमें जन्मदिन का प्रेम, स्नेह नहीं सरकार की सौदेबाजी छिपी हुई है। राहुल आज मायावती सरकार को दलाल तो बता रहे हैं, लेकिन इस पर खामोश हैं कि केंद्र सरकार में मायावती का भी समर्थन है।
चलिए अब बात लालू यादव की करते हैं। देश की घटिया राजनीति का इन्हें जनक भी कह सकते हैं। राजनीति के शुरुआत इन्होंने लोकनायक जयप्रकाश के साथ की, ये कहते हुए तो मुझे शर्म महसूस हो रही है। जेपी मूवमेंट में ऐसे लोग भी थे, जो अपने फायदे के लिए कुछ भी कर सकते हैं, कितना भी गिर सकते हैं। हम आप जितने कान्फीडेंस से सच नहीं बोल सकते, उससे दोगुना कान्फींडेस से लालू झूठ बोल सकते हैं। मुझे हैरत हुई रेलमंत्री रहने के दौरान लालू कैसे पूरे देश की आंख में धूल झोंकते रहे। हां कांग्रेस में आपसी सिर फुटव्वल का लालू ने खूब फायदा उठाया। इनकी चमचागिरी से पार्टी के मठाधीसों की नौकरी खटाई में पड़ गई थी, क्योंकि सोनियां गांधी और मनमोहन सिंह लालू पर ही सबसे ज्यादा भरोसा करते थे। यूपीए सरकार में रेलमंत्री के तौर पर कई साल तक मलाई काटने के बाद इन्होंने लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को उसकी औकात बता दी।
बिहार में अपने पुराने विरोधी रामविलास पासवान को गले लगाया और कांग्रेस को लोकसभा की 54 सीटों में तीन पर लड़ने का न्यौता दिया। इससे कांग्रेसी ऐसा तिलमिलाए कि सोनिया गांधी ने तो लालू से मिलने तक से इनकार कर दिया। लोकसभा और विधानसभा में करारी हार के बाद अब लालू औकात में हैं। अब उनके सिर से राजनीति का पगलापन दूर हो गया है। अब वो बनियान पहन कर टीवी पर बात करते नहीं दिखाई दे रहे हैं।
द्रमुक मंत्री चोरी में पकडे गए तो अब लालू की बांछे खिल गई हैं। लगातार 10 जनपथ का चक्कर काट रहे हैं। सोनिया को भी लग रहा है कि कहीं सरकार मुश्किल में ना आ जाए, इसलिए लालू को भी दाना डाले हुए हैं। संसद में कांग्रेस पर हमला बोल रहे लालू को लगने लगा है कि थोडी चमचागिरी करके कुर्सी पाई जा सकती है, सो सोनिया की चंपुई करने में लग गए हैं, लेकिन ये कांग्रेस है, पूरी जिल्लत कराने के बाद कोई ऐरा गैरा मंत्रालय थमा देगी।
द्रमुक नेता बेईमान हैं, ये देश के ईमानदार प्रधानमंत्री को पहले ही पता था। यही वजह है कि चुनाव जीतने के बाद सरकार बनाने की बारी आई तो उन्होंने टी आर बालू और ए राजा को मंत्रिमंडल में लेने से साफ इनकार कर दिया, लेकिन गठबंधन की मजबूरी होती है, जिसे मना किया, मजबूरी में उसे ही मंत्री बनाना पड़ा। पहले तो ए राजा को मंत्री बनाने और बाद में इन्हें संचार मंत्रालय महकमा दिलाने के लिए जिस तरह से कारपोरेट जगत ने लाबिंग की, वो बेमिशाल है। मेरा एक सवाल प्रधानमंत्री से भी है, जब आप राजा को जानते थे कि वो बेईमान है, तो आपने क्यों उसे संचार मंत्रालय दिया। खैर इस समय द्रमुक नेता किस तरह से सरकार की फजीहत करा रहे हैं, ये पूरा देश नहीं दुनिया देख रही है। लेकिन आप हैरान तब होंगे जब ए राजा के एवज में द्रमुक से कोई दूसरा ए राजा मंत्री बनेगा। चोरों की जमात द्रमुक से रिश्ता तोड़ना भी नहीं चाहते हमारे ईमानदार प्रधानमंत्री।
इसीलिए कहते हैं...
राजनीति में सौ - सौ जूते खाने पड़ते हैं,
कदम- कदम पर सौ- सौ बाप बनाने पड़ते हैं।












