Friday, 4 May 2012

लोकतंत्र के गुनाहगार बाबा रामदेव ...


माफ कीजिएगा मैने बाबा रामदेव लिख दिया, चलिए सुधार लेता हूं यानि लोकतंत्र के गुनाहगार रामदेव। मेरे साथ ही आज देश में करोडों लोग ऐसे हैं जिन्हें रामदेव के आगे बाबा लिखने पर आपत्ति है। मुझे तो उनके भगवा वस्त्र पहनने पर भी कड़ी आपत्ति है, लेकिन मैं अपने विचार किसी पर भला कैसे थोप सकता हूं। दरअसल एक समय था जब लोग भगवावस्त्र का बहुत सम्मान करते थे, लेकिन अब तो ये वस्त्र सुविधा का वस्त्र बनकर रह गया है, संकट आए तो ये वस्त्र त्याग कर महिला का सलवार शूट पहना जा सकता है। वैसे ये सब बातें सबको पता है, इस पर बेवजह समय खराब करना ठीक नहीं।

मुद्दे पर आता हूं। रामदेव ने एक सार्वजनिक सभा में कहा कि देश को 543 रोगी चला रहे हैं। ये हैवान हैं, शैतान हैं, व्यभिचारी हैं, भ्रष्टाचारी हैं। रामदेव से पूछा गया कि आखिर इतनी बड़ी बात आप किस आधार पर कह रहे हैं, तो उनका जवाब है कि सांसदों ने चुनाव लड़ने के दौरान अपने ऊपर लगे आरोपों का खुद ही जिक्र किया है। अब रामदेव को कौन समझाए कि जब चुनाव लड़ने के दौरान ही उम्मीदवारों ने अपने ऊपर लगे आरोपों का खुलासा कर दिया, फिर भी वो चुनाव जीत गए, इसका मतलब जनता उन्हें ठीक मानती है। अगर जनता ने उन्हें ठीक का प्रमाण पत्र दे दिया तो रामदेव को परेशानी क्यों है ? अच्छा अभी फैसला नहीं हुआ है, सिर्फ आरोपों के आधार पर सांसदों को बेईमान कैसे कहा जा सकता है।

फिर भी चलिए मैं रामदेव की बात मानता हूं। आरोपों के आधार में मैं भी इन सांसदों को गुनाहगार एक शर्त पर कहने को तैयार हूं जब रामदेव खुद को भी भ्रष्ट, निकम्मा, धोखेबाज मान लें। क्योंकि बाबा पर आरोप है कि उन्होंने टैक्स की चोरी की है, सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया है, वो भी पांच रुपये का चूरन 50 रुपये में बेचकर जनता को धोखा दे रहे हैं, जनता को योग के नाम पर दिल्ली बुलाते हैं और यहां अनशन करते हैं और बेचारी जनता पर लाठी बरसती है तो लड़कियों के कपड़े पहन कर खिसक लेते हैं। भाई ऐसा रामदेव तो निकम्मा ही कहा जाएगा। वैसे मैं बेवजह यहां किसी महिला के नाम का जिक्र नहीं करना चाहता, क्योंकि अब वो पतंजलि से अलग होकर गंगा किनारे तप कर रही हैं, वरना रामदेव पर आरोप तो वो भी है, जो कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी पर है।

इसीलिए मैं कहता हूं कि देश में सभी को अधिकार है कि वो अपने ऊपर लगे आरोपों को कानूनी प्रक्रिया के तहत निस्तारित होने दे। हम सब कानून को मानने वाले हैं, अगर कोर्ट ने कहा कि हम गुनाहगार है तो हमारी कुर्सी खुद ही चली जाएगी। आप सब को पता है कि संसद में सवाल पूछने के लिए पैसे लेने का आरोप कुछ सांसदों पर लगा तो महज 13 दिन में उन सांसदों को घर का रास्ता दिखा दिया गया। बीजेपी के मुख्यमंत्री येदुरप्पा को कुर्सी छोड़नी पड़ी। कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे ए राजा जेल में है ना। तो सबको अपना काम करने दीजिए। रही बात कालेधन की ये तो वापस आना ही चाहिए। रामदेव की मांग से मैं या देश  का कोई भी व्यक्ति असहमत नहीं हो सकता, लेकिन उनका तरीका ना सिर्फ गलत बल्कि शर्मनाक भी है। एक भगवाधारी से ऐसी बातों की उम्मीद नहीं की जा सकती।

अच्छा सार्वजनिक मंच से जब रामदेव ने कहा कि मैं जान दे दूंगा, पर अपनी बात वापस नहीं लूंगा और ना ही आंदोलन खत्म करुंगा। इस बात पर तो ताली बजनी चाहिए थी, लेकिन वहां लोगों ने ताली के साथ बहुत तेज का ठहाका लगाया। किसी ने कहा कि अरे भाई इसमें ठहाका लगाने की क्या बात है। तो ठहाका लगाने वालों ने कहा कि जान देने की बात करते हैं रामदेव और जब अवसर आता है तो महिलाओं के कपड़े में खिसक लेते हैं। बेचारी एक महिला को बेवजह अपनी जान गंवानी पड़ी।

दरअसल बुराई की आधा जड तो इलैक्ट्रानिक मीडिया भी है। कई बार होता है कि गुस्से में किसी भी आदमी के मुंह से कुछ भी निकल जाता है। अब ये बातें पूरा देश सुन लेता है। बाद में जिस किसी ने भी गलत शब्द इस्तेमाल किया है, वो संयम में आता है तो महसूस करता है कि ऐसा नहीं कहना चाहिए था। लेकिन अगर वो अपने शब्द वापस लेता है तो इलेक्ट्रानिक मीडिया शोर मचाता है कि रामदेव अपनी बात से पलटे। इससे और किरकिरी होती है, लिहाजा एक बार जो बात मुंह से निकल गई उस पर कायम रहना मजबूरी होती है।

वैसे सबको पता है कि रामदेव कई लड़ाई एक साथ लड़ रहे हैं, एक सरकार के खिलाफ उनकी जंग छिड़ी हुई है, दूसरे टीम अन्ना उनका बाजा बजाती रहती है, फिर खुद की विश्वसनीयत का संकट भी है। ऐसे में कोई भी आदमी आपा खो सकता है। मुझे बार बार लगता है कि रामदेव और टीम अन्ना देश के लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर कर रहे हैं। अब मुद्दा तो सुन सुन कर जनता बोर हो गई है। लिहाजा अब ये अभद्र भाषा पर उतर आए हैं। जो हालात है मुझे लगता है कि टीम अन्ना अब जल्दी ही अपने नेता यानि अन्ना को ही बाहर का रास्ता दिखाने की तैयारी कर रही है। अब टीम के सदस्य अन्ना की एक बात नहीं मानते। अन्ना का कम पढा लिखा होना भी उनके रास्ते का रोड़ा है। यही वजह है कि टीम अपने नेता पर भारी पड़ती है। कहा जाता है कि जब मीटिंग में कोई बात अन्ना से छिपानी होती है तो उनके सदस्य अंग्रेजी में बात करने लगते हैं। सच ये है कि रामदेव और अन्ना दोनों का ही कम पढ़े लिखे होने से कुछ लोग पर्दे के पीछे से इनका इस्तेमाल कर रहे हैं। इस मामले में अब जनता को  ही जागरूक होना पड़ेगा।



40 comments:

  1. सार्थक आलेख..

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  2. बहुत बढ़िया प्रस्तुति!
    आपकी प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर लगाई गई है!
    चर्चा मंच सजा दिया, देख लीजिए आप।
    टिप्पणियों से किसी को, देना मत सन्ताप।।
    मित्रभाव से सभी को, देना सही सुझाव।
    उद्गारों के साथ में, अंकित करना भाव।।

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    1. आपका स्नेह मुझे ताकत देता है

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  3. सही कहते हैं, आप अब जनता को ही जागरूक होना पड़ेगा. सार्थक आलेख...

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    1. Sandhya Ji app bhi mahendra shivastav ki trah ki
      vidwan hain chaliya anna ramdev galat to app aakar ke
      kuch kro logo ki puch pakad kar mat chalo

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    2. सोसल नेटवर्किंग की ताकत से आज ना सिर्फ सियासी गलियारे में बल्कि तथाकथित समाजिक कार्यकर्ताओं (रामदेव जैसे) भी परेशान हैं। आपने देखा होगा कि कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी की सीडी चलाने की हिम्मत कोई चैनल नहीं कर पाया, अखबार खबर छापने की हिम्मत नहीं जुटा पाए। पर फेसबुक और यूट्यूब का सहारा लेकर लोगों ने ऐसा माहौल बना दिया कि कांग्रेस को बैकफुट पर आना पड़ा और सिंघवी को किनारे कर दिया गया। ऐसे में रामदेव के चेले यहां समर्थन जुटाने में लगेगे ही, क्योंकि रामदेव पर भी ऐसे दाग हैं जो आसानी से धोए नहीं जा सकते।

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  4. आज के हालात के मध्येनजर भारत को घोटालों ्का देश कहना अनुचित नहीं होगा।कोई भी महापुरुष जब इस स्थिति के विरुद्ध संघर्ष में उलझेगा तो स्वाभाविक है कि निहित स्वार्थ के लोग उनके विरुद्ध आरोपों की बौछार करेंगे। बाबा रामदेव के साथ यही हो रहा है। अपने योग से भारत ही नहीं पूरे विश्व का भला करने वाले बाबा रामदेव पर आरोप कैसे लोग लगा रहे हैं? उनके चरित्र और कार्य कैसे रहे हैं? मेरा तो मानना है कि बाबा रामदेव को किसी भी कूटनीति या कुटिल नीति से बेकफ़ुट पर लाना देश की तकदीर के साथ खिलवाड करने जैसा कार्य होगा।

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    1. डाक्टर साहब किसने कहा कि भ्रष्ट्राचार के खिलाफ आवाज बुलंद नहीं होनी चाहिए। हम सब या कहें पूरा देश चाहता है तो गलत नहीं है। लेकिन बेईमानी की बुनियाद पर ईमानदारी का लड़ाई नहीं लड़ी जा सकती।
      रामदेव की लड़ाई अपनी काली करतूतों को छिपाने की है। आप पहले महर्षि पतंजलि को पढें, फिर देखें कि ये रामदेव उस कसौटी पर कितना खरा उतरता है। मैं तो दावे के साथ कह सकता हूं कि पांच फीसदी भी नहीं।
      झूठा तो पहले ही साबित हो चुका है जब इसने कैंसर जैसे बीमारी को अपने चूरन चटनी से खत्म करने का दावा किया था। डाक्टर साहब कहां हैं आंखे खोलिए....

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  5. 'देर आयद -दुरुस्त आयद'। आपने भी मान ही लिया कि।अन्न/रामदेव लोकतन्त्र के शत्रु हैं जनता तो पहले ही जानती थी। केवल कुछ भ्रष्ट -देशद्रोही इन दोनों के पीछे भाग रहे थे।

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    1. अरे विजय जी, मैने अब नहीं मान लिया। मैने साल भर पहले ब्लाग की शुरुआत ही इसीलिए की कि लोगों को सच की जानकारी देता रहूंगा।

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    2. लगता है आपकी जाती दुश्मनी हैं अन्ना और रामदेव से
      नहीं तो सारी दुनिया उनके साथ हैं
      माना की राजनीती चमका रहे हैं
      पर देश के खिलाफ कोई बात नहीं कर रहे
      पर आप पहले बेवकूफ हो जो उनकी लोकप्रियता
      आप को दिखाई नहीं देती

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    3. मै देखता हूं कि रामदेव के चेले हमेशा रामदेव के नाम के साथ अन्ना का नाम जोड़ते हैं, जिससे लोगों में भ्रम पैदा हो। मेरा मानना है कि अन्ना शरीफ हैं, पर उनकी संगत भर गलत है। पर रामदेव .........।
      दूसरी बात मैने देखा है कि रामदेव की चूरन चटनी बेचने वाली टीम जैसे ही नेट पर रामदेव के बारे मे कुछ देखती है तो रियेक्ट करने लगते हैं, दरअसल ये उन्हें ड्यूटी दी गई है।
      और आखिर में जब रामदेव अमर्यादित भाषा बोलते हैं तो उनके चेले उनकी नजर मे आने के लिए और गाली गलौच पर उतर आते हैं। सच बताऊं तो जिसके खिलाफ आप लिखते हैं, अगर उधर से गाली नही आती है तो मन उदास रहता है, लगता है कि पूरी बात नहीं लिखी गई, जब गाली आने लगती है तो मैं समझ जाता हूं कि निशाना सही जगह पर लगा है।
      भाई अगर आप किसी को मारेगे तो रोने का अधिकार तो उसे देना ही पडेगा।

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  6. पहली बार आपका आलेख आधा सच लग रहा है. राज्य सभा के कुछ सदस्यों को छोड़ कर बाकी संसद सदस्य शर्तिया तौर पर ठीक नहीं है चाहे उनपर कोई आरोप लगा हो या न लगा हो. कुछ संसद सदस्यों को हम जानते हैं जिनपर कोई आरोप नहीं है, दागी नहीं हैं लेकिन परदे के पीछे उनका भी सच कुछ और है. बाबा रामदेव पूरी तरह धुले नहीं हैं लेकिन बड़े बड़े घोटालों के जनक से तो कम जरुर ही होंगे.

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    1. कोई बात नहीं. मै आपकी बातों को स्वीकार करता हूं...

      लेकिन आप अगर लोकसभा के बारे में कहते तो एक बार मैं मान लेता, पर राज्यसभा में दो चार पर कोई मामला हो तो मै नहीं कह सकता। वरना राज्यसभा में दागी नही हैं। खैर नेताओं को कोई मैं ईमानदारी का सर्टिफिकेट नहीं दे रहा हूं, भगवा वस्त्र मे हमारी आस्था है और जब आस्था का चीरहरण देखता हूं तो चीख निकलेगी ही, आपको अच्छा लगे या ना लगे।
      रामदेव पर वही सब आरोप हैं जो एक सबसे गंदे नेता पर लगते हैं। रामदेव आज तक नहीं बता पाए कि उनके गुरु कहां है... ( आरोप है कि उनकी हत्या करा दी गई है) एक माता को पतंजलि छोड़कर गंगा के किनारे क्यों तप करना पड़ रहा है, टैक्स की चोरी में पतंजलि पर आरोप, गलत ढंग से 39 से ज्यादा कंपनी बनाकर सरकार को चूना लगाया जा रहा है। उनका चेला फर्जी पासपोर्ट का आरोपी है। रामदेव पर जमीन हड़पने का आरोप बहुत पुराना है। और ऐसा नहीं है कि ये आरोप अब लग रहे हैं, काफी पहले से इन मामलों में शिकायत होती रही है, पर वहां बीजेपी की सरकार में इन्हें सरंक्षण मिला था, क्योंकि रामदेव बीजेपी को चंदे में मोटी रकम देते हैं।

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    2. apne abhi tak ke comments ki reply se bata diya hai ki app kitne narrow minded person ho. app kewal apni soch ke anusar hi sunna pansand karte ho, baba ne desh ko kya diya, app ye batao baba ne apse kya liya hai.

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    3. चलिए मित्र विक्रम जी, आप लेख को नहीं समझ पाए, पर मुझे समझ गए। ये आपकी अद्भुत क्षमता है। रामदेव में भी ये क्षमता है, जब जगह जगह वो दूसरों को गाली देते फिर रहे हैं, अपने भीतर झांकने का वक्त ही नहीं मिल रहा। जब रामदेव खुद को नहीं समझ पाए तो उनके चेलों से भला क्या उम्मीद की जा सकती है। पर आपने मेरे लेख को पढा, मैं आपका आभारी हूं।

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  7. is blog site ka naam bahut sarthak "aadha sach"
    yaha log aadha sach hi likhte hai
    jhoot ko sach aur sach ko jhoot dikhane me lekakh mahodaya mahir hai
    unki is yogyata ki dad deni padegi

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    1. हां जी आपकी बातों का जवाब क्या दूं, जो सामने आकर बात भी नहीं कर सकता। फिर भी आपने भारी मन से ही सही, मुझे दाद तो दी है ना.. आभार आपका..

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  8. मेरा तो अब यह मानना है कि चाहे कोई भी सभा हो कोई भी नेता ... या बाबा ... या फकीर ... कहानी के अंत मे च पर उ की मात्रा का बिल्ला आम जनता के ही हिस्से मे आता है !


    इस पोस्ट के लिए आपका बहुत बहुत आभार - आपकी पोस्ट को शामिल किया गया है 'ब्लॉग बुलेटिन' पर - पधारें - और डालें एक नज़र - ज़िंदा रहना है तो चलते फिरते नज़र आओ - ब्लॉग बुलेटिन

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    1. शिवम भाई,
      मेरे लेख को और लोगों तक पहुंचाने के लिए शुक्रिया।

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  9. @ अगर जनता ने उन्हें ठीक का प्रमाण पत्र दे दिया तो रामदेव को परेशानी क्यों है ? अच्छा अभी फैसला नहीं हुआ है, सिर्फ आरोपों के आधार पर सांसदों को बेईमान कैसे कहा जा सकता है।
    ठीके कहत हउआ...जनता के परमान पत्र सर्वोपरि हौ। चलीं, सिरीबास्तव जी! राउर कहे से हम मान लेतनी के हमार नेता लोग सब मरियादापुरुसोत्तम बाड़ेन,लोकतंत्र के रक्षक बाड़ेन,..आ उनकर अगुआयी मं देस बिकास कर रहल बा। बोलीं जा नेता लोगन के जय ...

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    1. जऊन दू लाइन उठैइले हउआ, ओसे हमरे साथ तू इंसाफ ना कइलअ.. पहिले पूरा पैराग्राफ पढे के चाहत रहे, फिर कुछो कहता त हम मान लेहित। हम इ नइखे कहत बानी कि हमरा नेता कुल राम नियर बाड़ें, पर इ जरूर कहत बानी की इ रामदेउओ कउनो ईमानदार नइखे हव...

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  10. सूचनार्थ: ब्लॉग4वार्ता के पाठकों के लिए खुशखबरी है कि वार्ता का प्रकाशन नित्य प्रिंट मीडिया में भी किया जा रहा है, जिससे चिट्ठाकारों को अधिक पाठक उपलब्ध हो सकें। 

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  11. वाह बहुत खूब :) बात कहना हो तो आपकी तरह हिम्मत और खूबसूरत अंदाज अगर अच्छी लगे तो वाह वाह अगर गले से नीचे ही न उतरे तो छी-छी | मैं आपकी बात से पूरी तरह से सहमत हूँ रामदेव जी जो काम करने जा रहे हैं वो बहुत अच्छा है पर किसी को नीचे गिराकर या अपमान करके खुद को अच्छा साबित करना ये बिल्कुल सही नहीं बहुत सुन्दर लेख |

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  12. एक तरफ जब रामदेव का चूरन चटनी बेचने वाले फोन पर गालियों की बौछार कर रहे हों,कुछ ब्लाग पर भी गाली दे रहे हों, ऐसे समय में आप सबका समर्थन वाकई ताकत देता है। जी मैं आपका पूरे मन आभार व्यक्त करता हूं। आप मेरे लेख से सहमत हैं, मुझे अच्छा लगा।

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  13. दूध का धुला तो शायद ही कोई निकले - पर इतना जरूर है कि किसी की कमीज़ पर ज्यादा धब्बे तो किसी पर कम, स्वयम राम जी तो दुबारा आने से रहे देश सँभालने.....

    बाकि बाबा जो कर रहे हैं, उन्हें समर्थन है, पूर्णरूपेन,

    पूरा दिन मंत्री लोग बाबा के आगे नत्मश्तक होते रहे, और रात में उस दिन राम लीला मैदान पर जिस हिसाब से पुलिस ने कार्यवाई की थी, उससे तो ऐसा लगता है, कि बाबा की हत्या की ही योजना बनाई गई थी, और अच्छा हुआ चाहे किसी भी रूप में बाबा बच कर भाग गए,

    जिन्दा है तो कुछ कर लेंगे,

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    1. यही जानकारी का अभाव है कि रामदेव के आगे मंत्री नत्मस्तक थे। रामदेव को एयरपोर्ट पर ही उनकी काली करतूंतों का पुलिंदा थमा दिया गया था। उन्हें साफ कर दिया गया था कि आपका अनशन चल नहीं पाएगा आप एक्पोज हो जाओगे।
      जानकारी तो यहां तक है रामदेव ने उसी समय माफी मांग ली और उसके बाद फिर सरकार से बात करने एक होटल पहुंचे। और सरकार से आग्रह किया कि उन्हें दो तीन दिन योग शिविर लगाने दें। रामदेव की बातों पर सरकार को भरोसा नहीं था, इसलिए रामदेव ने उन्हें लिखकर दिया और कहा कि अगर हमने योग शिविर तीन दिन में खत्म नहीं किया तो आप ये पत्र सार्वजनिक कर दें।
      रामदेव जब हदें पार करने लगे तो पत्र का खुलासा हुआ और रामदेव का गंदा चेहरा सामने आ गया।

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  14. लेख को पढकर लगा कि इसमे आधा सच भी नहीं है। देश के हित में अपना नजरिया बदलें।

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    1. आपका सुझाव अच्छा है...
      लेकिन मैं जिस बात से पूरी तरह कन्वींस हूं, उस नजरिए को बदलना संभव नहीं है। मै जानता हूं कि बेईमानी और मक्कारी की बुनियाद पर ईमानदारी की ईमारत कभी खड़ी नहीं हो सकती।

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जी, अब बारी है अपनी प्रतिक्रिया देने की। वैसे तो आप खुद इस बात को जानते हैं, लेकिन फिर भी निवेदन करना चाहता हूं कि प्रतिक्रिया संयत और मर्यादित भाषा में हो तो मुझे खुशी होगी।