बाबा रामदेव पर दो लेख लिखने के बाद सोचा था कि अब बस करते हैं, लेकिन मुझे लगता है कि चार जून के बाद के घटनाक्रम पर अगर अपनी राय न रखूं तो कुछ अधूरा सा लग रहा है। मित्रों मैं इस बात से सहमत हूं कि देर रात में पुलिस की कार्रवाई नहीं होनी चाहिए थी, एक तरफ तो केंद्र सरकार उसी दिन रात 11.30 बजे बाबा को लिखित मसौदा भेज रही है और उसके घंटे भर बाद ही पुलिस कार्रवाई। बाबा के जवाब आने का भी इंतजार नहीं किया गया, यहां मैं सरकार की कारगुजारी से पूरी तरह असहमत हूं। अब हर मुद्दे पर छोटी छोटी बात रखता हूं, जिससे आपको पूरे घटनाक्रम को समझने में आसानी होगी।
दिल्ली में सरकार है ना
बाबा के साथ किए गए दुर्व्यवहार के बारे में मित्रों से बात हो रही थी। सबके अलग अलग विचार थे। मेरी भी राय पूछी गई। मैने साफ कहा कि दिल्ली में मुझे पहली बार लगा कि यहां कोई सरकार काम करती है। सत्याग्रह के नाम यहां जमें नौटंकीबाजों को देर रात में हटाना सही है, या गलत ये बहस का मुद्दा हो सकता है, लेकिन मैं सरकार के इस साहस की तारीफ करुंगा कि उन्होंने इतनी बड़ी भीड़ को बलपूर्वक हटाने का फैसला किया। इससे उन लोगों को सबक मिलेगा जो भीड़ को आगे कर सरकार को बंधक बनाने की कोशिश करते हैं। इस फैसले के बाद अब बीजेपी कमजोर सरकार और कमजोर पीएम का राग अलापना तो बंद कर ही देगी।
बाबा की कारस्तानी..
बाबा रामदेव सरकार से कुछ बातें करते रहे और लोगों को दूसरी बात बता रहे थे। हुआ ये कि एयरपोर्ट पर जब मंत्रियों के ग्रुप से बाबा की बातचीत हुई, तभी ज्यादातर मामले में सहमति बन गई थी। लेकिन बाबा सभी मामलों में लिखित आश्वासन चाहते थे, लिहाजा तय हुआ कि तीन जून को फिर मिलते हैं और सभी बिंदुओं पर लिखित आश्वासन दे दिया जाएगा। अगले दिन सरकार की ओर से बाबा को फोन कर बातचीत के लिए आमंत्रित किया गया तो, बाबा कुछ बेअंदाज लहजे में बात कर रहे थे। जैसे मैं नार्थ ब्लाक में बात नहीं करुंगा। नार्थ ब्लाक या साउथ ब्लाक में केंद्र सरकार के महत्वपूर्ण आफिस हैं। यहां बातचीत की एक अलग गरिमा होती है। बहरहाल बाद में बाबा बात के लिए होटल में मिलने को तैयार हो गए। यहां बातचीत से बाबा पूरी तरह समहत हो गए और सहमति का पत्र भी कपिल सिब्बल को तीन जून को ही थमा दिया और सरकार से बाबा ने आग्रह किया कि अब वो अनशन नहीं करेंगे, लेकिन उन्हें एक दिन तप करने की अनुमति दी जाए। चार जून को दोपहर ढाई बजे तक मैं सब समाप्त कर दूंगा।
वादे से पलटे बाबा
वादे के मुताबिक बाबा को दोपहर ढाई बजे तप खत्म करना था। इस दौरान भी उनकी लगातार सरकार से फोन पर बातचीत होती रही। और वो अब तब करते रहे। आखिर में बाबा को चेतावनी दी गई कि अगर वो तप खत्म नहीं करते हैं तो सरकार के साथ जो समझौता उन्होंने तीन जून को किया है, उसे सार्वजनिक कर दिया जाएगा। इस पर बाबा रामदेव हिल गए और उन्होंने शाम को लगभग सात बजे ऐलान किया कि उनकी सभी मांगे मान ली गई हैं, बस कुछ चीजें लिखित में आनी है और उसके बाद हम अपनी जीत मनाएंगे। यहां तक की बाबा समेत सभी लोग मंच पर जयकारा भी करने लगे थे।
सरकार का रुख सख्त
एयरपोर्ट पर बाबा से मंत्रियों के मिलने से सरकार की काफी छीछालेदर हो चुकी थी। दरअसल मीडिया और बीजेपी ने इस मुलाकात को ऐसे पेश किया जैसे सरकार बाबा के आगे नतमस्तक हो गई है। बाबा को सम्मान देने को जब सरकार की कमजोरी समझी जाने लगी तो सरकार सख्त हो गई और तय किया गया कि अब कोई मुरव्वत नहीं बरती जाएगी। जो बात बाबा से लगातार हो रही है, अगर वो उसे मानते हुए तप खत्म नहीं करते हैं, तो सख्ती बरती जाएगी। बाबा को ये बात पहले बताई भी गई थी। लेकिन बाबा भीड़ देख बेअंदाज थे, उन्हें लग रहा था कि इतनी बडी संख्या में लोग यहां है, पुलिस उनका कुछ नहीं कर पाएगी।
बाबा और सलवार सूट
बाबा ने पिटवाया सत्याग्रहियों को
बाबा के पास जव पुलिस पहुंची और उन्हें बताया कि रामलीला मैदान में योग कार्यक्रम की अनुमति रद्द कर दी गई है तो बाबा अगर पुलिस को सहयोग करते तो यहां कोई उपद्रव नहीं होता। पुलिस अधिकारी चाहते थे कि बाबा लोगों को खुद संदेश दें की वो यहां शांति बनाए रखें और पुलिस जैसा कहती है वैसा ही करें, क्योंकि पुलिस ने तमाम बसों का इंतजाम किया था जिससे लोगों को रेलवे स्टेशन या बस अड्डे तक पहुंचाया जा सके। लेकिन बाबा जब महिलाओं के बीच में कूद गए, तब पुलिस को हरकत में आना मजबूरी हो गई। इस तरह से बाबा के सहयोग ना करने के कारण ही वहां लाठी चली, और हां जिस तरह से बाबा ने उतनी ऊंचाई से छलांग लगाई वो कोई साधु संत तो नहीं लग सकता।
अनशन की हकीकत
हालाकि ये बात बहुत ही भरोसे से नहीं कही जा सकती, लेकिन बाबा के करीबियों में ही कुछ लोग बाबा के बचकानी हरकतों से खफा हैं। उनका कहना है कि बाबा खुद मंच से कहते रहे कि 99 फीसदी मांगे मान ली गई हैं, तो फिर इन्हें तप नहीं करना चाहिए था। वैसे तप करने के पीछे एक वजह करोडों के चेक थे। बताते हैं कि दानदाताओं ने चेक अनशन के लिए दिया था। जब अनशन होता ही नहीं तो बाबा को डर था कि लोग चेक को बैंक से स्टाप पेमेंट ना करा दें।
झूठ दर झूठ बोलते रहे बाबा
मुझे लगता है कि कम से कम साधु संतो से इतनी अपेक्षा तो की ही जानी चाहिए कि वो झूठ नहीं बोलेगें, लेकिन ये बाबा तो झूठ का पुलिंदा है। अनशन शुरु करने से पहले ही सरकार से सभी बातें कर चुके थे, लेकिन अपने ही भक्तों को इस बात की जानकारी नहीं दी। लोगों को उकसाने के लिए सत्याग्रहियों से कहते रहे, मुझे दबाने की कोशिश की जा रही है। मेरी हत्या की साजिश की जा रही थी। मेरा एनकाउंटर होने वाला था। डुपट्टे से मेरा गला घोंटने की तैयारी थी। वाह रे बाबा जी..
मुंबई में राजा दिल्ली में बाबा तड़ीपार
एक्टर राजा चौधरी सुधरने का नाम ही नहीं ले रहा था, लिहाजा मुंबई पुलिस ने उसे मुंबई से तड़ीपार कर दिया। इसी तरह बाबा ने दिल्ली में उपद्रव मचा रखा था। सरकार से बातचीत में सब कुछ ठीक रहता था, बाद में उन्हें कोई पंप कर देता था और वो फिर अड़ जाते थे। आखिर दिल्ली पुलिस ने उन्हें रास्ते पर लाने का फैसला किया और तमाम गंभीर धाराओं में मुकदमें दर्ज करने के बाद दिल्ली से तड़ीपार कर दिया। मुझे लगता है इतने बडे साधु संत को पहली बार किसी शहर से तड़ीपार किया गया है।
राजघाट को शर्मशार किया
जब सब नाटक में व्यस्त हों तो बीजेपी भला क्यों पीछे रहती। उसे लगा कि बाबा के मामले को देश भर में गरमाने से सरकार के खिलाफ एक आंदोलन खड़ा किया जा सकता है। बाबा के खिलाफ कार्रवाई के गम में नहीं अपनी पार्टी का जनाधार बढ़ने की खुशी में भाजपाई 24 घंटे के सत्याग्रह पर राजघाट पहुंच गए। यहां जिस तरह से पार्टी के बडे नेताओं ने ठुमके लगाए, उससे कई सवाल खड़े कर दिए। सबसे बड़ा सवाल आखिर ये ठुमका किस खुशी में था ।







