Tuesday, 6 June 2017

स्वच्छता सर्वे या बिहार की मेरिट लिस्ट !

स्वच्छता रिपोर्ट के कवर पेज से इंदौर गायब ! 
च्चाई ये है कि अगर भारत सरकार की स्वच्छता सर्वेक्षण रिपोर्ट की बारीकी से निष्पक्ष जांच कराई जाए तो  ये बिहार की मेरिट लिस्ट से कम नहीं निकलने वाली है। मुझे ये कहने में भी कत्तई हिचक  नहीं है कि जिस तरह बिहार में जांच के बा
द मेरिट में आए छात्र और उस स्कूल के प्राचार्य को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है , ठीक उसी तरह अगर इस स्वच्छता रिपोर्ट की निष्पक्ष जांच हो जाए तो ना सिर्फ इंदौर की हकीकत सामने आएगी, बल्कि यहां भी कई अफसरों को जेल की हवा खानी पड़ सकती है। दो साल इंदौर में रहा हूं, इसलिए ना सिर्फ यहां की सफाई से वाकिफ हूं बल्कि अफसरों की फितरत को भी भली भांति समझता हूं।

जान लीजिए लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन यहां से  सांसद है, इसलिए इंदौर के सामले  में सभी राजनीतिक दल खामोश रहते हैं। ताई का ना सिर्फ इंदौर बल्कि देश भर में एक अलग  सम्मान है। केंद्र सरकार की जो भी योजना होती है, सभी में इंदौर का नाम शामिल हो जाता है ,जबकि यहां तैनात ज्यादातर अफसर नाकाबिल है, लेकिन अपनी मार्केटिंग और जी हजूरी अच्छी कर लेते हैं। यहा हर उस अफसर को मुख्यमंत्री की ताकत मिलती है जो यहां के दिग्गज नेता कैलाश विजयवर्गीय का विरोधी है । खैर अभी बात सिर्फ सफाई की ।
इंदौर शहर को खान नदी दो हिस्सों मे बांटती है। गंदगी से अटी पड़ी ये नदी अब नाला बन चुकी है । इसके दोनों ओर भारी गंदगी है और इसके आप पास रहना मुश्किल है। जो इलाका साफ सुथरा दिखाई भी दे रहा था, मसलन विजयनगर, स्कील 54 वगैरह । यहां निगम अफसरों ने सड़क पर फूहड तरीके से टाँयलेट बनवा दिए है और उस पर गांव गिरांव की तरह लिखा है मूत्रालय । जैसा टाँयलेट इंदौर निगम ने बनवाया है वो टाँयलेट यूपी के गांव में बने टायलेट से भी घटिया है। चूंकि ताई की वजह से इंदौर को ना सिर्फ स्मार्ट सिटी स्कीम में शामिल किया गया बल्कि पहले 20 स्मार्ट सिटी में शामिल किए जाने से केंद्र सरकार से करोडों रुपये साफ सफाई के लिए मिल गए । अब अनाप शनाप पैसे मिल रहे हैं और अधिकारी मौज ले रहे हैं।

रिपोर्ट में कहा गया कि यूपी  का गोंडा शहर सबसे गंदा है, मैं हैरान हूं कि भारत सरकार को ये रिपोर्ट जारी करने में शर्म भी महसूस नहीं हुई । अरे पता तो करते गोंडा को साफ सफाई के लिए कितना पैसा दिया गया है । इंदौर में तो माहौल बनाने के लिए एक दिन में अफसरों ने 10 लाख रुपये के गुब्बारे हवा में उ़डा दिए, गोडा मे सफाई के लिए साल में 10 लाख नहीं मिले  होंगे । इस रिपोर्ट में  स्वच्छता का जो क्राइट  है, वो भी दोषपूर्ण है।

कुल 2000 अंको में शहरों को नंबर दिए गए हैं । इसमें 900 अंक स्थानीय निकायों के डाक्यूमेंटेशन का है, जबकि सिटीजन फीडबैक पर 600 और निष्पक्ष मूल्यांकन के लिए महज 500 अंक है। अब अगर डाक्यूमेंटेशन में इँदौर को   875 अंक मिलते हैं और गोंडा को सिर्फ 52 तो इसमें शहर या शहरियों की क्या गलती है ? जिन अफसरों ने डाक्यूमेंटेशन ठीक नहीं किया, उन्हें अब तक  निलंबित हो जाना चाहिए था। इसी तरह  सिटीजन फीडबैक को ले लें , इसके 600 अंकों में से इंदौर को मिले हैं 467 और गोंडा के खाते में आए 192 अंक । यहां ये जानना जरूरी है कि इंदौर की आबादी गोंडा के मुकाबले चार गुना है, इंदौर संपन्न शहर है, ज्यादातर लोग मोबाइल और इंटरनेट इस्तेमाल करते हैं, जबकि गोंडा एक पिछडा शहर है। बता चुका हू कि इँदौर मे माहौल बनाने के लिए सिर्फ एक दिन में 10 लाख गुब्बारे हवा मे उडाए गए। अच्छा इसके बाद भी अंबिकापुर ने 501 अंक हासिल कर इंदौर को दूसरे नंबर पर धकेल दिया है। सबसे महत्वपूर्ण निष्पक्ष आब्जर्वेशन का है, जो  सिर्फ 500  अंकों का है। इसमें इंदौर को 435 अंक मिले हैं, जबकि कई दूसरे शहरों को इंदौर से अधिक अंक मिले हैं।

साफ है कि भारत सरकार ने पूरी तरह गलत तथ्यों पर आधारित रिजल्ट घोषित किया था, यही वजह है कि कल यानि 5 जून को जनता का  धन्यवाद ज्ञापित करने के लिए प्रणाम इंदौर कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस आयोजन में लाखों रूपये पानी की तरह बहाए गए। भगवान को ये मंजूर नहीं था और उन्होंने अपना रौद्र रूप दिखाया, आंधी तूफान में सारे पांडाल उडा दिए , वीआईपी भी मुश्किल से यहां से निकल पाए । मैं चुनौती देता हूं कि अगर कोई निष्पक्ष टीम  इंदौर का निरीक्षण करेगी तो ना सिर्फ यहां की हकीकत सामने आएगी, बल्कि बेईमान अफसरों को भी  जेल  जाना होगा ।

भगवान को मंजूर नहीं झूठ  !














इंदौर की असल तस्वीर !

इंदौर की असल तस्वीर !

इंदौर की असल तस्वीर !



6 comments:

  1. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन जन्म दिवस : सुनील दत्त और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल गुरूवार (08-06-2017) को
    "सच के साथ परेशानी है" (चर्चा अंक-2642)
    पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

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जी, अब बारी है अपनी प्रतिक्रिया देने की। वैसे तो आप खुद इस बात को जानते हैं, लेकिन फिर भी निवेदन करना चाहता हूं कि प्रतिक्रिया संयत और मर्यादित भाषा में हो तो मुझे खुशी होगी।